अंकित त्रिपाठीलल्लनटॉप को एक और फायरब्रांड लौंडा मिला है. बकैती के तीर्थस्थल कानपुर से. कहिताहै कि RSS के स्कूल से पढ़ा है, जिसके हिसाब से उम्र 24 है, लेकिन असल में 25 है.IIT से बीटेक किया है. मार्क्स धर्म को अफीम कह गए थे, अंकितवा गांजा कहता है. जबमूड भन्नाता है तो वेबसाइटों के पेज पर जाकर कमेंट दाग देता है.रेज्यूम जीवन में सिर्फ एक बार बनाया, क्योंकि ये बनावटी काम लगता है. वनलाइनर ऐसेमारता है कि बड़के मठाधीश भी जल-भुन जाएं. आपके लिए एक मजेदार किस्सा लिखकर लायाहै. बांचिए. इससे आपको भी वो किस्से याद आएंगे, जब आप घरवालों को गोली दिया करतेथे.--------------------------------------------------------------------------------आजकल सर्जिकल स्ट्राइक का बहुत हल्ला हो रखा है. कोई कहि रहा है कि सीना चौड़ा होगया है, तो कोई कहि रहा है हम कइसे मान लें, सबूत तो दिखाओ. खैर हम इत्तीसीरियसबाजी नहीं छौंकेंगे. थोड़ा लाइट ही रखते हैं. तो सुनो सर्जिकल स्ट्राइक की एकमजेदार और जबराट कहानी. असली कहानी है बेटा, कान खोल के सुन ल्यो. ट्रेन में घटीथी. ट्रेन में तो बइठे ही होगे तुम. स्लीपर में रिजर्वेशन करा के. अरे याद करो जबपहली बार घर से दूर पढ़ाई करने जा रहे थे रुआंसे होकर. आंखे पोछ के चुपचाप गद्दी परसर धर के सो गए थे कि नहीं.!ट्रेन सुन के का ख्याल आता है दिमाग में? चाईं-चाईं की आवाज या पटरी पे पड़ी टट्टी.खैर छोड़ो. तो भईया बात कुछ ऐसी है कि हम जा रहे थे कानपुर से दिल्ली. श्रमशक्तिमें. बहुत सही टिरेन है. सस्ती,मद्दी और टिकाऊ. लेट भी बहुत कम होती है. 11:45 पेछूटती है कानपुर से और सबेरे तड़के ही धर देती है दिल्ली में. कभी कभी तो बिफोरटाइम. तो हम दिन भर के थके हारे सवा ग्यारह साढ़े ग्यारह बजे पहुंचे घंटाघर औरचुपचाप अपनी अपर बर्थ पे जाके कुड़क गये. निंदासे थे काफी. बस गाड़ी चलने का इंतज़ारकर रहे थे. काहे से गाड़ी चलने से न, झूला झूलने की फीलिंग आती है और नींद मस्त आजाती है. श्रमशक्ति ठहरी श्रमशक्ति. बिलकुल टाइम पे हौरन बजा के चल पड़ी. मजा आनाशुरू हो चुका था. नींद गहराने लगी थी. बाकी डिब्बे वाले भी अपनी सारी नौटंकी दिखालेने के बाद बत्ती-वत्ती बंद कर चुके थे. कुल मिलाकर माहौल बन चुका था. हर तरफखुशहाली थी. लेकिन भाईसाहब.....इत्ती खुशहाली ज्यादा देर टिकती कहां है? पनकी भीनहीं पहुंचे होंगे कि हम पर अटैक हो गया. ट्रेन में ही एक आदमी जोर-जोर से फायरिंगकरने लगा. अबे असली वाली नहीं. उससे भी घातक और दिल दहला देने वाली.मुंह और नाक केबेजोड़ कॉम्बिनेशन से घनघोर तोप बनायी गयी थी और निश्चित समयांतराल पर फड़ाके मार मारके गोले दागे जा रहे थे. खर्र खर्र की ऐसी भीषण आवाज पहले न सुनी थी भाई हमने. बुलटभी अपने 350 सीसी के इंजन से इतना कोहराम नहीं मचा पाती है, जितना इस आदमी नेनाक-मुंह के दम पे मचा रखा था. हड़कंप मच चुका था. खुशहाली के माहौल में खुशहाली कीजगह अफरा तफरी ने ले ली थी. पूरे हमले की सबसे ज्यादा विभीषिका हमको ही झेलनी पड़रही थी क्योंकि स्साला अटैकर हमाए बगल वाली अपर बर्थ पे ही तो बंकर बनाए हुए था.पूरी पिलानिंग से आया था शायद. इसीलिए ऊपर आली बर्थ ले रखी थी और मुंह गद्दी केदीवार से सटे छोर के बजाय खुले छोर की ओर कर रखा था. ताकि अपनी तबाही से ज्यादा सेज्यादा लोगों को घायल कर सके. ऊपर बंकर से ऐसी भयंकर गर्जना कर रहा था कि अगल बगलके दो दो कम्पार्टमेंट उसकी जद में आ गए थे. चार-पांच साल डेली दो घंटे रियाज करनेके बाद ही खुद को इतनी तेज चिंघाड़ने के काबिल बना पाया होगा. लाइट खोलकर देखा तोपता चला कि सच में दानव ही है. छै सवा छै फुट का दानव. कम से कम 120 किलो का होगा.पेट भी इतना बड़ा कि टीसर्ट बेचारी पूरा पेट तक नहीं ढक पा रही थी और उसका आधा पेटवक्राकार नंगी चट्टान की तरह दिख रहा था. बड़ा खतरनाक दृश्य था वो. हमारा बस चले तोहम तो अइसे महिसासुर टाइप लोगों का टीसर्ट पहनना ही बैन करा दें. फिर एक चीज हमेंअइसी दिख गई कि रूह ही कांप गई कसम से. उसने फड़कते नथुनों और थूथन का कम्पन. इतनाखौफनाक दृश्य आज तक नहीं देखा था.अंदर तक सहम गए भाईजी. अरे हम क्या बड़े से बड़ा धुरंधर सहम जाए. नाक से सांस भरता थाऔर मुंह से छोड़ता था. कनफोड़ू तरन्नुम फिरी थी उसके साथ. इतनी शिद्दत से कौन खर्राटेमार सकता है भैया? पक्का तगड़ी ट्रेनिंग ले के आया था. लेकिन अब पानी सर तक चढ़ चुकाथा. पहिले लाइट बंद करी हमने और फिर सोचने लगे कि इसकी खतरनाक आतंकवादी गतिविधियोंको कैसे रोका जाए और हमाये सहित सभी लोगों को न सोने देने के इसके मंसूबे को कैसेनाकाम किया जाये. मन तो बहुत जोर कर रहा था कि इसकी छाती पे अपनी किल्ली धर केचरचरा दें कस के. लेकिन फिर उसकी लम्बतड़ंग और बमप्लाट टाइप बॉडी देखके थोड़ा कंट्रोलकिया अपने आप को कि बिलकुल सीधे सीधे पिलना ठीक नहीं रहेगा. तभी हमें याद आया किआजकल बहुत सर्जिकल स्ट्राइक के चर्चे हैं तो काहे न एक सर्जिकल स्ट्राइक हम भी चटकादें. काफी सोचने समझने के बाद फैसला किया कि भइया अब हम नहीं रुकेंगे. इस संकट कीघड़ी में ये रिस्क तो लेना पड़ेगा. करी पिलानिंग हमने भी गुरु. खामोशी से पीठ के बललेट गये. कमर उचकाकर बैलेंस बनाते हुये, अपनी लात उसके सर के पास पहुंचाकर उसकीमुंडी को धीरे से टुनका दिया. लेकिन वो जल्लाद किस्म का प्राणी था भाई. कोई असरेनहीं हुआ. फिर जरा लम्बी सांस ली और थोड़ा और दम लगाकर एक और वार उसकी खोपड़ी पेकिया. इस बार हमला कारगर रहा. दूसरे की सीमा में घुसकर की गई सर्जिकल स्ट्राइक सफलरही थी. महादैत्य की नींद हल्की सी उखड़ी और वो थोड़ा गर्दन घुमा उमा के फिर स्लीपिंगमोड में चला गया. लेकिन इससे खर्राटे बंद हो गए उसके. बहुर देर से जारी भारी तबाहीअब थम चुकी थी. लगान के एंकर के 'हम जीत गये' सीन टाइप वाली फीलिंग आ गई थी. मनप्रफुल्लित भी था और गौरवान्वित भी. अंधेरे के कारण ज्यादा किसी के चेहरे तो नहींदिख रहे थे लेकिन सभी भावुक ही रहे होंगे और हमें धन्यवाद देना चाह रहे होंगे. हमअन्दर ही अन्दर से खुश हो रहे थे कि इत्ता बड़ा काम कर दिया है. न केवल खुद को बल्किअगल बगल के अनजाने दोस्तों को उसकी नथुनों की दुनाली से छलनी होने से बचा लिया.लेकिन एक ट्रेजेडी रही है हमाये साथ कि जब भी हम ज्यादा खुश होते हैं तो कुछ न कुछकांड हो जाता है और बिलकुल अइसा ही अबकी बार हुआ. पूरे दस मिनट भी नहीं हुए होंगेकि वो साला फिर से तोपों की सलामी देने लगा. हालात बदतर तब हो गए जब नींद गहरी होनेपर अगल बगल के कुछ और लोग भी अपना देसी कट्टा रुक रुक कर फायर करने लगे. तरह तरह कीवैराइटी थी उनके खर्राटों में. कोई हल्के से, कोई तेज. किसी के में खनक कम थी, किसीके में ज्यादा. कोई जन्नेटर चला रहा था तो कोई चकिया पीस रहा था. एक भाईसाहब तोबाकायदा कुकर की सीटी फेल करने की फिराक में जुटे थे. अइसा लग रहा था कि इन सबकीजिंदगी का एक्कै मकसद है, हमाई जिंदगी नरक बनाना. जिन बेचारों के लिए हम जान जोखिममें डाल के सर्जिकल स्ट्राइक करने गए थे, वही साले हमाई जान के ही दुश्मन निकले. एकगंभीर तथ्य भी पता चला यार हमको कि खर्राटा मारने वाले इस दुनिया में मजारटी मेंहैं. और जब हमने ये जान लिया कि हम मजारटी में नहीं हैं, मनारटी में हैं. और इत्तेलोगों से अकेले पंगा नहीं ले पाएंगे तो हमाए खून ने खौलना बंद कर दिया. चुपचापचद्दर तान के सोने की कोशिश करने लगे और ये सोचने लगे कि कल सुबह जब दिल्लीपहुंचेंगे तो सीधे सुप्रीम कोर्ट जाके अपने 'राईट टू सिलीप' मौलिक अधिकार केउल्लंघन के लिए याचिका दायर कर देंगे.