स्वर्ग का राजा होने की वजह से इंद्र का नेम और फेम बढ़ता ही जा रह था. इसी बात काउनको घमंड हो गया. दिन भर सभी देवता व्हिस्की-वाइन पीते, और एंटरटेनमेंट करते.देवता हो या इंसान, घमंड से होता सर्वनाश ही है. उनकी महफिल में बृहस्पति आए. परहाय-हेलो करना तो दूर की बात, इंद्र अपनी जगह से हिले भी नहीं. बृहस्पति गुस्सा पीगए और चुपचाप चले गए. थोड़ी देर बाद इंद्र को रियलाइज हुआ कि बड़ी भारी मिस्टेक हो गईहै. वो बृहस्पति को ढूंढ़ते हुए उनके घर गए. वहां पता चला कि वे तो कहीं चले गए हैं.इंद्र को लगने लगे गिल्ट के झोंके. पर इससे पहले वो कुछ कर पाते, राक्षसों को खबरलग गई कि इंद्र के पास से बृहस्पति का सपोर्ट खत्म हो गया है. उन्होंने लगाया मौकेपर चौका और कर दिया धरती पर अटैक. इंद्र बाकी सारे देवताओं के साथ ब्रह्मा जी केपास हेल्प के लिए. ब्रह्मा ने कहा: त्वष्टा के बेटे विश्वरूप ही आपकी मदद कर सकतेहैं. सभी देवता गए विश्वरूप के पास जो फटाफट हेल्प करने के लिए तैयार हो गए.विश्वरूप ने उन्होंने नारायण कवच, बोले तो एक सेफ्टी मन्त्र दिया जो था 'ओम् नमोनारायण'. इस मंत्र से इंद्र और सभी देवता लड़ाई में जीत गए और स्वर्ग मिल गया वापस.(श्रीमद्भागवत महापुराण)