बहरुल इस्लाम: जिन्होंने जज बनने के लिए राज्यसभा छोड़ी और लोकसभा के लिए सुप्रीम कोर्ट
रंजन गोगोई को राज्यसभा के लिए मनोनीत किए जाने के बाद से जस्टिस बहरुल इस्लाम की खूब चर्चा है.
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जब से रंजन गोगोई के राज्यसभा जाने की खबर आई है तभी से जस्टिस इस्लाम चर्चा में हैं. (फोटो- सुप्रीम कोर्ट आर्काईव)
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16 तारीख. मार्च का महीना और साल 2020. रात के नौ बजे गृह मंत्रालय से एक नोटिफिकेशन आई, जिसकी वजह से सुप्रीम कोर्ट के जजों का इतिहास खंगाला जाने लगा. इस नोटिफिकेशन में नाम था पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई का, जिन्हें राष्ट्रपति की ओर से राज्यसभा के लिए मनोनीत किया गया था. गोगोई 17 नवंबर, 2019 को रिटायर हुए थे. अभी छह महीने भी नहीं हुए थे कि सरकार का ये फैसला आ गया.
जाहिर-सी बात है, जैसी कि अपेक्षा थी, विपक्ष ने बीजेपी को घेरना शुरू कर दिया. जवाब में बीजेपी के कार्यकर्ता भी पीछे नहीं रहे. हमेशा की तरह उन्होंने एक बार फिर से 'तब कहां थे' वाले स्टाइल में दो नाम निकालकर सामने रख दिए.
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एक पूर्व CJI रंगनाथ मिश्रा, जिन्हें कांग्रेस ने 1998 में राज्यसभा भेजा था. और दूसरा बहरुल इस्लाम. रंगनाथ मिश्रा के बारे में आप यहां क्लिक कर पढ़ सकते हैं. बहरुल इस्लाम की कहानी हम आपको बताने जा रहे हैं. वकील, जो सांसद और फिर जज बना बहरुल इस्लाम 1 मार्च, 1918 को असम के कामरूप में जन्मे. पढ़ाई-लिखाई कॉटन कॉलेज, गुवाहाटी और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से हुई. इस्लाम ने 1951 में असम हाईकोर्ट में वकालत की प्रैक्टिस शुरू की. वकालत करते पांच साल ही हुए थे कि राजनीति में भी आ गए. 1956 में बहरुल इस्लाम कांग्रेस पार्टी के सदस्य हो गए. इधर वकालत में भी तरक्की हुई और 1958 में सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस शुरू कर दी. इसके बाद साल आया 1962 का, जब बहरुल इस्लाम को कांग्रेस ने राज्यसभा के लिए भेजा. लगातार दो बार. 1968 में कार्यकाल खत्म हुआ, तो दोबारा भेज दिए गए. लेकिन दूसरा कार्यकाल पूरा होता, इससे पहले ही 1972 में इस्तीफा दे दिया. क्योंकि वकील और 10 साल राज्यसभा सांसद रहे बहरुल इस्लाम अब जस्टिस बहरुल इस्लाम बन गए थे. 20 जनवरी, 1972 को उन्होंने असम एवं नागालैंड हाईकोर्ट में बतौर जज जॉइन किया. वर्तमान में इसे गुवाहाटी हाईकोर्ट के नाम से जाना जाता है. 11 मार्च, 1979 को जस्टिस इस्लाम गुवाहाटी हाईकोर्ट के कार्यवाहक और 7 जुलाई, 1979 को पूर्णकालिक मुख्य न्यायाधीश बने. 1 मार्च, 1980 को वे रिटायर हो गए.Justice Baharul Islam, served as a two-time MP in Rajya Sabha on Congress ticket. Retd. Justice Rangnath Mishra: Became CJI in '90, served as RS MP on Congress ticket. Retd. Justice KS Hegde: RS MP, then a Supreme Court judge, then became LS MP, then Speaker. Still Congress Cry👎
— Tanmay Shankar (@Shanktan) March 17, 2020
रिटायर हो कर वापस पहुंच गए असम जनता की सेवा करने. लेकिन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उन्हें वापस दिल्ली बुला लिया. हाईकोर्ट से रिटायर होने के नौ महीने बाद, यानी दिसंबर 1980 में वे सुप्रीम कोर्ट के जज बने. हाईकोर्ट से रिटायर होने के बाद सुप्रीम कोर्ट जॉइन करने का ये अपने आप में अजीब मामला था. जितनी आलोचना उनकी इस अजीब नियुक्ति की हुई, उससे कहीं ज्यादा उनके विदाई की हुई. सुप्रीम कोर्ट में कार्यकाल खत्म होने के छह हफ्ते पहले ही 13 जनवरी, 1983 को उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया.Justice Baharul Islam, also from #Assam, served as a two-time MP in #RajyaSabha on #Congress ticket. He was then appointed as a judge & acting chief justice of Gauhati HC; retired in Mar '80. But he got appointed as a #SupremeCourt judge again 9 months later by Indira Gandhi-Govt https://t.co/PJGVI8qCr3
— Utkarsh Anand (@utkarsh_aanand) March 16, 2020
तब इंडिया टुडे से बात करते हुए उन्होंने कहा था, गुवाहाटी हाईकोर्ट से रिटायर होने के बाद 1980 में मैंने कुछ महीने असम की समस्या को हल करने में मदद की कोशिश की. इस समय असम गंभीर संकट से जूझ रहा है. मुझे लगता है असम के लोगों के लिए मेरी सेवाएं ज्यादा महत्वपूर्ण हैं.इस्तीफा देने से ठीक एक महीना पहले जस्टिस इस्लाम ने एक ऐसा फैसला सुनाया था, जिसकी वजह से अक्सर उन पर उंगली उठती रही है. उन्होंने बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता जगन्नाथ मिश्रा को एक जालसाजी के केस में बरी कर दिया था. इस फैसले के एक महीने बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से इस्तीफा दिया और गुवाहाटी चले गए. असम में चुनाव हो रहे थे और 19 जनवरी को नामांकन का अंतिम दिन था. 13 जनवरी को इस्तीफा देने वाले सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज ने कांग्रेस (आई) की ओर से बारपेटा लोकसभा से नामांकन दाखिल किया. असम में हिंसा जोरों पर थी, जिसकी वजह से चुनाव टाल दिए गए. इसके बाद कांग्रेस ने उन्हें तीसरी बार राज्यसभा का सदस्य बनाया.
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