आज से लगभग 2800 साल पुरानी बात होगी ये. थियोगोनी नाम के एक सज्जन थे. उन्होंने येकहानी सुनाई थी कविता की एक किताब में. पब्लिशर ने इसका टाइटल दिया था थियोगोनी.सोचा, ये कहानी आज आप तक पहुंचा दूं. बात तब की है, जब इंसान बने नहीं थे. देवता औरदानव, ये दो टाइप थे दुनिया में. एक तरफ जीयस सिपहसालार थे, तो दूजी तरफ क्रोनस नेमोर्चा थाम रखा था. जीयस की पार्टी मने कि देवता हार से रहे थे. तभी एक संत किस्मके देवता प्रोमेथीयस ने आदमी पैदा कर दिए. इंसानों के आते ही बाजी बदल गई. पर इंसानयहीं नहीं रुके. उन्होंने जीयस से कहा, देखो भइया बाकी सब तो ठीक है पर रिश्ताबराबरी का ही चलेगा. जीयस को मानना पड़ा. क्योंकि अब इंसानी पार्टी का लीडर इन चीफप्रोमेथियस था. भोज भात पर बात नक्की करने का तय हुआ. प्रोमेथियस ने जीयस के सामनेदो थाल रखे. एक में रोएंदार बालों का ढेर था. दूसरी तरफ भाप छोड़ते मक्खन औरड्राईफूट्स का ढेर. पर इसमें एक ट्रिक थी. पता तब चला जब जीयस ने लपककर दूसरा थालउठा लिया. पहले में ऊपर तो खाल थी, भीतर नरम गोश्त. हलकी आंच में मसालों के लेप सेपका. और दूसरे में, बैल का सींग. फिर तय हो गया. इंसान बलि देंगे. गोश्त खुद खाएंगेऔर देवता को देंगे सींग. जीयस को लगा, उनके साथ तिली लिली धप्पू हुई है. उन्होंनेगुस्से में आग इंसानों से हड़प ली. इंसान परेशान. कि गर आंच न होगी तो मीट मुलायमहो पकेगा कैसे. प्रोमेथियस उस अटरिया पर गया, जिस पर देवता अपने लोटन कबूतरों संगरहते थे. अटरिया एक पहाड़ पर बनी थी. नाम था ओलंपस. प्रोमेथियस आग चुरा लाया.इंसानों को दे दी. जीयस गुस्से से लाल हो गया. चील बन गया. प्रोमेथियस पर झपटा.कहिस, बेटा लीवर के दम पर ही मुर्ग मुसल्लम करते हो. यही खा लेंगे. प्रोमेथियस कोजंजीरों में जकड़ चट्टान से बांध खाने लगा. शाम हो गई. उड़कर दरख्त पर बैठ गया.सुबह उठा तो देखा, प्रोमेथियस का लिवर फिर उग आया है. भूलो मत मित्रों. प्रोमेथियसभले ही इंसानों के पाले में खड़ा हो. था तो देवता ही. अमरता के वरदान में उसका भीशेयर था. तो फिर रोज यही होता. थीयस खाता और रात में प्रोमेथियस का लिवर फिर उगआता. जीयस यहीं नहीं रुका. प्रोमेथियस ने आदमी पैदा किए थे. जीयस ने एक औरत, पहलीऔरत पैदा की. नाम रखा पंडोरा. इसी से आगे इंसान बढ़े. और प्रोमेथियस, उसकी मुक्तिएक नेक इंसान ने की. आधा देवता, आधा मानुष. नाम हरक्यूलीज. खैर, कहानी तो एक कोनेतक पहुंची. पर हेडिंग तो हींग की बात कर रही थी. दरअसल प्रोमेथियस ओलंपस से आग हींगके पौधे की जड़ में ही छिपाकर लाया था. आग आई. पौधा भी आया. आग से चलते तेवरोंवाला. कफ, पित्त, वात, सबको साधने वाला. औरतों को पीरियड्स में राहत देने वाला.पुरुषों का पौरुष समृद्ध करने वाला. इस कैरियर कर्म की वजह से ही हींग को फेरुलाएसाफोटिडा कहते हैं. लैटिन भाषा में फेरुला का अर्थ होता है कैरियर.