BTS और 12 'वैलेंटाइन डे' वाला कोरियन कल्चर कैसे बना रहा सबको दीवाना?
South Korea का के-पॉप म्यूजिक हो वहां का खाना या ई-स्पोर्ट्स या फिर उनकी फिल्में. पूरी दुनिया इनकी दीवानी है. दक्षिण कोरिया एक तरफ दुनिया की सबसे आधुनिक तकनीकों के साथ कदम ताल करता हैं हीं दूसरी ओर अपनी प्राचीन परंपराओं को सिरा भी मजबूती से थामे हुआ है.

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में तीन नाबालिग सगी बहनों ने कथित तौर पर अपनी जान दे दी. पुलिस मामले की जांच में जुटी है. शुरुआती जांच में पुलिस को उनकी एक डायरी मिली है. जिसमें तीनों बहनों ने लिखा है कि वो कोरियन कल्चर से बेहद प्रभावित थीं. उनको कोरियन फिल्में, कोरियन पॉप (K-POP), शॉर्ट फिल्में, शो और सीरीज की लत लग गई थी. लेकिन उनका मोबाइल बंद कर दिया गया था. जिससे वे बहुत परेशान थीं.
पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही घटना के पीछे की असल वजह पता चल पाएगी. लेकिन जिस कोरियन कल्चर की बात की जा रही है उसके बारे में जान लेते हैं. ये भी जानेंगे कि आजकल कोरियन कल्चर में क्या ट्रेंड कर रहा है?
दक्षिण कोरिया का के-पॉप म्यूजिक हो या वहां का खाना या ई-स्पोर्ट्स या फिर उनकी फिल्में, पूरी दुनिया इनकी दीवानी है. दक्षिण कोरिया एक तरफ दुनिया की सबसे आधुनिक तकनीकों के साथ कदम ताल करता हैं तो दूसरी ओर अपनी प्राचीन परंपराओं का सिरा भी मजबूती से थामे हुए है. हम आपको कोरिया की प्राचीन परंपराओं और उनके आधुनिक ट्रेंड दोनों के बारे में बताएंगे.
जन्म लेते ही बच्चे की उम्र एक साल
अगर आप दक्षिण कोरिया जाते हैं तो आपकी उम्र अचानक एक या दो साल बढ़ सकती है. इसके पीछे कोई जादू नहीं कोरिया का सदियों पुराना 'एज सिस्टम' है. पूरी दुनिया में बच्चा पैदा होने के बाद उसकी उम्र शून्य से गिनी जाती है. लेकिन कोरियाई समाज में कहानी कुछ और है.
कोरियाई परंपरा के मुताबिक, जब बच्चा पैदा होता है तो उसे 1 साल का माना जाता है. इसके पीछे तर्क दिया जाता है कि बच्चा मां के गर्भ में जो 9-10 महीने बिताता है उसे भी उसकी उम्र का हिस्सा माना जाना चाहिए. यही नहीं, कोरिया में आपकी उम्र जन्मदिन पर नहीं, बल्कि नए साल (1 जनवरी) को बढ़ती है. इसे एक उदाहरण से समझिए. यदि किसी बच्चे का जन्म 31 दिसंबर को हुआ तो वह जन्म लेते ही 1 साल का हो गया. लेकिन जैसे ही साल बदलता है. अगले दिन 1 जनवरी आती है तो वह बच्चा 2 साल का मान लिया जाता है. यानी सिर्फ दो दिन में बच्चे की उम्र दो साल हो गई.
हालांकि प्रशासनिक कामों में परेशानी के चलते 28 जून 2023 से दक्षिण कोरिया ने आधिकारिक तौर पर इंटरनेशनल एज (शून्य से शुरू होने वाली उम्र) को कानूनी मान्यता दे दी. लेकिन कोरियाई समाज में अब भी कई लोग पुराने एज सिस्टम को ही फॉलो करते हैं.
‘किमची’ सदियों से कोरियाई थाली की जान
किमची कोरियाई रसोई की जान है. यह फर्मेंटेड सब्जियों से बनता है. इसमें गोभी, मूली, लाल मिर्च पाउडर, लहसुन, अदरक और नमक का इस्तेमाल होता है. इसे मिट्टी के बर्तनों या फिर अलग तरह से डिजाइन किए गए रेफ्रिजरेटर में रखकर कई दिनों तक फरमेंट किया जाता है.
कोरिया में सर्दियों की शुरुआत से पहले पूरा परिवार और आस पड़ोस के लोग मिलकर भारी मात्रा में किमची तैयार करते हैं. इस सामूहिक परंपरा को 'किमजांग' कहा जाता है. यूनेस्को (UNESCO) ने 'किमजांग' को अपनी अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (Intangible Cultural Heritage) की लिस्ट में शामिल किया है.
कोरिया में 180 से ज्यादा किस्मों की किमची बनाई जाती है. ज्यादातर लोगों को केवल गोभी वाली किमची के बारे में पता होता है. लेकिन इससे इतर 'ककडुगी' (मूली की किमची) और 'ओई सोबगी' (खीरे की किमची) भी काफी मशहूर है.

कोरिया में किमची बनाने की शुरुआत सर्दियों में सब्जियों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने की तकनीक से हुई. एक वक्त कड़ाके की सर्दी में वहां खेती करना असंभव सा था. इसलिए लोगों ने सब्जियों को नमक में भिगोकर मिट्टी के घड़ों में दबाना शुरू किया ताकि सर्दियों तक वो खराब ना हों. 57 BC-668 AD के दौरान के चीनी दस्तावेजों में कोरियाई लोगों द्वारा नमक में डूबी हुई सब्जियां बनाने की कला का जिक्र मिलता है. यही नहीं, कोरियाई लोग फोटो खिंचवाते समय 'Smile' या 'Cheese' कहने के बजाय Kimchi कहना पसंद करते हैं.
कन्फ्यूशियसवाद से प्रभावित कोरियाई समाज
दक्षिण कोरिया टेक्नोलॉजी और हाई-टेक लाइफस्टाइल में पश्चिमी देशों को टक्कर देता है. लेकिन उनके उलट कोरियाई समाज चीन के महान दार्शनिक और विचारक कंफ्यूशियस के 2500 साल पुराने सिद्धांतों को जीता है. इस विचारधारा में उम्र और पद को सबसे ऊपर रखा जाता है. इस सिद्धांत में भाषा के सात अलग-अलग स्तर हैं. अगर आप किसी बड़े व्यक्ति से बात कर रहे हैं तो आपको कुछ खास शब्द और क्रियाओं का इस्तेमाल करना होगा. गलत शब्द का चुनाव अपमानजनक माना जाता है. बड़ों को सम्मान देने के लिए कोई भी चीज दोनों हाथों से पकड़ना अनिवार्य है. चाहे वो पानी का गिलास हो या बिजनेस कार्ड.
बेहतरीन डिलीवरी कल्चर
दक्षिण कोरिया में डिलीवरी सिस्टम 'मक्खन' है. यहां आप किसी भी समय कुछ भी ऑर्डर कर सकते हैं. वो भी केवल घर से नहीं, आप यदि नदी के किनारे किसी पार्क की बेंच पर बैठे हों तो डिलीवरी बॉय वहां भी आपको खोज लेगा. कई ट्रेडिशनल रेस्टोरेंट तो खाना स्टील के बर्तन में डिलीवर करते हैं. आप खाना खत्म करके उन बर्तनों को घर के बाहर रख दीजिए और डिलीवरी वाला उन्हें फिर से वापस ले जाता है.
सबसे तेज इंटरनेट वाले देश के अजीब अंधविश्वास
दक्षिण कोरिया में दुनिया का सबसे तेज इंटरनेट है. रोबोटिक्स में भी यह देश झंडे गाड़ रहा है. लेकिन आधुनिकता के तमाम मानकों पर अव्वल देश में भी कुछ अंधविश्वासों ने घर बना लिया है.
लाल स्याही से लिखना मौत को बुलावा : कोरिया में अगर आप किसी जीवित व्यक्ति का नाम लाल स्याही से लिखते हैं तो इसे अशुभ और डरावना माना जाता है. इसलिए वहां किसी जीवित व्यक्ति का नाम कभी लाल रंग से नहीं लिखा मिलेगा. इसके सिरे इतिहास से जुड़ते हैं.
पुराने समय में जब किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती थी तो परिवार के रजिस्टर (Jokbo) में उसका नाम लाल रंग से लिखा जाता था. ताकि जीवित और मर गए लोगों के बीच अंतर किया जा सके. आज भी लोग मानते हैं कि लाल रंग से किसी का नाम लिखने का मतलब है कि आप उस आदमी के मरने की चाहत रखते हैं. इसलिए वहां स्कूलों औ ऑफिसों में लाल पेन का इस्तेमाल वर्जित है.
अंक 4 का आतंक (Tetraphobia) : चीन और जापान के साथ साउथ कोरिया में नंबर 4 को अशुभ माना जाता है. इसके पीछे उच्चारण से जुड़ा एक संयोग है. कोरियाई भाषा में '4' को 'सा' (Sa) कहा जाता है. वहीं मौत के लिए इस्तेमाल होने वाले चीनी मूल के शब्द (Hanja) का उच्चारण भी 'सा' ही होता है. नंबर 4 को अशुभ मानने के चलते कोरिया की इमारतों, अस्पतालों या फिर होटल की लिफ्ट में 4 की जगह F(Four) लिखा होता है. किसी अपार्टमेंट या विला में नंबर 4 का इस्तेमाल होता है तो लोग उसे खरीदने से कतराते हैं.
फैन डेथ : फैन डेथ दक्षिण कोरिया का सबसे चर्चित और अनोखा अंधविश्वास है. लोग मानते हैं कि अगर आप एक पूरी तरह से बंद कमरे में बिजली का पंखा चलाकर रात भर सोते हैं तो आपकी मौत हो सकती है. इसलिए वहां के पंखों में ऑटो टाइमर जरूर लगा होता है.
दुनिया की ‘प्लास्टिक सर्जरी कैपिटल’
दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल जाने पर बड़ी-बड़ी इमारतों पर लगे विज्ञापन आपका ध्यान खींचेंगे. इन विज्ञापनों में मनचाहा लुक पाने की हसरत जगाने वाले कॉन्टेंट होते हैं. कोरिया में प्लास्टिक सर्जरी अच्छा दिखने के शौक से ज्यादा सामाजिक जरूरत के तौर पर उभर कर आया है. यही वजह है कि कोरिया को दुनिया की ‘प्लास्टिक सर्जरी कैपिटल’ कहा जाता है. इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ एस्थेटिक प्लास्टिक सर्जरी (ISAPS) की रिपोर्ट के मुताबिक, साउथ कोरिया में प्रति व्यक्ति के हिसाब से दुनिया में सबसे ज्यादा प्लास्टिक सर्जरी होती हैं. सियोल का गंगनम जिला अपने ब्यूटी क्लिनिक्स के लिए मशहूर है. यहां 500 से ज्यादा आधुनिक सेंटर लोगों की काया बदलने में जुटे हैं.
‘क्या आपने खाना खाया’ पूछना प्यार जताने का तरीका
दुनिया के बाकी खित्ते में लोग हाल चाल जानने के लिए पूछते हैं ‘कैसे हैं या कैसे हो’. लेकिन दक्षिण कोरिया में लोग पूछते हैं, 'क्या आपने खाना खा लिया?' (Bap meogeoseoyo). यह परंपरा साल 1950 से 1953 तक चलने वाले कोरियाई युद्ध से जुड़ी हैं. उस समय देश में भारी गरीबी थी. खाने की किल्लत होती थी. उस मुश्किल दौर में किसी का पेट भरा होना ही सबसे खुशी की बात मानी जाती था. लोग एक दूसरे से मिलते थे तो पहले यही सुनिश्चित करते थे कि सामने वाला भूखा तो नहीं है. धीरे धीरे यह सवाल अभिवादन का तरीका बन गया.
ई-स्पोर्ट्स की जन्मभूमि
साउथ कोरिया को ई स्पोर्ट्स की जननी के तौर पर जाना जाता है. कोरिया ने वीडियो गेम को (e-sports) के तौर पर पूरी दुनिया में स्थापित किया. यहां वीडियो गेम खेलना शौक भर नहीं. जिस तरह भारत में क्रिकेट का क्रेज है उसी तरह कोरिया में ई-स्पोर्टस का जलवा है. यही नहीं इससे अरबों डॉलर का बिजनेस भी जुड़ा है.
कोरिया में साल 1990 के दशक के आखिर में ई-स्पोर्टस कल्चर की शुरुआत हुई. 1997 में आए वित्तीय संकट के बाद सरकार ने बुनियादी ढांचे और ब्रॉडबैंड इंटरनेट में भारी निवेश किा. इसी समय 'StarCraft' गेम लॉन्च हुआ. यह कोरिया में इतना लोकप्रिय हुआ कि इसने दुनिया के पहले प्रोफेशनल गेमिंग इकोसिस्टम की नींव रख दी.
ई-स्पोर्टस की नर्सरी : PC Bangs
कोरियाई ई-स्पोर्टस कल्चर की रीढ़ PC Bangs हैं. ये 24 घंटे खुले रहने वाले हाई-एंड गेमिंग कैफे होते हैं. यहां बहुत कम खर्च में सुपर फास्ट इंटरनेट और बेहतरीन गेमंग पीसी मिलते हैं. कोरिया में प्रोफेशनल गेमर्स को वहीं दर्जा और शोहरत मिलती है जो किसी हॉलीवुड स्टार या फुटबॉलर को मिलता है. बड़े-बड़े स्टेडियमों में उनके मैच होते है, जिसे देखने के लिए हजारों की संख्या में भीड़ जुटती है. इन मैचों का टीवी पर सीधा प्रसारण भी होता है. 'स्टारक्राफ्ट' और 'लीग ऑफ लेजेंड्स' कोरिया के सबसे मशहूर ई-स्पोटर्स गेम हैं.
हर महीने प्रेम के नाम एक दिन (12 महीने में 12 वैलेंटाइन डे)
कोरिया में रोमांस का एक अपना कैलेंडर है. इसमें साल के बारहों महीने 14 तारीख को कपल्स एक नया उत्सव मनाते हैं. 14 फरवरी यानी वैलेंटाइन डे. इस दिन पूरी दुनिया में प्रेमी जोड़े एक दूसरे को गिफ्ट देते हैं. लेकिन कोरिया में इस दिन केवल महिलाएं पहल करती हैं. यानी सिर्फ लड़कियां या महिलाएं अपने पसंदीदा पुरुष या पार्टनर को चॉकलेट और तोहफे दे सकती हैं. वहीं पुरुषों को गिफ्ट देने के लिए अगले महीने की 14 तारीख यानी 14 मार्च का इंतजार करना होता है. इस दिन वॉइट डे मनाया जाता है. इस तारीख को पुरुष उन महिलाओं को तोहफे (अक्सर कैंडी या सफेद रंग के गिफ्टस) वापस देते हैं जिन्होंने उन्हें फरवरी में चॉकलेट दी थी.

ये तो हुई प्रेमियों की बात. कोरिया में सिंगल्स के लिए भी एक दिन रिजर्व है. 14 अप्रैल. इसे ब्लैक डे के नाम से जाना जाता है. इस दिन जो लोग सिंगल हैं और जिन्हें पिछले दो महीनों में कोई तोहफा नहीं मिला वो काले कपड़े पहनकर एक साथ रेस्टोरेंट जाते हैं और काले सॉस वाले नूडल्स खाते हैं. यह अकेलेपन का जश्न साझा करने का एक तरीका माना जाता है. इसके अलावा भी दूसरे महीनों की 14 तारीख भी प्रेमी प्रमिकाओं के लिए रिजर्व है.
‘ओन्डोल’ : फर्श को गर्म रखने का प्राचीन विज्ञान
साउथ कोरिया में घरों में फर्श पर सोने और बैठने की परंपरा है. इसके पीछे एक बेहद दिलचस्प और वैज्ञानिक कारण है. यहां दुनिया की सबसे पुरानी और असरदार 'अंडरफ्लोर हीटिंग सिस्टम' में से एक है, जिसे 'ओन्डोल' '(Ondol)' के नाम से जाना जाता है. ओन्डोल का शाब्दिक अर्थ है 'गर्म पत्थर'. इस सिस्टम के तहत फर्श के नीचे गर्म हवा या पानी की पाइप बिछाई जाती है. इससे पूरा घर नीचे से ऊपर की ओर गर्म होता है. यही कारण है कि कोरियाई लोग फर्श पर बैठना, खाना पीना और पतले गद्दे बिछाकर फर्श पर ही सोना पसंद करता है.
साउथ कोरिया के सिनेमा और पॉप म्यूजिक का जलवा
21वीं सदी में हॉलीवुड के अलावा जिन दो देशों का सिनेमा सबसे ज्यादा लोकप्रिय हुआ है उनमें ईरान और साउथ कोरिया शामिल हैं. कोरियाई फिल्मों ने दमदार कॉन्टेंट और बेहतरीन निर्देशन के दम पर हॉलीवुड फिल्मों को टक्कर दी है. साल 2019 में रिलीज हुई कोरियाई फिल्म 'पैरासाइट' कोरिया फिल्म इंडस्ट्री के लिए मील का पत्थर साबित हुई है.

बोंग जून हो की निर्देशित इस फिल्म ने सर्वश्रेष्ठ फिल्म का ऑस्कर अवार्ड भी जीता था. यह पहली नॉन-इंग्लिश फिल्म थी जिसे यह सम्मान मिला. इसके अलावा 'ट्रेन टू बुसान', 'ओल्डबॉय' और 'मीनारी' जैसी फिल्मों ने पूरी दुनिया में सफलता के झंडे गाड़े हैं.
साउथ कोरिया का पॉप म्यूजिक, जिसे दुनिया K-Pop के नाम से जानती है, आज एक ग्लोबल फेनोमेना बन चुका है. K-Pop में डांस, फैशन और विजुअल्स का अद्भुत संगम होता है. के-पॉप से जुड़े कलाकारों को 'Idols' कहा जाता है. उनको गायकी, डांस और भाषा सिखाने के लिए सालों तक कड़ी ट्रेनिंग दी जाती है. BTS मौजूदा दौर में दुनिया का सबसे बड़ा बॉय-बैंड है. इनके नाम अनगिनत रिकॉर्ड्स और ग्रैमी नॉमिनेशन हैं. इनके फैंस को 'ARMY' कहा जाता है. इस बैंड का गाना 'Dynamite' और 'Butter' बिलबोर्ड चार्ट पर हफ्तों तक नंबर 1 पर रहा है.

वहीं BLACKPINK (ब्लैकपिंक) दुनिया का सबसे मशहूर गर्ल ग्रुप है. इन्होंने फैशन और म्यूजिक की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है. इनके गाने , 'How You Like That' और 'DDU-DU DDU-DU' ने यूट्यूब पर व्यूज के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए थे. इसके अलावा PSY(साई) के-पॉप को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने वाला बैंड है. इनका गाना 'Gangnam Style' यूट्यूब पर 1 अरब से ज्यादा व्यूज लाने वाला दुनिया का पहला वीडियो था.
वीडियो: Squid Game के पहले साउथ कोरिया ब्रदर्स होम में हजारों के साथ हुआ था मौत का खेल

.webp?width=60)

