प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार 9 जनवरी 2017 को डेनमार्क के मिनिस्टर लार्सक्रिश्चियन से मुलाकात की. मांग की कि पुरुलिया हथियार कांड के आरोपी किम डेवी काप्रत्यर्पण किया जाए. क्रिश्चियन वाइब्रेंट गुजरात सम्मेलन में भाग लेने आए हैं.किम डेवी पर वेस्ट बंगाल के पुरुलिया में एंटोनोव N-26 से अवैध हथियार गिराने काआरोप है.पर क्या था ये मामला जिसमें आरोपी किम डेवी बंगाल में हथियार गिरा रहा था?पुरुलिया जंक्शन (सोशल मीडिया से)18 दिसंबर 1995 को पुरुलिया के लोग सुबह के वक्त अपने खेतों में जा रहे थे. उधर कुछबक्से दिखाई दिये. यूं ही गिरे हुए. अक्सर एलियन और दिस-दैट चलता रहता है. तोक्यूरियस लोगों ने बक्से खोल लिए. पता चला कि विस्फोटक हथियार भरे हुए हैं बक्सोंमें. पूरे देश बवाल कट गया. कि इंडिया पर हमला होने वाला है. इससे ठीक एक दिन पहले17 सितंबर 1995 की रात को पुरुलिया में एक रूसी का फ्रेट जहाज उड़ रहा था. माल ढोनेवाले इस जहाज से अत्याधुनिक हथियारों की तीन पेटियां पैराशूट से नीचे गिराई गईं.पेटियों में 300 AK-47, 15 हजार कारतूस, 8 रॉकेट लॉन्चर, टैंक पर हमला करने वालेहथगोले, 9 MM की पिस्तौलें, नाइट विजन ग्लास सब भरे पड़े थे. फिर ये जहाज बनारस आगया. एकदम से हड़कंप मच गया. किसी भी देश में किसी दूसरे देश से आया जहाज यूं हीउड़ता रहे, और किसी तीसरे देश में बने हथियार गिराए तो भय पैदा होना लाजिमी है. वोभी तब जब देश में कश्मीर, नॉर्थ-ईस्ट और नक्सल आतंकवाद तबाही मचाये हुए हो. इंडियावैसे भी अद्भुत देश है. उग्रवादी तो हैं ही, समय-समय पर कई ऐसी संस्थाएं भी निकलआती हैं जो अलग संविधान बनाना चाहती हैं. सरकार अपने हिसाब से चलाना चाहती हैं.2016 में मथुरा का रामवृक्ष यादव कांड कुछ ऐसा ही था. जय गुरुदेव वाले ये लोग तोपूरा इकॉनमिक सिस्टम ही बदलने चले थे.तो पुरुलिया वाले मामले में उंगलियां उठीं आनंद मार्ग संस्था पर. क्योंकि इनकामुख्यालय पुरुलिया में ही था. और ये लोग भी देश में बड़ा बदलाव चाहते थे.कम्युनिस्टों से इनकी बिल्कुल नहीं पटती थी. हथियार वाले जहाज के साथ नाम आया थाडेनमार्क के किम डेवी का. ये बंगाल में बहुत दिन रहा था. इसको पूरी घटना कामास्टरमाइंड बताया जा रहा था. कहा जा रहा था कि इसकी प्लानिंग पर ही बंगाल मेंकत्ले-आम मचने वाला था. सीबीआई ने तो यहां तक कह दिया था कि किम डेवी भी आनंदमार्गीहै. पर कोर्ट ने आनंद मार्ग के खिलाफ कोई सबूत नहीं पाया.फिर कहा गया कि हथियार गलती से यहां गिर गये. हथियार बर्मा भेजे जाने थे. अमेरिकाभेज रहा था. फिर कहा गया कि रूस भेज रहा था. फिर कहा गया कि नॉर्थ-ईस्ट केआतंकवादियों से निपटने के लिए ये हथियार इंडिया ने ही मंगवाए थे. फिर किसी नेअंदाजा लगाया कि हो ना हो ये श्री लंका में लिट्टे उग्रवादियों की मदद के लिए आयाथा. शायद जब इतना कह दिया गया तो सीबीआई सुस्त पड़ गई. शायद पब्लिक की अफवाहें सुनसीबीआई ने कहा होगा कि लो तुम ही लोग सीबीआई बन लो. नहीं कर रहे जांच.सीबीआई की जांच के बरसों बाद डेवी ने खतरनाक बयान दियाखैर मजाक अलग है. सीबीआई डेवी को गली-गली खोज रही थी. पर कहा जाता है कि वो शुरू सेही डेनमार्क में ही है. इस बात पर भरोसा किया जा सकता है. क्योंकि 2011 में डेवी नेटीवी पर इंटरव्यू दिया. कहा- पुरुलिया में हथियार तो इंडिया की केंद्र सरकार ने हीगिरवाए थे. इसमें ब्रिटेन की खुफिया एजेंसी MI-5 और इंडिया की खुफिया एजेंसी रॉ भीशामिल थे. ये हुआ था वेस्ट बंगाल की कम्युनिस्ट सरकार के आतंक से लोगों को बचाने केलिए. बंगाल में रेप और मर्डर से लोग तंग हो गये थे. मैंने तो अपनी आंखों से अपनेदोस्तों को मरते देखा था. बंगाल के लिए मैंने 15 साल काम किया है. गरीबों के लिएक्या कुछ नहीं किया है. पर कम्युनिस्टों के अत्याचार को बर्दाश्त करना मेरे लिएमुश्किल हो गया था. 24 सांसदों ने तो प्रेसिडेंट को लिखा था कि इन अत्याचारों सेलोगों को बचाओ. पर कुछ हुआ नहीं. बाद में केंद्र सरकार को ये समझ आया. त्रिपुरा मेंभी तो सरकार ने यही किया था. ये बताइए कि मैं बंबई से निकला कैसे?किम डेवीडेवी ने ये भी कह दिया कि भारत से भागने वक्त एक सांसद ने अपनी कार में बॉर्डरक्रॉस करवाया था. नेपाल के रास्ते डेवी निकल भागा. डेनमार्क चला गया. डेवी के तर्कबेवकूफाना नहीं थे. कराची की तरफ से ये जहाज इंडिया में दाखिल हुआ था. अगर भारत कोपता नहीं होता कि ये जहाज आने वाला है तो उसे कैसे घुसने दिया जाता. 17 दिसंबर 1995को ये कराची से उड़ा और बंबई पहुंचा. वहां तेल भरवा कर फिर बनारस आया. पुरुलिया मेंहथियार गिराये. और 18 दिसंबर को कलकत्ता चला गया. फिर वहां तेल लेकर थाईलैंड चलागया. 21 दिसंबर को चेन्नई पहुंचा. उसी रात फिर कराची जाने लगा. तब इसे बंबई मेंउतार लिया गया. पर डेवी निकल भागा. जहाज के स्टाफ गिरफ्तार हुए. पर उनसे कुछ पतानहीं चला. तब से भारत डेवी को खोज रहा है. 24 अप्रैल 2011 को चुनाव प्रचार करते हुएतत्कालीन वित्तमंत्री पी चिदंबरम वेस्ट बंगाल की कम्युनिस्ट सरकार पर आरोप लगाया थाकि- राज्य सरकार और कम्युनिस्ट कैडर ने हिंसा की हर लिमिट पार करते हुए बंगाल कोकत्लगाह में बदल दिया है.MI-6 का एजेंट पकड़ा गया, गवाह का मर्डर हो गयाडेनमार्क ने भारत के सामने दो शर्तें रखी थीं. पहली कि डेवी को फांसी नहीं होगी.दूसरी कि कोई भी सजा होगी तो वो सजा डेनमार्क में ही काटेगा. पर डेवी ने अपने यहांकोर्ट में अपील की. कोर्ट ने उसी की बात मानी. और डेनमार्क ने उसे भेजने से मना करदिया.जहाज के साथ पकड़े गये थे 6 लोग. 5 लाटविया के थे. एक ब्रिटेन का था. पीटर ब्लीच.वहां की एयर फोर्स में पहले काम करता था. फिर भाड़े का सैनिक बन गया था. मतलब पैसादीजिए और कहीं पर भी लड़ने भेज दीजिए. बाद में हथियारों की दलाली करने लगता था.ब्रिटेन की खुफिया एजेंसी MI-5 के एक ऑफिसर ने बाद में अपनी किताब में पीटर को MI-6का एजेंट बताया था. लाटविया के लोगों को आजीवन कारावास की सजा दी गई. पर 2000 मेंइनको छोड़ दिया गया. यहीं से उन लोगों ने रूस की नागरिकता ले ली थी. पता नहीं किसतरीके का प्रेशर बना था इंडिया पर. पीटर 4 फरवरी 2004 तक जेल में रहा. प्रेसिडेंटने माफ कर दिया. कहा जाता है कि ये ब्रिटेन के दबाव में हुआ था.पीटर ब्लीचबनारस के फूलपुर थाने के शगुनहा गांव का मंगला पटेल बाबतपुर एयरपोर्ट पर गाड़ीचलाता था. जिस जहाज से पुरुलिया में हथियार गिराए गए थे, वो जहाज बाबतपुर एयरपोर्टपर कई दिन तक खड़ा रहा था. उसके पायलटों को कई टैक्सीवाले होटल तक छोड़ते थे. इसमेंमंगला पटेल भी था. पर 5 जनवरी 2014 को बिहार के किउल में मंगला की लाश पाई गई.मंगला हथियार कांड के गवाह के रूप में कोर्ट में जाता था. ये इंडिया का बेस्ट केप्टसीक्रेट है. आज तक पता नहीं चला कि वहां क्या होने जा रहा था. बंगाल में सरकार भीबदल गई. देश किम डेवी को खोज रहा है. देश दाऊद को भी खोज रहा है. इटली के मरीनहत्या कर चले गये. हम उन पर केस नहीं चला सकते. मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड डेविडहेडली को अमेरिका छोड़ नहीं रहा. मसूद अजहर को हम आतंकवादी तक घोषित नहीं करा पारहे. बहुत कुछ है, जो हमें नहीं पता. कि क्या हुआ और क्या हो रहा है.-------------------------------------------------------------------------------- कहानी शहाबुद्दीन की जिसने दो भाइयों को तेजाब से नहला दिया था