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आखिरकार देश को मिल गया लोकपाल, जिसके लिए 2011 से आंदोलन हो रहा था

अन्ना के आंदोलन हो गए, केजरीवाल सरकार बना ले गए, लेकिन लोकपाल न बन पा रहा था.

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18 मार्च 2019 (अपडेटेड: 18 मार्च 2019, 12:46 PM IST)
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जस्टिस पिनाकी घोष ने सुप्रीम कोर्ट में अपने कार्यकाल के दौरान कई अहम फैसले सुनाए. फाइल फोटो.
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आखिर देश को पहला लोकपाल मिल गया. सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस पिनाकी चंद्र घोष देश के पहले लोकपाल होंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन और प्रसिद्ध एडवोकेट मुकुल रोहतगी की कमेटी ने उनके नाम पर मुहर लगा दी है. घोष की नियुक्ति की फाइल राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के पास भेज दी गई है. लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद मल्लिकार्जुन खड़गे ने सातवीं बार इस बैठक का बहिष्कार किया. उनको बैठक में विशेष आमंत्रित सदस्य के तौर पर बुला गया था. खड़गे के मुताबिक लोकपाल चयन समिति की बैठक में 'विशेष आमंत्रित सदस्य' का कोई प्रावधान नहीं है. और उनको इसी कैटेगरी के तहत बैठक में शामिल होने के लिए बुलाया गया था. सांसद कम होने की वजह से कांग्रेस सांसद मल्लिकार्जुन खड़गे तकनीकी तौर पर नेता प्रतिपक्ष नहीं हैं. सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि नेता विपक्ष न होने की स्थिति में विपक्षी दल के नेता को विशेष आमंत्रित सदस्य के तौर पर शामिल किया जाएगा. मगर खड़गे ने इसका विरोध किया. उनका कहना था कि मोदी सरकार लोकपास सेलेक्शन कमेटी की चयन प्रक्रिया में संशोधन करे. और ये तय करे कि नेता प्रतिपक्ष न होने की स्थिति में सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता को कमेटी में सदस्य के तौर पर शामिल किया जाए.
पिनाकी चंद्र घोष अभी मानवाधिकार आयोग के सदस्य हैं. फाइल फोटो. इंडिया टुडे.
पिनाकी चंद्र घोष अभी मानवाधिकार आयोग के सदस्य हैं. फाइल फोटो. इंडिया टुडे.

कौन हैं पिनाकी चंद्र घोष? विपक्ष के विरोध के बीच पिनाकी चंद्र घोष के नाम को फाइनल कर दिया गया है. वे देश के पहले लोकपाल होंगे. लोकपाल भ्रष्टाचार के खिलाफ काम करने वाली संस्था है. इसी के साथ देश भर में ये चर्चा चल निकली कि आखिर ये पिनाकी चंद्र घोष कौन हैं? 28 मई, 1952 को पैदा हुए पिनाकी चंद्र घोष सुप्रीम कोर्ट के जज रह चुके हैं. फिलहाल वो मानवाधिकार आयोग के सदस्य हैं.
कहां से हुई पढ़ाई लिखाई? जस्टिस पिनाकी चंद्र घोष ने सेंट जेवियर्स कॉलेज से बीकॉम और यूनिवर्सिटी ऑफ कोलकाता से एलएलबी की पढ़ाई की है. वे कलकत्ता हाईकोर्ट के अटॉर्नी एट लॉ भी रह चुके हैं. साल, 1997 में वे कलकत्ता हाईकोर्ट के जज बने. इसके बाद दिसंबर, 2012 में वे आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने. कोई दो साल पहले मई, 2017 में वे सुप्रीम कोर्ट से रिटायर हुए थे. वे 2013 से 2017 तक सुप्रीम कोर्ट के जज रहे. जस्टिस घोष वेस्ट बंगाल स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन और नेशनल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी के सदस्य भी रह चुके हैं.
सुप्रीम कोर्ट में कौन से अहम फैसले सुनाए? #जस्टिस पिनाकी घोष ने सुप्रीम कोर्ट में अपने कार्यकाल के दौरान कई अहम फैसले सुनाए. इनमें जयललिता की पूर्व सहयोगी शशिकला को आय से अधिक संपत्ति के मामले में दोषी ठहराने वाला उनका फैसला चर्चित रहा. इस केस में जयललिता भी आरोपी थीं. फैसला सुनाए जाने से पहले उनकी मृ्त्यु हो चुकी थी. #अयोध्या में विवादित ढांचा गिराने के मामले में जस्टिस रोहिंटन नरीमन की बेंच में रहते हुए बीजेपी के सीनियर लीडर लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, कल्याण सिंह और बाकी नेताओं पर आपराधिक साजिश की धारा के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया. #जस्टिस राधाकृष्णन के साथ बेंच में रहते हुए उन्होंने जल्लीकट्टू और बैलगाड़ी दौड़ जैसी परंपरा को पशुओं के प्रति हिंसा मानते हुए रोक लगाई.
बड़े आंदोलन के बाद मिला देश को लोकपाल लोकपाल की मांग को लेकर देश में 2012 में जोरदार आंदोलन हुआ था. सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे, दिल्ली के मौजूदा सीएम अरविंद केजरीवाल, पुदुचेरी की उप राज्यपाल किरण बेदी समेत कई जानी मानी-हस्तियों ने देश में लोकपाल की नियुक्ति को लेकर तत्कालीन मनमोहन सरकार के खिलाफ देश भर में विशाल राजनीतिक आंदोलन चलाया था. करीब 12 दिन चले इस आंदोलन के दौरान देश भर में जबरदस्त विरोध देखने को मिला था. तत्कालीन सरकार ने जनभावनाओं का सम्मान करते हुए लोकपाल गठित करने का वादा किया था. तब से लगातार लोकपाल का गठन लटका हुआ था. अब जाकर ये फैसला हुआ है.


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