वीरप्पन को मारने वाले के विजय कुमार ने बताया, पुलिसवाले क्यों लगाते हैं काला चश्मा?
अब के. विजय कुमार आतंकियों को मारने के लिए जम्मू-कश्मीर पहुंचे हैं.
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लल्लनटॉप शो में सुपर कॉप के विजय कुमार (बाएं) और अमिताभ यश.
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देश के सबसे चौचक लल्लनटॉप शो में पेटी बाजा बैंड के बाद बारी थी सुपरकॉप्स की. कॉप्स वाले अंदाज में ही मंच पर आए तमिलनाडु कैडर के आईपीएस और फिलहाल केंद्रीय गृह मंत्रालय में नैशनल सिक्युरिटी एडवाइजर के तौर पर कार्यरत के विजय कुमार और उत्तर प्रदेश एसटीएफ के आईजी अमिताभ यश. इन दोनों ही कॉप्स से सवालों का सिलसिला शुरू किया लल्लनटॉप के सरपंच सौरभ द्विवेदी ने.
पुलिस विभाग से कैसे जुड़े?
के. विजय कुमार : हम लोग अपने परिवार से पुलिस में जाने वाली दूसरी पीढ़ी हैं. मेरे पिता ने सब इन्सपेक्टर के तौर पर पुलिस जॉइन की थी.
अमिताभ यश : मेरी परवरिश थाने की है. मेरे पिता ने मुझे पुलिस से दूर रखने की कोशिश की. पुलिस के सिवा ऐसा कोई विभाग नहीं, जहां रहकर देश की इतनी सेवा की जा सके.
राजीव गांधी की हत्या के वक़्त आप तमिलनाडु में तैनात थे. कैसा महसूस हुआ आपको?
विजय कुमार: जब खबर मिली, तो बहुत भावुक हो गया था. रो रहा था. काला चश्मा पहनकर आंसू छुपाए और ड्यूटी निभाई कानून व्यवस्था बनाकर रखी. सुरक्षाकर्मी काला चश्मा पहनते हैं ताकि कोई हमारी नजर पकड़ ना सके. हमने राजीव गांधी की हत्या के बाद काल चश्मा पहनकर लॉ एंड ऑर्डर कंट्रोल किया ताकि अपने आंसू छिपा सकें.
हमने बचपन में सुना था. बांदा में एक बड़ा डकैत है ददुआ. बड़े हुए तब भी ददुआ था. नौकरी की तब भी था. फिर एक दिन सुना, ददुआ मारा गया. बीहड़ का अनुभव तब से ही शुरू हुआ?
अमिताभ यश : मेरी टीम बहुत अच्छी थी.
आपकी टीम में लल्लनटॉप लोग थे कुछ. एक रेडियो वाला भी था. उसके बारे में बताइए?
अमिताभ यश : पुलिसवाले थोड़े अंधविश्वासी हो जाते हैं. तो वो जो शख्स था, वो भविष्य बताता था. हम लोग पूछ लेते थे. हाथ दिखवा लेते थे.
के विजय कुमार : ज्योतिषी विद्या के कारण अगर एक-दो फीसद भी मनोबल बढ़ता है, तो क्या बुराई है. वीरप्पन को मारने वाले दिन भी ज्योतिषी ने कहा था कि दिन बहुत अच्छा रहेगा. ऐसा ही हुआ.
वीरप्पन के ऑपरेशन का अनुभव कैसा था?
के. विजय कुमार: हम वीरप्पन के इंतज़ार में बैठे थे. सीक्रेट ऑपरेशन. जब वीरप्पन की गाड़ी गुज़री, तो एक सब इंस्पेक्टर जो वहां सादे कपड़ों में एक होटल के अंदर बैठा था, उसने इशारा किया। इशारे में बताया कि वीरप्पन चार लोगों के साथ है.
सर: जब वीरप्पन की मौत की पुष्टि हुई, तो कैसा महसूस किया?
के. विजय कुमार: बड़ा नाटकीय दृश्य था. मैं आज भी उसको याद करता हूं.
ऑपरेशन ददुआ को कैसे देखते हैं?
अमिताभ यश : इस ऑपरेशन के 24 घंटे पहले हमने इसी गैंग के एक हिस्से के लिए प्लानिंग की थी. वो कामयाब रहा. उनके चार लोग मारे गए. उसके बाद मुखबिर ने खबर दी, ददुआ के एक्टिविटी की. हम दम साधकर इंतज़ार करते रहे। ऑपरेशन बहुत प्लानिंग से हुआ था. एक गोली चलने के बाद हमारा मुखबिर एक्सपोज़ हो जाता. हमारे पास एक ही मौका था. ऑपरेशन सफल रहा. गैंग के सारे लोग मारे गए. ये STF की बहुत बड़ी जीत थी.
किसी ऑपरेशन के लिए कैसै तैयारी करते हैं?
विजय कुमार: एंबुश बहुत सावधानी से होता है. हम कोई निशान नहीं छोड़ते. मिट्टी पर अपने पसीने की गंध भी नहीं छोड़ते. बिना हरकत किए घंटों इंतज़ार करते रहते हैं. जो जितनी ज़्यादा देर ये कर लेता है, वो उतना बेहतर पुलिसवाला माना जाता है. जंगल की भाषा अलग होती है. उसको समझना होता है. जंगल आपको गलतियों का मौका नहीं देता.
सवाल और जवाब का सिलसिला अभी खत्म भी नहीं हुआ था कि मंच पर उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव आ गए. उनके आने के साथ ही अखिलेश भइया जिंदाबाद के नारे लगने लगे. उत्साहित युवाओं को किसी तरह से शांत करवाने के बाद के विजय कुमार और अमिताभ यश ने लोगों से एक बार फिर अपने अनुभव शेयर किए और पुलिसवालों की बहादुरी के किस्से सुनाकर सबसे चौकस और चौचक से विदाई ली.
देखिए लल्लनटॉप शो में के विजय कुमार और अमिताभ यश की पूरी बातचीत:
पुलिस विभाग से कैसे जुड़े?
के. विजय कुमार : हम लोग अपने परिवार से पुलिस में जाने वाली दूसरी पीढ़ी हैं. मेरे पिता ने सब इन्सपेक्टर के तौर पर पुलिस जॉइन की थी.
अमिताभ यश : मेरी परवरिश थाने की है. मेरे पिता ने मुझे पुलिस से दूर रखने की कोशिश की. पुलिस के सिवा ऐसा कोई विभाग नहीं, जहां रहकर देश की इतनी सेवा की जा सके.
राजीव गांधी की हत्या के वक़्त आप तमिलनाडु में तैनात थे. कैसा महसूस हुआ आपको?
विजय कुमार: जब खबर मिली, तो बहुत भावुक हो गया था. रो रहा था. काला चश्मा पहनकर आंसू छुपाए और ड्यूटी निभाई कानून व्यवस्था बनाकर रखी. सुरक्षाकर्मी काला चश्मा पहनते हैं ताकि कोई हमारी नजर पकड़ ना सके. हमने राजीव गांधी की हत्या के बाद काल चश्मा पहनकर लॉ एंड ऑर्डर कंट्रोल किया ताकि अपने आंसू छिपा सकें.
हमने बचपन में सुना था. बांदा में एक बड़ा डकैत है ददुआ. बड़े हुए तब भी ददुआ था. नौकरी की तब भी था. फिर एक दिन सुना, ददुआ मारा गया. बीहड़ का अनुभव तब से ही शुरू हुआ?
अमिताभ यश : मेरी टीम बहुत अच्छी थी.
आपकी टीम में लल्लनटॉप लोग थे कुछ. एक रेडियो वाला भी था. उसके बारे में बताइए?
अमिताभ यश : पुलिसवाले थोड़े अंधविश्वासी हो जाते हैं. तो वो जो शख्स था, वो भविष्य बताता था. हम लोग पूछ लेते थे. हाथ दिखवा लेते थे.
के विजय कुमार : ज्योतिषी विद्या के कारण अगर एक-दो फीसद भी मनोबल बढ़ता है, तो क्या बुराई है. वीरप्पन को मारने वाले दिन भी ज्योतिषी ने कहा था कि दिन बहुत अच्छा रहेगा. ऐसा ही हुआ.
वीरप्पन के ऑपरेशन का अनुभव कैसा था?
के. विजय कुमार: हम वीरप्पन के इंतज़ार में बैठे थे. सीक्रेट ऑपरेशन. जब वीरप्पन की गाड़ी गुज़री, तो एक सब इंस्पेक्टर जो वहां सादे कपड़ों में एक होटल के अंदर बैठा था, उसने इशारा किया। इशारे में बताया कि वीरप्पन चार लोगों के साथ है.
सर: जब वीरप्पन की मौत की पुष्टि हुई, तो कैसा महसूस किया?
के. विजय कुमार: बड़ा नाटकीय दृश्य था. मैं आज भी उसको याद करता हूं.
ऑपरेशन ददुआ को कैसे देखते हैं?
अमिताभ यश : इस ऑपरेशन के 24 घंटे पहले हमने इसी गैंग के एक हिस्से के लिए प्लानिंग की थी. वो कामयाब रहा. उनके चार लोग मारे गए. उसके बाद मुखबिर ने खबर दी, ददुआ के एक्टिविटी की. हम दम साधकर इंतज़ार करते रहे। ऑपरेशन बहुत प्लानिंग से हुआ था. एक गोली चलने के बाद हमारा मुखबिर एक्सपोज़ हो जाता. हमारे पास एक ही मौका था. ऑपरेशन सफल रहा. गैंग के सारे लोग मारे गए. ये STF की बहुत बड़ी जीत थी.
किसी ऑपरेशन के लिए कैसै तैयारी करते हैं?
विजय कुमार: एंबुश बहुत सावधानी से होता है. हम कोई निशान नहीं छोड़ते. मिट्टी पर अपने पसीने की गंध भी नहीं छोड़ते. बिना हरकत किए घंटों इंतज़ार करते रहते हैं. जो जितनी ज़्यादा देर ये कर लेता है, वो उतना बेहतर पुलिसवाला माना जाता है. जंगल की भाषा अलग होती है. उसको समझना होता है. जंगल आपको गलतियों का मौका नहीं देता.
सवाल और जवाब का सिलसिला अभी खत्म भी नहीं हुआ था कि मंच पर उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव आ गए. उनके आने के साथ ही अखिलेश भइया जिंदाबाद के नारे लगने लगे. उत्साहित युवाओं को किसी तरह से शांत करवाने के बाद के विजय कुमार और अमिताभ यश ने लोगों से एक बार फिर अपने अनुभव शेयर किए और पुलिसवालों की बहादुरी के किस्से सुनाकर सबसे चौकस और चौचक से विदाई ली.
देखिए लल्लनटॉप शो में के विजय कुमार और अमिताभ यश की पूरी बातचीत:
