--------------------------------------------------------------------------------भारत देश के दो तिलिस्मी राज हैं. सुभाष चंद्र बोस का जीवन और लाल बहादुर शास्त्रीकी मौत. दोनों के बारे में किसी को कुछ कंफर्म नहीं पता है. बोस गाहे-बगाहे जनतामें दिख जाते हैं. ऐसे सबूत मिलते हैं कि लोगों की बातों पर भरोसा ना करना असंभव होजाता है. शास्त्री की मौत से जुड़े दस्तावेज हर साल किसी जादू की किताब की तरहबढ़ते जाते हैं. तर्क कहता है कि बस हो गया था. चाहे जैसे हो. पर दिल नहीं मानता.हमेशा कुछ नया खोजता रहता है. इन दोनों मामलों में. ये हमारा राष्ट्रीय ऑब्सेशन है.ये ऑब्सेशन हर देश में रहता है. अमेरिका में अब्राहम लिंकन और कैनेडी की हत्याओं सेजुड़ी कहानियां चलती हैं. हर पीढ़ी की जनता को इंतजार रहता है कि कब इस राज का सचसामने आयेगा. होगा भी क्यों नहीं . किसी देश का इतना बड़ा नेता मर जाये और पता नाचले कैसे हुआ ये. ये इंसान की कल्पनाओं को जगा देता है.--------------------------------------------------------------------------------स्वीडन में भी ऐसा ही हुआ था. स्वीडन का नेशनल ऑब्सेशन है 1986 में हुईप्रधानमंत्री ओलोफ पामे की हत्या. स्वीडन के सबसे बड़े नेता थे. सोशल डेमोक्रेटिक.एकदम मॉडर्न. पामे वियतनाम पर अमेरिका के हमले के विरोधी थे. यूरोप के पहले नेता थेजिसने इसका खुल के विरोध किया था. अपने देश में इनको बड़ा गर्व था कि मैं कोईसिक्यूरिटी लिये बिना भी घूम सकता हूं. कुछ पता नहीं चला था कि क्या हुआ था. 30 सालबाद इस केस को फिर खोला गया है. पिछले तीन दशक में कई सबूत मिले, कई जानकारियांमिलीं. कभी किसी नेता का नाम आया, कभी गर्लफ्रेंड का. 250 मीटर तक फैली आलमारी मेंकेस की फाइलें हैं. अब इस देश ने तय किया है कि क्रिस्टर पीटरसन इस मामले केप्रॉसिक्यूटर रहेंगे. पीटरसन बहुत ही धांसू इमेज वाले इंसान हैं. मामले सुलझा लेतेहैं. 20 साल के करियर में बहुत आपराधिक मामले सुलझाये हैं इन्होंने.ओलोफ पामे1986 में पामे की हत्या हुई थी. जब वो अपनी पत्नी लिस्बत के साथ स्टॉकहोम सिनेमा सेलौट रहे थे. स्वीडन दुनिया के सबसे डेवेलप्ड देशों में से एक है. हर मामले में एकनंबर पर रहता है. इस घटना ने लोगों के होश उड़ा दिये. स्वीडन के थानों में आखिरीहत्या का केस कई साल पहले का रहता है. प्रधानमंत्री की हत्या तो बहुत ही बड़ी बातथी. एक टैक्सी ड्राईवर ने सबसे पहले देखा था गोली चलते. तुरंत पुलिस को खबर भी की.एक फॉक्सवैगन कार में बैठ के हत्यारे भाग रहे थे. पर पकड़े नहीं गये. दस हजार लोगोंको थानों में बैठाया गया. दबा के पूछताछ हुई. 134 लोगों ने तो अपराध भी कुबूल करलिया. यहीं पर उनका अपराध खारिज कर दिया गया. ये सब वो लोग थे जिन्हें नाम चाहियेथा. हत्या चूंकि पब्लिक में हुई थी. तो गवाह भी थे. उनके हिसाब से बंदूकधारी लोगगोली मार हथियार समेत भाग गये.अब इस हत्या की कई थ्योरीज हैं:1. 1989 में पामे की पत्नी ने एक आदमी की शिनाख्त की थी हत्यारे के रूप में. एकड्रग एडिक्ट पीटरसन था. पर कोर्ट से छूट गया. क्योंकि गवाही से बहुत कुछ साबित नहींहो पाया था. टेक्निकल मिस्टेक थी.ड्रग एडिक्ट पीटरसन2. 2014 में एक स्वीडिश अखबार ने छापा कि एक उपन्यासकार स्टीग लार्सन ने इस केस मेंखुद पड़ताल की थी. 15 बॉक्स फाइलें इकट्ठी की थीं. लार्सन की डेथ हो गई है. लार्सनने तीन बहुत फेमस उपन्यास लिखे हैं. उन पर फिल्में भी बनी हैं. द गर्ल विद ए ड्रैगनटैटू उन्हीं में से एक थी. लार्सन ने पुलिस को एक नाम भी बताया था. बर्टिल वेडिन.उनके हिसाब से इसी ने इस हत्या की तैयारी करवाई थी. पर वेडिन के खिलाफ पुलिस कुछखोज नहीं पाई. विंको सिंडिसिक ने वेडिन के खिलाफ गवाही दी थी. पर वेडिन के पासज्यादा सबूत थे.विंको सिंडिसिक3. फिर एक नाम और निकला इन्हीं फाइलों से. अल्फ एनर्सट्रॉम. एक डॉक्टर. राइट विंगका. एक पुलिसवाली को मारने के जुर्म में सजा काट चुका था. पर इसकी गर्लफ्रेंड नेगवाही दी कि पामे के मर्डर के वक्त अल्फ उसी के साथ था. पर अल्फ बड़ी चीज था.बंदूकों का नशा. पामे का विरोधी. पामे रंगभेद और नस्लभेद के खिलाफ थे. राइट विंगवालों को ये अच्छा नहीं लगता था. अल्फ बड़ा वाला राइट विंगर था. अल्फ की एक दोस्तने बाद में बयान दिया कि अल्फ झूठ बोल रहा था. पर इन्होंने भी कुछ खास नहीं बताया.अल्फ एनर्सट्रॉम4. जर्मनी की फोकस मैगजीन ने 2011 में सरकारी दस्तावेजों से निकाल के बताया कियुगोस्लाविया सीक्रेट सर्विस के एक कॉन्ट्रैक्ट किलर ने मारा था पामे को. इवो डीनाम था इसका. युगोस्लाविया के तानाशाह टीटो ने ऑर्डर दिया था अपनी सीक्रेट पुलिसको. दुनिया भर में अपने विरोधियों को मारने के लिये.टीटो5. स्टॉकहोम के 1986 के कमिश्नर ने कहा कि पामे की हत्या कुर्दिस्तान के ग्रुप नेकी थी. पर बाद में कमिश्नर को इन्वेस्टिगेशन से ही हटा दिया गया था. 2011 में जेलमें कैद अब्दुल्ला ओकलन से पुलिस ने पूछताछ की थी. उनको शक था कि इस आदमी काकुर्दों से कोई संबंध है. कुर्द आतंकवादी स्वीडन में छिपे थे. बहुत दिन से. औरपॉलिटिकल वजहों से अब उनको बाहर किया जा रहा था.अब्दुल्ला ओकलन की तस्वीर6. जर्मनी के ही एक अखबार ने दावा किया कि स्वीडन के ही सीक्रेट सर्विस वालों नेप्रधानमंत्री को मार दिया था. क्योंकि वो उनकी रंगभेद के खिलाफ वाली पॉलिसी से खुशनहीं थे. ये षड़यंत्र तो आना ही था. किसी भी पॉलिटिकल मर्डर में अपने बॉडीगार्ड,अपने लोग तो हमेशा शक के घेरे में रहते ही हैं. हथियार रहता ही है उनके पास. अलगविचार होते ही हैं. झगड़े यदा-कदा हो ही जाते हैं. सबके अपने एजेंडे होते ही हैं.तो कुल मिलाकर पता नहीं चल पाया कि किसने मारा था पामे को. प्रधानमंत्री की हत्यास्वीडन की राष्ट्रीय चर्चा है. लोग खाली होते हैं तो बातें करने लगते हैं कि किसनेमारा होगा. पार्टियों में सिनेमा, खेल सब कुछ हो जाने के बाद लोग एक बार प्रश्न उठाही लेते हैं. अब देखते हैं कि नये प्रोसिक्यूटर क्या कर पाते हैं.