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टीम इंडिया को रोकेंगी ये दो टीमें!

वर्ल्ड कप मुंहाने पर है. टीम इंडिया को कहा जा रहा है फ़ेवरेट. लेकिन ऐसा ही है कि बहुत कठिन है डगर पनघट की. दो टीमें है जो खतरा बनेंगी इंडिया के लिए. हम बताते हैं.

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केतन बुकरैत
14 मार्च 2016 (अपडेटेड: 14 मार्च 2016, 12:27 PM IST)
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इंडियन टीम इस बारी की तो फेवरिट है. लेकिन होता ये है कि अगले की कितनी तैयारी है, ये आंकने में ज़रा सी चूक हुई और सारे किये कराये पर पानी फैल जाता है. टीम में लगभग हर कोई अपने फॉर्म में है. युवराज एक समस्या लग रहे थे लेकिन वो भी अब रौले में आ रहे हैं. टीम इंडिया एकदम बैलेंस्ड यूनिट दिखाई दे रही है. ओपेनिंग में एक फ़ेल हुआ तो दूसरा टिक जाता है. कोहली इस वक़्त सचिन का दिमाग और सहवाग का प्रहार लेकर बैटिंग कर रहे हैं. रैना भी चमके हुए हैं. धोनी भइय्या को छोड़ ही दिया जाना चाहिए. कुछ उंच-नीच होती है तो पांड्या को ऊपर भेज दिया जाता है. जडेजा इंडिया पिच पे 20 ही साबित होते हैं. फील्डिंग में रन रोकते हैं अलग. अश्विन विकेट लेने को तड़प रहे होते हैं. नया लौंडा बुमराह तो रन ही नहीं बनाने देता. कुल मिलाके टीम इंडिया के अच्छे दिन चल रहे हैं.
Kohli and Yuvraj sharing light moments

Kohli and Yuvraj sharing light moments

लेकिन कहीं न कहीं, कुछ तो है जो सालता रहता है. एक छोटा सा डर है जो किसी कोने में बैठा है. सभी टीमें इस वक़्त कम ही लग रही हैं. दो टीमों को छोड़ के. न्यू ज़ीलैंड और साउथ अफ्रीका. ये दो टीमें इंडिया और वर्ल्ड कप के बीच खड़ी हुई मालूम देती हैं. ऑस्ट्रेलिया को सम्हाल लेंगे. पाकिस्तान तो चलो वर्ल्ड कप में हारता ही है लेकिन न्यू ज़ीलैंड और साउथ अफ़्रीका इंडिया की राह में भयानक रोड़ा मालूम देती हैं. वहज पूछोगे? बताते हैं.

न्यू ज़ीलैंड

New Zealand Cricket Team

न्यू ज़ीलैंड वो टीम है जिसे टीम से इंडिया कभी भी जीत नहीं पायी है. सुनने में अजीब लगा न? लेकिन ये सच है. इंडिया ने इस टीम से जितने भी मैच खेले हैं, सभी हारे हैं. मैच टांके के हुए लेकिन इंडिया हारी. कभी 1 रन से तो कभी बस आखिरी गेंद पे रन देकर. कुल 5 मैच हुए. 4 मैच खेले गए. एक बारिश में बह गया. 4 मैच इंडिया ने हारे. साल 2007 के वर्ल्ड कप में टीम इंडिया ने एक मैच हारा था. सिर्फ एक. वो था न्यू ज़ीलैंड के खिलाफ़. लीग मैचों में पहला मैच बारिश में निपटा, दूसरा पाकिस्तान से जीता और तीसरा न्यू ज़ीलैंड से हार गए. इंडियन पिच पे हालांकि सिर्फ एक ही मैच खेला गया है लेकिन वो भी हम हारे हैं.
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न्यू ज़ीलैंड का पोस्ट-मैकुलम एरा शुरू हो चुका है. इस एरा का पहला मैच खेला जायेगा मंगलवार को. न्यूज़ीलैंड के पास एक बेहतरीन आल-राउंड परफॉरमेंस वाली टीम है. आज खेलने वाले खिलाड़ियों में सबसे ज़्यादा टी-20 रन बनाने वाला बैट्समैन न्यूज़ीलैंड की टीम में है. मार्टिन गुप्टिल. मैकुलम के जाने के बाद उनका भार ढोने की ज़िम्मेदारी गुप्टिल के ही कन्धों पर है. न्यू ज़ीलैंड को इस वक़्त मार्टिन गुप्टिल की सख्त ज़रुरत है.
Martin guptill


कोरे एंडरसन एक और फैक्टर साबित होंगे. बॉलिंग की शुरुआत करने वाले और बीच इनिंग्स में बैटिंग करने वाले एंडरसन टी-20 के लिए एकदम मुफ़ीद प्लेयर हैं. मुंबई की ओर से इंडिया की हर पिच पर तसला भर टी-20 मैच खेलने का एक्सपीरियेंस एंडरसन के काम आने वाला है. बायें हाथ से फेंकी गयी अन्दर आती हुई गेंदें काफ़ी असरदार रहती हैं. यॉर्कर की तो बात ही क्या. 40 मैचों में 55 विकेट लिए हैं साथ ही इकॉनमी है मात्र 6.06 की. बॉलर्स का सोना और आल-राउंडर का हीरा है कोरे एंडरसन. रैना और धवन को खासी परेशानी होने वाली है इनसे.
COREY ANDERSON

Corey Anderson

ग्रांट इलियट. वो नाम जिसने डेल स्टेन को सेकंड-लास्ट ओवर में छक्का मारकर मैच साउथ अफ्रीका से छीन लिया था. डिविलियर्स, मोर्केल, और बाकी के अफ़्रीकी प्लेयर्स आंसू बहाते पाए गए थे. उस छक्के के साथ ही ग्रांट ने ये समझा दिया था कि वो बड़े मौकों के प्लेयर हैं. ये वर्ल्ड कप भी एक वैसा ही बड़ा मौका है. फील्डिंग में भी ग्रांट पूरी तरह चौकस रहते हैं.
Grant Elliot in conversation with Dale Steyn after hitting six off him

Grant Elliot in conversation with Dale Steyn after hitting six off him

न्यू ज़ीलैंड टीम की एक ख़ास बात ये भी है कि मैकुलम के सिवाय पूरी टीम कभी भी एक ही प्लेयर पर डिपेंड नहीं रही. मैडम पर हमेश ज़िन्दा रहने वाली ये टीम आज तक अपने कन्धों को झुका कर खेलते नहीं दिखाई दी. और ये इस टीम की सबसे बड़ी ताकत है. ऐसा बहुत कुछ है जो इस टीम ने मैकुलम से सीखा है. और वो किसी भी और टीम में नहीं मिलेगा. ये एक बहुत बड़ा फैक्टर है जो आल ब्लैक्स को एक छोटा सा एडवांटेज देता है.
https://www.youtube.com/watch?v=VhcPhWqy10A

साउथ अफ़्रीका

इस टीम को आसन भाषा में कहा जाये तो वो ऐसा एक बम है जो कभी भी फूट सकता है. और जब फूटता है तो आस-पास की बड़ी इमारतों के शीशे चूर होकर नीचे आ गिरते हैं.
South Africa

साउथ अफ्रीका टीम में फ़ील्डिंग एकदम चौकस. बैटिंग एकदम फन्नाटेदार. बॉलिंग में तो डेल स्टेन और इमरान ताहिर के क्या कहने. साउथ अफ्रीका के ऊपर 'चोकर्स' का तमगा लगा है लेकिन ये टीम ऐसी है कि कब अगले को ही चोक करके उसका रक्तपान करने पर उतर आये, कहा नहीं जा सकता.
कुल 10 मैचों में मामला 60-40 पे अटका है. यानी 6 मैच इंडिया ने जीते हैं और 4 साऊथ अफ्रीका ने. हालांकि इंडिया में हुए दोनों ही मैच इंडिया हार चुका है. और हां! वार्म अप गेम में भी इंडिया को साउथ अफ्रीका से हारना पड़ा था. इंडिया को जहां अपने तेज़ बॉलर्स को बचाने की ज़रुरत होगी वहीँ स्पिनर्स को विकेट लेने के साथ रन रोकने की डबल शिफ्ट करनी होगी. फील्डिंग साउथ अफ्रीका की ऐसी है कि उनके बनाये गए टोटल में आपको खुद ही 10-15 रन जोड़ने पड़ते हैं. टीम इंडिया का मुकाबला साउथ अफ्रीका से सेमी फाइनल स्टेज पर हो सकता है. अगर सेमी फाइनल में ऑस्ट्रेलिया गया तो यकीनन फाइनल में इंडिया का सामना साउथ अफ़्रीका से होगा.
Duminy


अफ़्रीका की टीम के लिए डिविलियर्स हनुमान हैं. हनुमान यानी वो जो संकट मोचन हैं. डिविलियर्स को शॉट मारने के लिए 360डिग्री के कोण भी कम पड़ते हैं. बल्ला सीधा हो या आड़ा, गेंद तेज़ हो या धीमी, पटकी हुई हो या आगे खेलाई गयी हो, मारी उसी निर्ममता और काईयांपान से जाती है. फील्डिंग करते वक़्त डिविलियर्स हाथों में चुम्बक लगा लेते हैं. जिससे गेंद सीधे उनके हाथों में चिपक जाती है. एक दूसरा चुम्बक स्टप्स में भी लगा होता है जिससे इनके हर थ्रो सीधे विकेटों पर ही लगते हैं. साउथ अफ्रीका के किले में डिविलियर्स खुद एक किला है जिसे टीम इंडिया को जीतना ही होगा.
AB de Villiers


डू प्लेसी, साउथ अफ़्रीकी कप्तान. वार्म अप गेम में जब धवन और रैना 89 रनों की पार्टनरशिप पर खेल रहे थे, इंडिया को 5 ओवर में जीतने के लिए 60 रन चाहिए थे. हर कोई जानता था कि धवन और रैना शॉट्स खेलने के लिए जायेंगे. ऐसे में डू प्लेसी अपने पत्ते खोलना शुरू करते हैं. बॉल मिलती है काइल अबॉट को. सोलहवां ओवर फेंकने आये काइल. पूरे ओवर में रन आये मात्र 7. वो भी उस हालत में जब कम से कम 12 चाहिए ही थे. यही दांव इंडिया पर भारी पड़ गया. इसके पेचे जितना हाथ काइल अबॉट का है उतना ही डू प्लेसी के अबॉट को ओवर देने के डिसीज़न का. डू प्लेसी अब एक मेच्योर कप्तान बन चुके हैं. हर खिलाड़ी के बारे में जानते हैं साथ ही इस बात में भी माहिर हो गए हैं कि कब किसे कहाँ इस्तेमाल करना है. सबसे बड़ी बात, हर प्लेयर से घुले-मिले रहते अहिं. ड्रेसिंग रूम जितना हलके माहौल का मिले, प्लेयर उतना खुल के खेलता है. 1000 रन के मुंहाने पर खड़े डू प्लेसी बेहतरीन बैट्समैन तो हैं ही. डेथ ओवर्स में बड़े शॉट लगाने के लिए जाने जाते हैं.
टीम में ड्यूमिनी और डेविड मिलर जब एक के बाद एक बैटिंग करने आते हों तो भौकाल समझा ही जा सकता है. दोनों ही प्लेयर्स भरपूर आईपीएल खेल चुके हैं. इसलिए इंडियन कंडीशन से पूरी तरह वाकिफ हैं. डेविड मिलर आईपीएल में सेंचुरी भी मार चुके हैं. ड्यूमिनी ऑफ स्पिनर की तरह भी काम आते हैं और इंडियन पिचों पे स्पिनर जितने हों, उतना अच्छा. ड्यूमिनी फील्डिंग के साथ विकेटों के बीच भी बहुत ही स्ट्रोंग हैं.
David Miller


इमरान ताहिर इस वक़्त दुनिया के सबसे बेहतरीन लेग स्पिनर बने घूम रहे हैं. उनकी कसी गेंदें किसी भी बैट्समैन को आउट करने के लिए काफी हैं. एलबीडब्लू और विकेट के पीछे स्लिप में काफी आउट करवाते हैं. क्रीज़ का सबसे अच्छा यूज़ करते हैं और साथ ही लूप में गेंदें फेंकने से नहीं चूकते. शायद ही कभी इन्होंने डिफेंसिव बॉलिंग की हो. अटैकिंग स्पिनर टीम में जिस तरह की एनर्जी लाता है वो टीम को एक बढ़त दिलाने में काफी होती है.
https://www.youtube.com/watch?v=5Hjj-dtfl4o
डेल स्टेन. नाम ही काफी है. सबसे तेज़ गेंदबाज. नयी पुरानी कैसी भी गेंद हो, बैट्समैन को बैकफ़ुट पर ही रखते हैं. आईपीएल खेलने की वजह से इंडिया की धीमी पिचों की भी अच्छी समझ है. पोवेर्प्लय में रन रोकने में माहिर स्टेन धवन के लिए खासी मुसीबत बन सकते हैं. साथ ही डेथ ओवर्स में घिसी हुई गेंद से स्विंग होती हुई यॉर्कर्स कब विकेट उखाड़ गयीं, बैट्समैन समझ भी नहीं पाता.
https://www.youtube.com/watch?v=Quto3RrtLlI
कुल मिलाके आधी से ज़्यादा अफ़्रीकी टीम आईपीएल को घोट के पी चुकी है और इसलिए इंडिया कंडीशन उसके लिए होम कंडीशन जैसी ही हैं. ऐसे में अफ़्रीकी टीम के लिए यहां के हिसाब से ढल पाना काफी आसन होगा. साथ ही उनके पास डिविलियर्स नाम का ब्रह्मास्त्र मौजूद ही है.

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