ओ रे बिस्मिल काश आते, आज तुम हिन्दोस्तां देखते कि मुल्क सारा ये टशन में थ्रिलमें है आज का लौंडा ये कहता हम तो बिस्मिल थक गए अपनी आज़ादी तो भइय्या लौंडिया केतिल में है. वक़्त आने दे बता देंगे तुझे ऐ आसमां हम अभी से क्या बतायें क्या हमारेदिल में है ऐसा कुछ कह सकने की कुव्वत रखने वाला शख्स पीयूष मिश्रा. अफवाह है कि जबये ऐक्ट वन में अपना सोलो शो करते थे तो उसके टिकट्स ब्लैक में बिकते थे. एक आदमीजो अपने आप को कुछ भी नहीं मानता है. जबकि हज़ारों आत्मायें इनके गीतों, कविताओं कोसुन-पढ़ कर उसमें अपना जिहाद और अपना सुकून तलाशती हैं. जिन्हें इनके थियेटर केदौरान इनकी यात्रा के बारे में पता है वो ये समझ चुके होंगे कि गरमी और प्रेशर किसतरह से कोयले को हीरे में बदल देते हैं. बाकी कोयला और हीरा दोनों ही असल मेंकार्बन की परतें ही हैं. क्यूं खोये खोये चांद की फिराक़ में तलाश में उदास है दिलक्यूं अपने आप से ख़फ़ा ख़फ़ा ज़रा ज़रा सा नाराज़ है दिल ये मंजिलें भी खुद ही तय करे येफासले भी खुद ही तय करे क्यूं तू रास्तों पे फिर सहम-सहम संभल-संभल के चलता है येदिल स्वानंद किरकिरे. इन्दौर का इंसान. दिल से भी और दिमाग से भी. मस्तमौला. गा देतो दिल खुश. लिख दे तो चित्त खुश. स्वानंद किरकिरे वही हैं, जिसने एक सन्डे कीदोपहर घरों में टीवी के सामने बैठे हर शख्स को रुला दिया था. गाना था - 'ओ रीचिरइय्या...'और उस दिन से हर कोई इस चेहरे को पहचानने लगा था. आवाज़ को भी. ये दोनोंही आये और बैठे हुए थे साहित्य आज तक में. साहित्य आज तक में था लल्लनटॉप का अड्डा.लल्लनटॉप अड्डा. तारीख 12 नवंबर. सामने थे लोग. वो लोग जो अब तक इन्हें किताबों,गानों और फिल्मों में पाते थे. आज वो सभी इन्हें देख रहे थे. बस इतनी सी दूरी से.इनके हाथों में थी चाय. पीयूष जी सिगरेट के कश लगाते हुए हारमोनियम संभाल रहे थे औरस्वानंद अपने ही अंदाज़ में उनका साथ दे रहे थे. स्वानंद के आने पर पीयूष मिश्र कहतेहैं कि मैं और स्वानंद एक और एक ग्यारह कर देते हैं. और हम सभी इसके गवाह बने.साहित्य आज तक में लल्लनटॉप अड्डे पर. देखते हैं:https://www.youtube.com/watch?v=e4_jtRji5Oc--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें:जब जहाज उतरे तो जय बोलिए, जब जहाज उड़ जाए तो जय बोलिए: रवीशमुनव्वर राना ने शरारती अंदाज में बताया, हवाई जहाज में बेल्ट क्यों बांधते हैं?पत्रकार दोस्त को गोवा का सीएम कैंडिडेट बनने के लिए मना रहा हूं: आशुतोषमैं अपनी बात तो रखूंगी ही, चाहे कुछ भी हो: अंजना ओम कश्यपमैंने सब कुछ हिंदी से कमाया है: प्रसून जोशी