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फिलिस्तीनी बच्ची हिंद रजब की मौत की कहानी, जिस पर बनी फिल्म भारत में रिलीज नहीं हुई

वो हिंद की कार के बिल्कुल करीब पहुंच चुके हैं. पर Rajab तक मदद कभी पहुंच ही नहीं सकी. और ये मदद इसलिए नहीं पहुंची क्योंकि इजरायली सैनिकों ने उस तक पहुंचने वाले मददगारों को भी निशाना बनाया.

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26 मार्च 2026 (पब्लिश्ड: 11:33 PM IST)
Hind Rajab
इजरायली हमलों में मारी गई हिंद रजब की दर्दनाक कहानी. (फोटो- इंडिया टुडे)
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गजा जंग में हजारों लोगों की मौत हुई. इसे Israel’s genocidal war on Gaza भी कहा गया. आरोप लगा इजरायल ने फिलिस्तीनियों को चुन-चुनकर मारा. हर जंग के साथ बर्बरता और क्रूरता की कहानियां नत्थी होती हैं. गज़ा जंग भी इससे अछूती नहीं रही. ऐसी ही एक कहानी निकली 6 साल की फिलिस्तीनी बच्ची Hind Rajab की.

Israel Defence Force (IDF) के हमले के बाद एक गाड़ी में फंसी Hind Rajab अपने परिवारवालों की लाशों के बगल में बैठकर, मदद मांगती रही. इस मदद की कॉल रिकॉर्डिंग ने हर सुनने वाले का दिल दहला दिया. हम Hind Rajab की चर्चा इसलिए कर रहे हैं क्योंकि ट्यूनीशियाई फिल्ममेकर Kaouther Ben Hania ने एक फिल्म बनाई -'The Voice of Hind Rajab'. इसे Oscar Awards की Best International Film कैटेगरी में नॉमिनेट किया गया.

फिल्म U.S., U.K., Italy, France, समेत कई देशों में रिलीज भी हुई. लेकिन भारत में CBFC (Central Board of Film Certification) ने इस Oscar नॉमिनेटेड फिल्म की रिलीज को होल्ड कर दिया. 

Hind Rajab की कहानी

7 अक्टूबर, 2023 को इजरायल में हमास के हमले के बाद जंग शुरू हुई. साल बदल गया पर जंग और हमले नहीं. 29 जनवरी, 2024  की दोपहर इजरायल ने गज़ा के पास के इलाके Tel al-Hawa पर हमला किया. इसकी चपेट में एक काले रंग की Kia गाड़ी भी आई. इसी गाड़ी में अपने परिवार के साथ सवार थी 6 साल की Hind Rajab. उसके साथ उसके चाचा-चाची और उनके 3 बच्चे थे. 

जब हमला हुआ तो हिंद के चाचा ने जर्मनी में रहने वाले अपने एक रिश्तेदार को फोन किया था, जिसके बाद Palestine Red Crescent Society (PRCS) तक मदद की बात पहुंची. इसके कुछ ही देर बाद उसके चाचा-चाची और उनके 2 बच्चों की मौत हो गई.

अब गाड़ी में सिर्फ, Hind Rajab और उसकी 15 साल की चचेरी बहन लयान बचे थे. लयान ने ही सबसे पहले PRCS पैरामेडिक टीम से बात की थी. पर जब तक मदद आती लयान की भी मौत हो चुकी थी. अब अंत में बची सिर्फ हिंद, डरी और सहमी.  

26 फरवरी 2024 को छपी Al-Jazeera की एक खबर बताती है कि जांच में पाया गया कि Tel al-Hawa में एक पेट्रोल पंप के पास इजरायली सेना ने उस गाड़ी को रोका था जिसमें Hind सवार थी. लयान, जिसने रेड क्रिसेंट के साथ फोन पर सबसे पहले बात की थी, उसने कार के पास इजरायली टैंकों की पहचान की थी और कहा था: "वो हम पर गोलियां चला रहे हैं; टैंक मेरे बिल्कुल बगल में है." इसके कुछ ही मिनटों में गोलियों जैसी आवाज सुनाई दी और फोन के दूसरी तरफ लयान की आवाज़ खामोश हो गई.

हमले के बाद परिवारवालों की लाश के साथ गाड़ी में छोटी सी Hind फंस गई थी. उसे बचाने के लिए Palestine Red Crescent Society के पैरामेडिक ने कोशिशें शुरू कीं. घबराई हुई और घायल Rajab को बचाने के लिए PRCS ने उससे संपर्क बनाए रखा. वो लगातर उनसे कॉल पर बात कर उसे मदद मिलने का भरोसा दे रहे थे. ये बात 3 घंटे तक चली.

बच्ची तक एंबुलेंस भेजने के लिए PRCS, IDF से तालमेल बिठाने की कोशिश कर रहे थे. PRCS को आखिरकार IDF से परमिशन मिली. PRCS पैरामेडिक्स Yusuf al-Zeino और Ahmed al-Madhoun एक एम्बुलेंस लेकर हिंद की लोकेशन की तरफ रवाना हुए.

उन्होंने रिपोर्ट किया कि वो हिंद की कार के बिल्कुल करीब पहुंच चुके हैं. पर Rajab तक मदद कभी पहुंच ही नहीं सकी. और ये मदद इसलिए नहीं पहुंची क्योंकि इजरायली सैनिकों ने उस तक पहुंचने वाले मददगारों को भी निशाना बनाया.

IDF ने दोबारा अटैक किया जिसमें PRCS पैरामेडिक्स Yusuf al-Zeino और Ahmed al-Madhoun को निशाना बनाया गया. उनकी भी इस हमले में मौत हो गई. यानी इस हमले में कुल 9 लोगों ने जान गंवाई. लगभग 12 दिन की मशक्कत के बाद 10 फरवरी 2024 मारे गए सभी लोगों के शवों को मलबे से निकाला गया.

इस हमले को रिपोर्ट करते हुए Al-Jazeera की रिपोर्ट ये भी बताती है कि- चचेरी बहन लयान की मौत के बाद, जब हिंद ने रेड क्रिसेंट से बात की, तो उसने भी परिवार की कार के पास इजरायली सेना के टैंक के होने की बात कही थी. छोटी सी Hind के आखिरी शब्द जो कमज़ोर आवाज़, डर और घबराहट बयान करते हैं.

उसने PRCS के पूछने पर रुंधी हुई आवाज में बताया था- “टैंक मेरी बगल में है.” PRCS ने फिर सवाल किया - “क्या वो चल रहा है या एक जगह खड़ा है? क्या कोई उस टैंक में से बाहर निकला है?” हिंद ने जवाब दिया - "ये चल रहा है."  लाइन की दूसरी तरफ PRCS ने फिर से कंफर्म किया. हिंद ने कहा- "वो मर गए हैं." PRCS ने उससे आगे पूछा - "क्या वो तुम्हारे साथ अभी कार में हैं?" जवाब में हिंद ने कहा- “हां”

"तुम कहां छुपी हो? क्या तुम किसी सुरक्षित जगह पर हो?", PRCS ने हिंद से आगे पूछा. हिंद ने जवाब दिया - "मैं कार में हूं."

PRCS ने नन्ही सी हिंद को भरोसा देते हुए कार में ही रहने की सलाह दी. और उससे कहा - "मैं तुम्हारे साथ फोन कॉल पर रहूंगी और तुमसे बात करती रहूंगी. मैं कॉल डिस्कनेक्ट नहीं करूंगी." छोटी सी हिंद ने आगे जो कहा, वो अपने आप में भयावह था. उसने रोते हुए कहा- "प्लीज़ मुझे यहां से ले जाइए, प्लीज़. प्लीज़ आप मेरे साथ फोन कॉल पर बनी रहिए." जिसपर हिंद को आश्वासन देती हुई महिला PRCS ने कहा- "मैं तुम्हारे साथ ही हूं. मैं तुम्हारा साथ नहीं छोड़ूंगी. अगर मैं तुम्हारे पास आ सकती, तो अभी ही आ जाती."

इस पूरी कॉल के दौरान पीछे से गोलियों की आवाज़ सुनी जा सकती थी. फोन कॉल के दौरान ही PRCS ने हिंद से भगवान से प्रार्थना करने को भी कहा. हिंद ने कुरान की कुछ आयतें पढ़ीं. बाद में उसने कहा, "टैंक मेरी बगल में है. ये कार के सामने से आ रहा है." और इसके करीब तीन घंटे बाद, Hind के साथ भी फोन संपर्क टूट गया.

आगे चलकर Hind Rajab और PRCS पैरामेडिक्स पर हुए हमले की निंदा भी हुई. Israel के इस हमले को 'double-tap strike' कहा गया. Double-tap strike का सीधा मतलब है कि एक ही टारगेट पर जानबूझकर दो बार हमला करना. इसमें अक्सर उन हेल्थ वर्कर और आम जनता को निशाना बनाया जाता है या वो इसकी चपेट में आ जाते हैं, जो पहले हमले में घायल हुए लोगों की मदद करने के लिए पहुंचते हैं.

इस हमले के दो साल बाद, एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि ये इज़रायली सेना की तरफ से किया गया एक 'डबल टैप' हमला था. ग्लोबल कैम्पेन ग्रुप 'अवाज़' (Avaaz) के एनालिसिस में ऐसे सबूत मिले हैं कि ये हत्याएं 'जिनेवा कन्वेंशन' और 'रोम स्टेच्यूट' के तहत international combat law का उल्लंघन थीं.

अवाज़ ने अल जज़ीरा के साथ शेयर अपनी एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में बताया कि 'मंजूर किए गए एम्बुलेंस मिशन के तालमेल और समय की फिर से जांच करने पर पता चलता है कि यह जानबूझकर अपनाई गई 'डबल-टैप' रणनीति का ठोस सबूत है. इसमें पहले एक सैन्य हमला किया गया और उसके ठीक बाद जानबूझकर दूसरा हमला किया गया, जिसका मकसद मदद के लिए आने वाले इमरजेंसी रिस्पोंडर्स और हेल्थ वर्कर्स को निशाना बनाना था.'

इज़रायली सरकार ने शुरुआत में दावा किया था कि हमले के समय वहां उनका कोई भी सैनिक मौजूद नहीं था. हालांकि, बाद में उन्होंने कहा कि परिवार की कार पर मिले गोलियों के 335 निशान इजरायली सैनिकों और फिलिस्तीनी लड़ाकों के बीच हुई आपसी गोलीबारी का नतीजा थे. इन्वेस्टिगेटर्स का कहना है कि टैंक के इतनी करीब होने के बावजूद, ये मुमकिन ही नहीं था कि अंदर बैठे बच्चों को न देखा गया हो. सवाल उठा, क्या ये सिर्फ एक हादसा था या जानबूझकर की गई फायरिंग?

इस घटना के बाद Hind Rajab Foundation बनाया गया, जो हिंद को इंसाफ दिलाने की कोशिश कर रही है. फाउंडेशन ने एक बयान जारी कर कहा है 'डबल टैप वाले तर्क उनके एनालिसिस के साथ भी मेल खाते हैं. दुनिया में कई जगह इस हमले का विरोध हुआ- अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी में जब छात्रों ने प्रदर्शन किया, तो उन्होंने यूनिवर्सिटी की 'हैमिल्टन हॉल' इमारत का नाम बदलकर Hind’s Hall  रख दिया.

Hindi की मौत पर उसकी मां ने भी बताया था कि जिस कार में वो थी उसपर अंधाधुंध फायरिंग की जा रही थी और अटैक वाले दिन क्या हुआ था. बच्ची की मां ने बताया, "बारिश हो रही थी, इसलिए हिंद उनके साथ कार में बैठ गई. हमने उन्हें एक चौराहे से जाने दिया और हम खुद दूसरे रास्ते से निकल गए. सुबह 8:10 बजे, हमने उस कार की दिशा से भारी गोलीबारी की आवाज़ें सुनीं. जब हमने पीछे मुड़कर देखा तो उस कार पर अंधाधुंध फायरिंग की जा रही थी. हमें लगा कि कार में सवार सभी लोग मारे जा चुके हैं."

हमले के 2 साल बाद हिंद की दादी भी अपना दर्द बयान करते हुए कहती हैं, 

“हिंद के साथ हुई उस घटना को दो साल गुज़र चुके हैं, और हम उसे महज़ याद नहीं करते; हम हिंद की आवाज़, उसकी वो कॉल और उस हादसे को अपनी पूरी ज़िंदगी कभी नहीं भुला पाएंगे. हम इस घटना को एक बहुत बड़ी त्रासदी के रूप में देखते हैं, और हम उसकी आवाज़ या उसकी बेबस पुकार को कभी नहीं भूलते.

कम से कम हिंद का इतना हक़ तो था ही कि उसे उस कार से जिंदा बचा लिया जाता. हम उसकी उस आवाज को नहीं भूल सकते जब उसने मिन्नत करते हुए कहा था: "प्लीज मेरे पास आ जाओ, प्लीज मुझे बहुत डर लग रहा है, प्लीज मेरी मदद करो और मुझे यहां से ले जाओ."

फिल्म रिलीज को CBFC ने क्यों रोका? 

फिल्म के इंडियन डिस्ट्रीब्यूटर, मनोज नंदवाना का दावा है कि सेंसर बोर्ड ने मौखिक रूप से (Orally) फिल्म को सर्टिफिकेट देने से इनकार कर दिया. Variety magazine को दिए एक इंटरव्यू में मनोज ने बताया कि बोर्ड के एक सदस्य ने कथित तौर पर ये कहा कि— "अगर ये फिल्म रिलीज हुई, तो भारत और इजरायल के रिश्ते खराब हो सकते हैं." यानी तर्क ये दिया गया कि फिल्म की संवेदनशीलता भारत की Foreign Policy और Diplomacy पर असर डाल सकती है.  

गौरतलब है कि ईरान युद्ध शुरू होने से कुछ दिन पहले ही भारत के PM नरेंद्र मोदी इजरायल दौरे पर गए थे.

इस पूरे मामले में सवाल ये उठता है कि जब ये फिल्म अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और इटली जैसे देशों में रिलीज हो सकती है—जिनके इज़रायल के साथ मजबूत रिश्ते हैं—तो भारत में इसे लेकर इतनी हिचकिचाहट क्यों? फिल्म की डायरेक्टर बेन हानिया ने भी सोशल मीडिया पर सवाल पूछा— "क्या दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र और म‍िड‍िल-ईस्ट के एकमात्र लोकतंत्र (इजरायल) के बीच का 'हनीमून' इतना नाजुक है कि एक फिल्म उसे तोड़ सकती है?"

बेन हानिया ने Oscar Awards के दौरान कहा था- “लोग कहते हैं कि फिल्में राजनीतिक नहीं होतीं. नहीं, इसका सबूत यहां है: मेरा अभिनेता अपनी राष्ट्रीयता की वजह से, एक राजनीतिक बैन के कारण आज यहां मौजूद नहीं है.”

इस फिल्म को 16 मार्च को हुए ऑस्कर अवॉर्ड्स से पहले 6 मार्च को भारत में रिलीज होना था. एक अधिकारी ने द हिंदू को बताया कि फिल्म को अब CBFC की रिवाइजिंग कमेटी के पास भेज दिया गया है, और अब वे इसकी समीक्षा करेंगे. फिलहाल CBFC का इस पर अब तक कोई बयान नहीं आया है. अगर CBFC का बयान आता है, तो वो भी The Lallantop आप तक पहुंचाएगा.

वीडियो: दुनियादारी: ईरान जंग के बीच हिजबुल्लाह लेबनान पर क्यों टूट पड़ा?

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