मुझे रोना बुरा लगता है, सर्दी की रातों में रोने वाले सियारों का भी. मैं हर उसआंसू की कद्र करता हूं, चाहे वो किसी की आंख से गिरे हों. वो चाहे लाइन में लगनेवाला हो या लाइन में लगाने वाला. जादू देखिए, लाइन में लगने वाला भी रोता है औरलगाने वाला भी. सबके अपने हिस्से के दुःख हैं. लाइन में लगने वाला सोचता है, अचानकये क्या हो गया, लाइन में लगाने वाला सोचता है अचानक ये क्या कर डाला. कोई पार्टीराम के नाम पर सत्ता में आती है तो उसे आने देना चाहिए, क्योंकि इस वक़्त देश भीरामभरोसे ही चल रहा है. ये कैसे संभव होता है कि एक रोज़ किसी ने सोचा और आपकीज़िंदगी बदल जाती है. यही होता है, जब राजा सबकुछ अपनी सुभीता से तय करने लगे. बिनाआगा-पीछा सोचे तय करने लग जाए. मुझे बचपन का एक किस्सा याद आता है जो मेरी मांसुनाया करती थी. एक राज्य में एक नया राजा आया था. उसके पहले के राजा का इतिहास कुछअच्छा नहीं था, प्रजा उससे खुश न रहती तो उसने पुराने राजा को हटा दिया. पुरानेराजा ने राज्य की दुर्गति कर रखी थी. नए राजा से लोगों को उम्मीद थी. पुराने राजाने खजाने का भी हाल-बेहाल कर रखा था. नए राजा ने पाया कि खजाने में नमी है. दरवाजोंमें घुन लगे हैं, दीवारों में दीमक लगे हैं. मंत्रियों से पूछा, धन को कैसे बचायाजाए. जवाब मिला, सारे धन को धूप दिखा दीजिए, नमी चली जाएगी, जो कीड़े हैं सो निकलजाएंगे. राजा ने ऐसा ही किया, सारा धन महल की छतों पर फैला दिया गया. कहते हैं,इतनी बड़ी छत थी जो कश्मीर से कन्याकुमारी तक फ़ैली थी. कहते हैं इतना धन था इतना धनथा कि आसमान भी दिन के वक़्त सोने की चमक से नीले से सुनहरा हो गया था. उसकीचौकीदारी को पहरेदार लगे थे. शाम को जब धन वापिस लाया गया तो वो आधा हो चुका था,पहरेदारों में खोट था. राजा हैरान था. उसने मंत्रियों से वजह पूछी तो जवाब मिला. धनसूख गया है, इसलिए कम हो गया है. जैसे गीला कपड़ा भारी होता है, और सूखने पर वजन कमहो जाता है. वही हुआ है. राजा मान गया. इस कहानी से क्या सीख मिलती है? सीख-वीख कुछनहीं मिलती. क्योंकि किसी को कुछ नहीं मिल रहा. मैंने सियार के रोने का जिक्र कियाथा. उसका किस्सा मेरे पिता सुनाते थे. वही राजा था. मंत्री भी वही थे. न भी रहेंहों तो क्या एक वक़्त के बाद सारे राजा, सारे मंत्री और सारे निर्णय एक से ही लगनेहैं. सर्दियों की रातों में सियार हुआ-हुआ करते थे. राजा ने कहा कि ये सियार ऐसाक्यों करते हैं. मंत्रियों ने इस बार सीधा जवाब नहीं दिया. ऐप तैयार हुआ. जवाब आए.राजा उम्मीद करता है कि जंगल के सियार भी डिजिटल हो गए होंगे, जो जवाब आए उससे पतालगा कि सियार ठंड के कारण रोते थे. राजा ने मंत्रियों से समाधान पूछा मंत्रियों नेकहा सारे सियारों को कंबल बांट देने चाहिए. कंबल, सिम्बल है. राहत का प्रतीक है.राजा ने सारे सियारों के नाम कंबल भिजवाए. सियारों की मौज होनी चाहिए, नहीं होगी तोरंगे सियारों की तो है ही. अगले दिन सियार फिर हुआ-हुआ कर रहे थे. राजा ने कहा अबये क्यों रोते हैं? मंत्रिओं ने जवाब दिया. कंबल पाकर खुश हैं. आपकी जय-जयकार करतेहैं. अब जंगल से जब-जब रोने की आवाज जाती है तो राजा को लगता है, जय-जयकार हो रहीहै. सियार कौन है और राजा क्यों रोता है? इस पर विद्वानों में मतभेद है. इसका जवाबकिसी ऐप पर नहीं आता. लेकिन जानने वाले बताते हैं, अब राजा को भी ठंड लगने लगी है.--------------------------------------------------------------------------------DD के पत्रकार का दावा, बहुत पहले रिकॉर्ड हो चुका था मोदी का नोटबंदी का ऐलान