क्या आप सोच सकते हैं कि बॉलीवुड की एक सुपरडुपर हिट सिंगर फोटो खिंचवाने से कतरातीथीं? वो मुस्लिम थीं पर पंद्रह साल की उम्र में एक हिंदू से शादी रचाई थी. जबकि वोवक्त दंगों का था.शमशाद बेगम नाम था इनका. वही जिनके बारे में 1998 में अखबारों ने खबर छापी किलेजेंडरी सिंगर शमशाद बेगम नहीं रहीं. बाद में 'हमें खेद है', वाले कॉलम मेंउन्होंने छापा कि जिन शमशाद की मौत की खबर छापी गई थी वो सायरा बानो की नानी थीं.उनका नाम भी शमशाद बेगम था. शमशाद बेगम छनकती हुई आवाज और रौबदार अंदाज की मल्लिकाथीं. एक ऐसी आवाज, जिसको सुनकर लगता है मानो अल्लाह का नूर बरस रहा हो. हरकतों मेंऐसी शोखी कि उनके सत्तर-अस्सी साल पहले गाए गानों पर आज सात-आठ साल की बच्चियां भीठुमके लगाती हैं. 'कजरा मोहब्बत वाला'. स्कूल का कल्चरल फंक्शन हो या कोई डांसिंगकॉम्पीटिशन या घर में शादी. आज भी नाचने के लिए ये गाना सबका फेवरेट है. शमशाद जबगाती हैं, 'अपना बना ले मेरी जान, हाय रे मैं तेरे कुर्बान' तो हर बार इस लाइन केबाद वो हम सबकी और अपनी हो जाती हैं.शमशाद बेगम का 'कजरा मुहब्बत वाला' गाना:https://youtu.be/kItK3kQlykoक्या है शमशाद की शादी का किस्सा?शमशाद 1932 में गनपत से मिली थीं. उस जमाने में शादी छोटी उम्र में ही करा दी जातीथी. शमशाद के घर वाले भी उनके लिए लड़का ढूंढ रहे थे. लेकिन शमशाद अपने प्यार से हीशादी करने की बात पर अड़ी रहीं. 1934 में देश में हिंदू-मुसलमान दंगे हो रहे थे.लाहौर से लेकर अयोध्या नफरत में जल रहा था. पर शमशाद बेगम और गनपत लाल बट्टो शादीकर रहे थे. दोनों के घर वाले इस शादी के खिलाफ थे. दुनिया ताने कस रही थी. लेकिनदोनों का प्यार बाहर फैली नफरत से ऊपर ही रहा.2009 में शमशाद को पद्म भूषण से सम्मानित किया गया.शमशाद की इतनी कम फोटो क्यों हैं?शमशाद के अब्बा उन्हें गाने नहीं देना चाहते थे. लेकिन शमशाद की संगीत की धुन देखकरउन्हें इजाजत तो दे दी लेकिन ये तय करवा लिया कि वो कभी फोटो नहीं खिंचवाएंगी. इसवजह से ही शमशाद की इतनी कम फोटोज हैं. बस कुछ ही मौकों पर शमशाद कैमरे में कैद होपाईं. देश के सबसे उम्दा प्लेबैक सिंगरों में से एक शमशाद ने हिंदी, पंजाबी के साथकई और भाषाओं में 6 हजार गाने गाए हैं. लेकिन मार्केट में कई सारी आवाजें आने केबाद शमशाद को अचानक से गाने मिलने बंद हो गए थे. शमशाद ने तब कहा था: मैं जितने हिटगाने देती हूं, मुझे उतने ही कम गाने मिनते हैं. पर गौरतलब है, शमशाद को शुरूआत मेंहर गाने का 12 रुपए मिलता था, जो उस वक्त के हिसाब से बड़ी रकम थी.शमशाद बेगम का 'ले के पहला-पहला प्यार' गाना:https://youtu.be/vVmShhhiPPIसंगीतकार नौशाद ने एक इंटरव्यू में बताया था कि 'शमशाद और लता जब साथ में गाती थींतो शमशाद को माइक से 10 गुना दूरी पर खड़े होकर गाना पड़ता था. शमशाद की आवाज मेंइतना वजन था कि लता की आवाज छुप जाती थी.' पंडित जसराज ने एक बार कहा था: बड़ी सेबड़ी सिंगर्स भी कभी न कभी शमशाद बेगम और नूरजहां की नकल करती हैं.एक फंक्शन में शमशाद बेगमशमशाद 14 अप्रैल, 1919 में अमृतसर में पैदा हुई थीं. उनके टैलेंट को सबसे पहलेपहचाना था उनकी प्रिंसिपल ने. 1924 में उन्होंने शमशाद की सुरीली आवाज सुनकर स्कूलकी प्रेयर-हेड बना दिया. उन्होंने संगीत की कोई फॉर्मल ट्रेनिंग नहीं ली थी. लेकिनजो भी उनका गाना सुनता, मंत्रमुग्ध हो जाता था. 13 साल की ही उम्र से ही शमशाद नेजीनोफोन रिकॉर्ड के लिए गाना शुरू कर दिया था. शमशाद बेगम का 'मेरे पिया गए रंगून'गाना:https://youtu.be/Llo15FVtb0Y1937 में ऑल इंडिया रेडियो लाहौर ने पंजाब का इकलौता रेडियो स्टेशन शुरू किया था.इसमें गाने के लिए लोकल टैलेंट ढूंढ़ने की कवायद शुरू कर दी. शमशाद ने ये ऑडीशन पासकर लिया. और वहां पर उन्होंने पंजाबी लोकगीतों में महारत हासिल कर ली. वो बहुतज्यादा पॉपुलर हो गईं. क्योंकि रेडियो लाहौर का सिग्नल फैसलाबाद से लेकर रावलपिंडीऔर झांग तक जाता था.शमशाद ने लंबी बीमारी के बाद 2013 में दुनिया को अलविदा कहा था.लेजेंडरी म्यूजीशियन ओपी नैय्यर शमशाद की आवाज की साफगोई से इतना मुग्ध थे किउन्होंने इसकी तुलना मंदिर में बजने वाली घंटी से की थी. --------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें:जिसने 'आज मेरे यार की शादी है' का म्यूजिक दिया, जमाना उसे चुटकी में भूल गयाइनके गाने गिटार पर बजा-बजाकर हिंदुस्तान में कितने इंजीनियर सिकंदर बन गएबलम केसरिया तब होता है, जब उसे अल्लाह जिलाई बाई गाती हैंलता मंगेशकर ने एेसा क्या किया कि कंपोजर ओ.पी. ने उनका मुंह नहीं देखावो म्यूज़िक डायरेक्टर जिसके सुपरहिट गानों को आप रहमान की कंपोज़ीशन समझ लेते हैंबॉलीवुड गानों का बादशाह कंपोजर जो टूट गया, रोया और लाया अंतिम मास्टरपीस