सोमवार की सुबह. दीवाली की रात की थकान. मगर आदत से मजबूर. तो उठते ही ट्विटर चेककिया. पहली खबर. भोपाल जेल से सिमी के 8 संदिग्ध आतंकवादी भागे. शिट (पहला सेंसर्डशब्द, आगे और भी आएंगे). अब ये फिर से बम फोड़ेंगे, राइफलें लूटेंगे. देश को नुकसानपहुंचाएंगे. सिमी आतंकवादी संगठन है. इसके हर सदस्य को जेल में ठूंस देना चाहिए.मुकदमे कायम होने चाहिए. फास्ट ट्रैक में सुनवाई होनी चाहिए. और गंभीर अपराधों मेंफांसी पर लटका देना चाहिए. बिना किसी रियायत के. आतंकवाद के मामले में, आंतरिकसुरक्षा के मामले में कोई रियायत नहीं. कोई लापरवाही नहीं. मगर लापरवाही हुई. वर्नाआठ मुजरिम जेल से कैसे भाग जाते. और सबसे ज्यादा तकलीफ हुई जेल आरक्षी रमाशंकर यादवके बारे में जानकर. शहीद रमाशंकर यादव को नमन. लाइन ऑफ ड्यूटी में जान गंवाई. देशऐसे ही बहादुर सिपाहियों के भरोसे सुरक्षित महसूस करता है. कितनी दर्दनाक मौत मिलीउन्हें. स्टील की थाली से बनाया गया औजार. उससे उनका गला रेत दिया गया. इन मुजरिमोंकी ऐसी तैसी कर देनी चाहिए पुलिस को. अब बस में एक बार और अब बस. दिन शुरू हुआ.दफ्तर आया. न्यूज रूम में घुसते ही फिर टीवी पर नजर पड़ी. आठों आतंकवादी एनकाउंटरमें ढेर. बहुत सही. साला ऐसे ही ठोंक कर मारना चाहिए आतंकवादियों को. अब कोई जेल सेभागने की हिम्मत नहीं करेगा. रमाशंकर यादव की जान तो नहीं लौट सकती, मगर उन्हें यहीअसली श्रद्धांजलि होती. हो गई. बहुत खुश हुआ मन. पर खुशी कहां ठहरती है. शाम तक खबरआ गई. वीडियो की शक्ल में. पहाड़ी से हाथ हिला रहे थे भगोड़े. हथियार दिख रहे थेउनके हाथों में. गांव वाले कह रहे थे कि हमें पत्थर मारे. फिर दूसरा वीडियो. पुलिसवालों का ही शूट किया. गुस्से में थे पुलिस वाले. गालियां बक रहे थे, भीड़ हटा रहेथे. गुस्सा स्वाभाविक था. मगर क्या जायज भी था. तब तक तो लग रहा था.https://www.youtube.com/watch?v=hy2jRo4Qq4A फिर आया तीसरा वीडियो. पहाड़ी पर सबलाशें नहीं थीं. एक जिंदा भी था. उसका हाथ हिल रहा था. मगर उसको भी पुलिस वालों नेगोली मार दी. गलत किया. पुलिस और भीड़ में फर्क होता है. पुलिस और मुजाहिदीन मेंफर्क होता है. पुलिस को ट्रेन किया जाता है. अपराधियों को पकड़ने के लिए. पकड़ मेंन आएं तो और भी रास्ते हैं. जैसे एनकाउंटर. मगर यहां तो सब जमीन पर पड़े थे. एकघायल था. उसे अस्पताल ले जाते. फिर पूरी साजिश का ब्यौरा जानते. भोपाल सेंट्रल जेलकी सुरक्षा दुरुस्त करते. किन लोगों ने उनकी भागने में मदद की. उन्हें भी दबोचते.https://www.youtube.com/watch?v=HKV-TwXBgxM ऐसा नहीं हुआ. ट्रेनिंग पर क्रोध जीतगया. लोकतंत्र हार गया. एक फिल्म आई थी. फरहान अख्तर के डायरेक्शन में. जावेद अख्तरकी लिखी. उसमें आखिरी में एक चोटी पर अमिताभ बच्चन की यूनिट फतेह हासिल करती है.कब्जे वाली पोस्ट से कई पाकिस्तानी जवानों की लाशें नीचे लाई जाती हैं. कर्नल दामलेका रोल कर रहे बच्चन कहते हैं. पूरे कायदे से इनका अंतिम संस्कार कर दो. यूनिट केअफसर और जवान ताज्जुब जाहिर करते हैं. तब दामले कहते हैं. उनमें और हम में एक फर्कहै. और ये कायम रहना चाहिए. आई रिपीट. उनमें (पढ़ें पाकिस्तान, तालिबान, चीन और ऐसेही दूसरे जम्हूरियत के तराजू पर फेल हुए मुल्क) और हममें एक फर्क है. क्या है येफर्क. यही कि हमने हर चीज के लिए एक सिस्टम बनाया है और उसे अमल में लाना ही चाहिए.उसी में हमारी मजबूती है. उसी के सहारे हम यहां तक पहुंचे हैं. और क्या करना चाहिएताकि ये फर्क कायम रहे. 1 पूरे देश में जेलों का बुरा हाल है. अपराधी अंदर भी गुंडईकरते हैं. सोमवार को ही पटना की बेऊर जेल में रेड हुई. सिम और मेमरी कार्ड मिले.देश की हर जेल में रिफॉर्म हों. आतंकवादी केस में बंद संदिग्धों, मुजरिमों को अंडासेल में सड़ा दो. सख्त पहरेदारी में रखो. तोड़ दो भीतर से. 2 आतंकवाद के मामले मेंहमने बहुत सहा है. इसे लेकर सख्त कानून बनना चाहिए. भले ही कई लोगों को असुविधा हो.अमेरिका को देखिए. 9-11 के बाद फिर कुछ नहीं हो पाया. शक होता है तो किसी के भीकपड़े उतरवा लेते हैं. ऐसा ही हमारे यहां होना चाहिए. पोटा का नया एडिशन लाने कावक्त आ गया है. 3 आतंकवाद के नाम पर एक समुदाय की देशभक्ति पर सवाल उठाना गलत हीनहीं, आत्मघाती है. और भगवान के लिए ये तर्क दोहराना बंद करिए कि हर मुसलमानआतंकवादी नहीं होता, मगर हर आतंकवादी मुसलमान होता है. जो लोक नक्सल इलाकों मेंहमारे जवानों को मारते हैं, वे मुसलमान नहीं हैं. जो उल्फा या नॉर्थ ईस्ट के दूसरेआतंकवादी गुट हम पर हमला करते हैं, वे 'अल्लाह हो अकबर' के नारे नहीं लगाते. तो येतर्क दोहराते वक्त आपको वे सब याद क्यों नहीं आते.4सरकार सबका साथ सबका विकास की बात करती है. इसको पूरा सपोर्ट. मगर जिनके साथ औरविकास की बात कर रही है. वे इस पर भरोसा क्यों नहीं कर रहे. सरकार को इस पर सोचनाचाहिए. ट्रिपल तलाक एक वाहियात प्रथा है. बंद होनी चाहिए. यूनिफॉर्म सिविल कोड लागूहोना चाहिए. मगर ये सरकार ऊपर से नहीं थोप सकती. सफल नहीं हो पाएगा. इसके लिएसमुदाय के अंदर बहस शुरू होनी चाहिए. उसे प्रोत्साहित किया जाना चाहिए. जबबहुसंख्यक कानून के पक्ष में हो जाएंगे, तब कानून बनाना आसान होगा.5मगर ये होगा कैसे. देश में सबसे ज्यादा हालत मुसलमानों और दलितों की खराब है. सुधारके कई रास्ते हैं. सबसे पहला है उन्हें खूब शिक्षा मिले. समान अवसर मिलें. इसके लिएसरकार को कोशिश युद्ध स्तर पर करनी होगी. कर भी रही है सरकार. मगर दलितों के लिएही. और मुस्लिम भी मोदी डर में जी रहे हैं. इससे कुछ नहीं होगा. मांग क्या होनीचाहिए. जुमे की छुट्टी नहीं चाहिए. कंप्यूटर लैब वाले स्कूल चाहिए. हज पर सब्सिडीनहीं चाहिए, परिवार नियोजन के प्रसार के लिए अस्पताल चाहिए. अपना काम शुरू करने केलिए सस्ती दर पर लोन चाहिए. स्किल डिवेलपमेंट के लिए प्रोग्राम चाहिए. और सबसेजरूरी चीज. सेंस ऑफ बिलॉन्गिंग चाहिए. अकीदा चाहिए. और अकीदा यानी कि भरोसा आते आतेआता है. एक झटके में जाता है. एक भरोसा और कायम करिए. अगर कोई पत्रकार, कोईबुद्धीजीवी या कोई भी नागरिक, सरकार के, पुलिस के किसी फैसले पर सवाल उठाता है. तोवह गद्दार नहीं हो जाता. ये तानाशाही नहीं है, जहां सब एक कोरस में गाएं. देशभक्तिसरकार भक्ति नहीं है. सरकार अच्छा करे तो सराहो. बुरा करे तो लताड़ो. ये मुल्कहमारा आपका है. इसे संवारो. एक बार फिर राम शंकर यादव को नमन. उनके परिवार को येदुख सहने की ताकत मिले.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़िए:जो एकाउंटर में मारे गए, उनके बारे में सबसे डरावनी बात पढ़िएभोपाल एनकाउंटर में सबसे ट्रैजिक कहानी है हेड कॉन्स्टेबल रमाशंकर की!भोपाल जेल से फरार संदिग्ध आतंकियों का एनकाउंटर, आठों हलाकखून से लाल होकर बाणगंगा बनी हलाली नदी, जहां सिमी के लोगों का एनकाउंटर हुआ