रश्मि प्रियदर्शिनी पांडेरश्मि प्रियदर्शिनी एक स्वतंत्र लेखक/पत्रकार हैं. मैथिली-भोजपुरी अकादमी की संचालनसमिति की सदस्य हैं. उन्हें ज़ी नेटवर्क और हमार टीवी में पत्रकारिता का लंबा अनुभवप्राप्त है. कई मंचों से काव्य-पाठ करती आ रही हैं. आजकल 'बिदेसिया फोरम' नाम केडिजिटल प्लेटफॉर्म का संचालन कर रही हैं. दी लल्लनटॉप के लिए एक लंबी कहानी 'शादीलड्डू मोतीचूर' लिख रही हैं. शादी लड्डू मोतीचूर कहानी शहर और गांव के बीच की रोचकयात्रा है. कहानी के केंद्र में है एक विवाहित जोड़ी जिन्होंने शादी का मोतीचूर अभीचखा ही है. प्रस्तुत है इसकी 16वीं किस्त---------------------------------------------------------------------------------भाग 16- फ़िल्म सिटी! उसके सपनों की नगरीहेलो, आर यू देयर?' पूनम जैसे सोते से जाग पड़ी- 'जी, जी...' 'ओके देन, कल आप दो बजेहमारे चैनल के नोएडा ऑफिस में होंगी.' कॉल कट चुकी थी पर मोबाइल हाथ मे लिए पूनम अबभी सोचों के भंवरजाल में फंसी थी. 'क्या करे? जाए या नहीं?' चुपके से भेजी गईरेज़्यूमे का क्विक रिस्पॉन्स आ चुका था. पूनम इसे अपना गुडलक समझे या... 'पी' नेमीडिया के जिस स्याह चेहरे को दिखाया था, उसे एक इशारा समझकर इंटरव्यू में न जाए.दूसरी तरफ चन्दर को भी उसने इस बारे में कुछ नहीं बताया था. 'क्या करे!'यही सब सोचती वो बाहर छत पर निकल आई. सिगरेट की महक बता रही थी कि 'पी' भी अपनी छ्तपर है. वो कुछ बोलती इससे पहले ही पास आती 'पी' बोल पड़ी- 'क्या हुआ पूनम? एनीथिंगसीरियस?' पूनम ना चाहते हुए भी उसे सब बताती चली गई. पी ने धुएं की लकीर हवा मेंउड़ाते हुए पूछा- 'तो प्रॉब्लम क्या है?'फिर जैसे खुद ही सब समझते हुए बोल पड़ी- 'ओ हेलो, तू मेरी कहानी की वजह से परेशानहै? अरे यार! वो मेरा एक्सपीरियंस था. वो सब मेरे साथ हुआ था. मेरी प्राथमिकताएं,मेरे उसूल अलग थे. मेरा ऑफिस, बॉस, सहकर्मी सब अलग थे. चैनल अलग था. तू इन सब कोरिलेट क्यों कर रही है? तेरे साथ इंशाअल्लाह सब ठीक होगा. मेरा विश्वास है तू रॉककरेगी यार! जा.'पूनम के माथे की लकीरें फिर भी कम नहीं हुईं. चन्दर को बताना अभी बाकी था. इसकेअलावा पूनम जो बिहार से बाहर कभी निकली नहीं थी, इस इंटरव्यू को लेकर सशंकित थी.'क्या वो कर पाएगी?''अबे यार, बस कर सोचना. ज्यादा से ज्यादा क्या होगा? जॉब नहीं मिलेगी? यही न? तुझेनौकरी से थोड़ी निकाल देंगे? बिंदास जा. जो होगा, देखा जाएगा.' कहती हुई पी ने दूसरीसिगरेट सुलगा ली. तभी सीढ़ियों पर किसी के आने की आहट हुई. चन्दर के आने का समय होचुका था. पूनम ने आंखों ही आंखों में 'पी' से इजाज़त ली. उसकी हड़बड़ाहट देख 'पी'मुस्कुरा पड़ी. वो जानती थी कि यहां के सो कॉल्ड शरीफ उससे दूर भागते थे. वो पूनम कीछत की तरफ से हटकर अपनी तरफ आ गई.चन्दर को पानी-चाय वगैरह देकर पूनम ने धीरे-धीरे कल के इंटरव्यू की बात बतानी शुरुकी- 'वो कल दो बजे नोएडा जाना है. आपकी छुट्टी है न!' चन्दर- 'क्यों नहीं! बहुतदिनों से प्रिया दी बुला रही हैं! कल ही चलते हैं. थोड़ा घूमना-फिरना भी हो जाएगा.'पूनम- 'प्रिया दीदी?' चन्दर(उसकी तरफ गौर से देखते हुए)- 'हां, प्रिया दी के यहांजाने की बात कर रही हो न! वो नोएडा ही तो रहती हैं !' कहता हुआ चन्दर टीवी के चैनलखंगालने लगा. पूनम दो मिनट चुप रही. थोड़ी देर बाद गला साफ करते हुए बोली- 'हांप्रिया दी के यहां भी बाद में जा सकते हैं. पर पहले...' चन्दर की सवालिया नज़रेंउसकी ओर उठी. 'वो. वो दरअसल कुछ दिनों पहले 'प्रखर चैनल' में अपना रेज़्यूमे मेलकिया था. तो, तो कल उसी टेस्ट के लिए बुलाया है' जवाब देती पूनम ने अपनी नज़रें नीचीकर लीं. पूरी उम्मीद थी कि चन्दर मेल की बात छुपाने पर दुखी होगा. नाराज़ होगा.चन्दर को अपने कानों पर विश्वास नहीं हुआ. 'मेल कर दिया और मुझे बताया भी नहीं!मुझसे छुपाया? अरे!' पर प्रत्यक्षतः उसने इतना ही कहा- 'ये तो बड़ी खुशी की बात है!तैयारी कर ली है?' पूनम उसका जवाब सुन हैरान रह गई. क्या सच में चन्दर को बुरा नहींलगा? उसकी आंखों मे आंसू आ गए. पास आकर चन्दर के सीने से लगी वो बस इतना कह पाई-'कितने अच्छे हैं आप! मुझे लगा आप नाराज़ होंगे.' चन्दर ने उसकी ठुड्डी उठाते हुएकहा- 'नाराज़ क्यों होंगे? ये तो खुशी और गर्व की बात है मेरे लिए. तुमने खुद पताकिया, रेज़्यूमे भेजा और अब कल तुम्हारा इंटरव्यू है. देखना,सब अच्छा होगा.' पूनममुस्कुराती हुई बेडरूम में चली गई. उधर बेचैनी से छत पर टहलता चन्दर अंदर ही अंदरसुलग रहा था- ' रेज़्यूमे कब बना लिया? मुझे बताया- दिखाया भी नहीं! और किस चैनल मेंवेकेंसी है, इसे कैसे पता चला? कहीं वो बगल वाली लड़की से बातचीत तो नहीं करने लगीहै? जॉब, खासकर मीडिया के प्रति पूनम का जुनून अब चन्दर की समझ में आने लगा. वोहोंठों ही होंठों में बुदबुदा उठा- 'कल देखते हैं. इतने लोग आते हैं एंकर बनने,कितने बन पाते हैं? वैसे, अच्छा ही है. इंटरव्यू दे के देख ले. होना-जाना तो वैसेभी नहीं है इसका. जब 'हम-हम' करके देहाती लहजे में बात करेगी तो खुद ही छांटदेंगे.' चन्दर अपने अंदर चल रही भावनाओं को समझ नहीं पा रहा था. वो क्यों इस प्रकारबेचैन हो उठा है? उसे महज़ इस बात की तकलीफ थी कि उससे बात छुपाई गई या कहीं न कहींउसका पुरुषदंभ आहत हो उठा था?पूनम उसे आवाज़ दे रही थी. वो कुनमुनाता हुआ तकिए के अंदर सर घुसाए जा रहा था- 'सोनेदो यार! आज तो छुट्टी है मेरी !' 'दस बज गए. कब तक सोते रहेंगे! नोएडा जाना है न!'पूनम उसे झझकोरते हुए उठा रही थी. चन्दर ने बमुश्किल आंखें खोलीं. सामने खुशबू मेंमहकता पूनम का वजूद था. टप-टप बालों से पानी की बूदें गिर रही थीं. सहसा ही चन्दरका दिल बेईमान हो उठा. इससे पहले कि वो पूनम को अपनी अंकवारी में भरता, वोखिलखिलाती हुई दूर हो गई.'क्या यार..! चन्दर ने रुआंसी आवाज़ निकाली. सफ़ेद लखनवी लंबी कुर्ती और सफेद चूड़ीदारपाजामे के ऊपर सिल्क का लाल दुपट्टा डाले पूनम ग़ज़ब ही खूबसूरत लग रही थी. बिस्तर सेउठने से पहले चन्दर ने आंख भर कर उसे देखा और फिर एक कोशिश की- 'जाना जरूरी है ?'पूनम की सशंकित आंखों में एक साया सा लहरा गया. चन्दर हंसते हुए बाथरूम की ओर चला-'अरे यार! मज़ाक कर रहे हैं. एक घंटे के अंदर ही निकल चलेंगे तुम्हारे नोएडा केलिए.' पूनम मुस्कुरा उठी. वो 'नोएडा सेक्टर-16ए' में खड़ी थी. "फ़िल्म सिटी! उसकेसपनों की नगरी." हैरानी से पूनम की आंखें चौड़ी हो गई. वो सारे चैनल जो घर-घर कीटीवी पर चौबीस घन्टे चलते हैं, सब के सब यही हैं. गाड़ियों से उतरता हर दूसरा चेहराजाना-पहचाना लगता. कहीं लड़के-लड़कियों का ग्रुप ठहाकों के साथ बहस कर रहा है तो कहींलिट्टी-चोखा वाले ठेले पर ठेलमठेल मची है. कहीं किसी चाय की स्टॉल पर एक चैनल छोड़करदूसरा चैनल जॉइन करने वालों पर कयास लगाए जा रहे हैं तो कहीं मॉडल सरीखी कन्याएंगाड़ी पार्किंग की जगह तलाश रही हैं. शीशे से बनी पूरी की पूरी बिल्डिंगें. गेट परमौजूद गार्ड्स, हर दूसरी बिल्डिंग पहली से ज़्यादा खूबसूरत. खिड़कियों से दिखते, कामकरते तेज़ तर्रार युवा. गले मे आईकार्ड लटकाए अपने-अपने काम में व्यस्त. ओह! बस यहीतो है उसका सपना. एक आईकार्ड. और उसमें तस्वीर के साथ उसका नाम.सेक्टर 16 मेट्रो स्टेशन, नोएडा.चन्दर ने उसकी एंट्री करवाई और उसे गेट के अंदर छोड़ कर चला गया. अचानक ही पूनम घबराउठी. दर्पण सी चिकनी फर्श पर उसके पांव डगमगाने लगे और हथेलियों में पसीना तिर आया.उसने मन ही मन अपने इष्टदेव को याद किया और साहस करती आगे बढ़ी. इतना बड़ा ऑफिस. कहांजाना है? किससे पूछे? वो वही ठिठककर रुक गई. तभी उसके पास से तूफान की तरह एक लड़कागुजरा. इससे पहले कि वो उसे रोक कर कुछ पूछती, वो तीर सा निकल गया. एक गलियारे मेंघुसने से पहले उसे न जाने क्या लगा कि वो रुक गया. पलट कर पूनम की ओर देखा और पूछा-'टेस्ट ?'पूनम ने हां में सर हिलाया. उसने मुस्कुराते हुए एक कमरे की ओर इशारा किया और चलागया. सावधानी से कदम बढ़ाती पूनम ने दरवाज़े पर ठिठक कर एक बार फिर सारे देवी-देवताओंको मन ही मन याद किया और अंदर आ गई. कम से कम पचास लोगों की उपस्थिति से कमरा भराहुआ था. एक से एक स्मार्ट लड़कियां और लड़के. धाराप्रवाह अंग्रेज़ी में आपस मेंबतियाते. पूनम की धड़कनें तेज़ हो गईं. कुछ सोचकर थोड़ी देर बाद वो खुद ही मन ही मनहंस पड़ी कि खामाखा इतना बड़ा सपना देख डाला!-------------------------------------------------------------------------------- …टू बी कंटीन्यूड!--------------------------------------------------------------------------------भाग 1- दिल्ली वाले दामाद शादी के बाद पहली बार गांव आए हैं!भाग 2- दुल्हन को दिल्ली लाने का वक़्त आ गया!भाग 3- हंसती खिलखिलाती सालियां उसके इंतज़ार में बाहर ही बरसाती में खड़ी थींभाग 4- सालियों ने ठान रखा है जीजाजी को अनारकली की तरह नचाए बिना जाने नहीं देंगेभाग 5- ये तो आंखें हैं किसी की... पर किसकी आंखें हैं?भाग 6- डबडबाई आंखों को आंचल से पोंछती अम्मा, धीरे से कमरे से बाहर निकल गई!भाग 7- घर-दुआर को डबडबाई आंखों से निहारती पूनम नए सफ़र पर जा रही थीभाग 8- काश! उसने अम्मा की सुन ली होतीभाग 9- औरतों को मायके से मिले एक चम्मच से भी लगाव होता हैभाग 10- सजना-संवरना उसे भी पसंद था पर इतना साहस नहीं था कि होस्टल की बाउंडरी पारकर सकेभाग 11- ये पीने वाला पानी खरीद के आता है? यहां पानी बेचा जाता है?भाग 12- जब देश में फैशन आता है तो सबसे पहले कमला नगर में माथा टेकते हुए आगे बढ़ताहैभाग 13- अगर बॉस को पता चला कि मैंने घूमने के लिए छुट्टी ली थी, तो हमेशा के लिएछुट्टी हो जाएगीभाग 14- बचपन से उसकी एक ही तो इच्छा थी- 'माइक हाथ में थामे धुंआधार रिपोर्टिंगकरना'भाग 15- उसे रिपोर्टर बनना था रिसेप्शनिस्ट नहीं--------------------------------------------------------------------------------…टू बी कंटीन्यूड!--------------------------------------------------------------------------------वीडियो- किताबवाला: चौचक दास्तानगो हिमांशु बाजपेयी ने सुनाए लखनउआ किस्से