सावजराज सिंह.भारत का सुदूर पश्चिमी सिरा, लखपत. गुजरात के सबसे अंतिम सिरे पर बसे गांव से आतेहैं सावजराज सिंह. उजले कच्छ के रण से आने वाले उजली आत्मा के इंसान. इंसानों कोपढ़ते हैं. समय की कहानी सुनाते हैं. इमारतों पर लिखी इबारतों का दस्तावेजीकरण अपनीस्मृति की किताब में करते हैं. पांच भाषाएं जानते हैं, लेकिन चुप्पी की जुबां सबसेबेहतर पढ़ते हैं. उन्होंने ‘ज्ञान’ हासिल करने के लिए हम सबकी तरह स्कूल का रास्तानहीं चुना, मैक्सिम गोर्की की तरह जिन्दगी की खुली किताब ही उनका विश्वविद्यालय है.सावज अपने ऊंट के साथ 14 अक्टूबर को चंदनगढ़ गांव से अपनी यात्रा के लिए निकले करीबएक घंटे में बारह किमी दूर मावसरी गांव पहुंचे. यहां इनके साथ जो हुआ, वो हम सब केलिए शर्मनाक है. सावजराज ने अपनी फेसबुक वॉल पर पूरी घटना साझा की है. हम साभारपढ़वा रहे हैं:--------------------------------------------------------------------------------घटना लिखने से पहले बता दूं कि मेरे लिखने से कुछ नहीं बदलने वाला और न मैं कोई ऐसीअपेक्षा रखता हूं. फिर भी यह घटना लिखता हूं ताकि सनद रहे... घटना स्थल: मावसरी,थराद, जिला- बनासकांठा, गुजरात14 अक्टूबर को सुबह मैं अपने ऊंट से चंदनगढ़ गांव से आगे की यात्रा के लिए निकला.करीब एक घंटे में बारह किलोमीटर दूर मावसरी गांव पहुंचा. मैंने ऊंट को एक पेड़ मेंचरने के लिए बांधा और चाय पीने बैठा. कुछ लड़के आए, बातचीत की और कहां जा रहे हो,कहां से आ रहे हो आदि पूछा. मैंने उन्हें बताया कि कच्छ से आ रहा हूं और राजस्थानघूमने जा रहा हूं. अपने ऊंट से चार महीने तक राजस्थान घूमता रहूंगा. इतने में दोसुपर जासूस जेम्स बांड आ गए. लड़कों को वहां से भगाया और मेरी गहरी पूछताछ,जांच-पड़ताल करने लगे. मैंने उन्हें भी प्यार से जानकारी दी. इतने में उनमें से एकने मेरा बैग खींचते हुए लिया और अंदर देखने लगा. मैंने कहा कि यह कोई तरीका है?मेरा बैग चेक करने का अधिकार तुम्हें किसने दिया? बस इतने में दोनों सुपर स्पाय काइगो हर्ट हो गया! मुझसे गाली गलौज करने लगे. कहने लगे हमारे गांव आकर हमसे ऊंचीआवाज में बात करोगे? तुम्हें दिखाते हैं अब हमारी ताकत क्या है. उन्होंने कुछ औरलड़कों को बुला लिया.करीब तीस चालीस लोग इकट्ठा हो गए. मुझे धमकाने लगे, गालियां देने लगे और पूछताछकरने लगे. कहने लगे हमारे गांव आकर आंख दिखाता है, हमारे लोगों को? दो वो लोग औरतीन चार लोग भीड़ का नेतृत्व करने लगे और भीड़ मेरा बैग फाड़ने लगी. गाली-गलौज करनेके साथ मुझे पूरी तरह से घेर लिया. एक ने मुझसे धर्म-जाति पूछी तो मैंने कहा कि मैंधर्म जाति में मानता नहीं. इतने में उन्हें और गुस्सा आया और कहने लगे पेंट उतारकरदिखाओ कटवे (मुस्लिम) हो क्या?एक दो लोग मेरी पेंट खोलने लगे तो मैंने कहा कि यदि लिंग देखने का इतना शौक है तोदिखा देता हूं. फिर देख लेना कटा हुआ है या नहीं. इससे उन्हें और ज्यादा गुस्साआया. कहने लगे स्साले में बहुत ज्यादा अकड़ है. आज इसे औकात दिखानी ही पड़ेगी. कुछलोग मेरा बचाव करते हुए भी दिखे लेकिन भीड़ के सामने उनकी संख्या बहुत कम थी. मैंनेसबसे बोला, या तो मुझे जाने दो या फिर मुझे पुलिस के हवाले करो, फोकट का शोर-शराबामत करो. वो कहने लगे यह सीमावर्ती इलाका है और हम राष्ट्रवादी लोग हैं. हमेंतुम्हारे साथ ये सब करने का अधिकार है. एक तो सुपर जासूस और ऊपर से राष्ट्रवादीनस्ल! मैंने अपने आप से कहा कि सावज तेरी लग गई आज.मुझसे यहां घूमने की परमिशन मांगने लगे तो मैंने कहा भाई नहीं है कोई परमिशन, मुझेकहां पता था कि यह पाकिस्तान है. वह और ज्यादा भड़कने लगे. इतने में किसी ने पुलिसको भी बुला लिया तो एक गाड़ी से पुलिस वाले आए. मुझे लगा कि अब जान छूटेगी पर पुलिसको किसी ने ठुल्ला ऐसे थोड़े ही कहा था. पुलिसकर्मी आकर मुझसे ही गाली गलौज करनेलगे और धमकाने लगे. मैंने अपने सब पहचान पत्र दिखाए फिर भी पुलिस ने एक ही रट लगाएरखी कि यहां आए क्यों. पुलिस के साथ एक पत्रकार था तो मैंने उससे कहा कि भाई मैंनेभी स्वतंत्र तौर पर पत्रकारिता की है. तो कहने लगे पत्रकार का आईकार्ड दिखाओ. मैंनेकहा भाई आज तक तो इसकी जरूरत नहीं पड़ी तो ऐसा कोई कार्ड मेरे पास नहीं है. अब सेएक पत्रकार वाला पहचान पत्र बनवा लूंगा ताकि किसी को झांसा देकर डराया धमकाया जासके.अब पुलिसवालों ने मुझे परेशान करने का नेतृत्व संभाल रखा था. मेरे ऊंट को बैठाने केलिए उसे खींचा गया. उस दौरान उसकी नकेले तोड़ दीं, बहुत खींचने से उसकी नाक मेंज़ख्म हुआ जिससे खून बहने लगा. मैं चिल्लाता रहा ऊंट को परेशान मत करो, मैं उसेबैठा देता हूं पर किसी ने मेरी नहीं सुनी. ऊंट पर से सब सामान गिराया गया, मेराखाना, पानी भी फेंक दिया गया. मेरे बिछोने तोड़ दिए गए. मेरे कुछ डॉक्युमेंट फाड़दिए गए. यह सब पुलिस के नेतृत्व में पूछताछ और चेकिंग के बहाने हुआ. अंततः चार घंटेबाद मुझे छोड़ा गया. मुझे अपने तय रास्ते के बदले रेगिस्तान की ओर से जाने को कहा.पुलिस ने दबाव बनाया कि इस रास्ते से गए तो .... तोड़ देंगे.उन्होंने कहा, इस रेगिस्तानी रास्ते से होकर राजस्थान बॉर्डर में घुस जाओ. मैं उसरास्ते से अनजान था और इस फिसलन और कीचड़ भरे, खारे पानी के रास्ते पर बिना कुछखाए-पिए दो दिन भटकता रहा. मैं और मेरा ऊंट भूखे, प्यासे दो दिन के बाद आखिरकारराजस्थान के एक गांव में पहुंचे जहां हमें पानी मिला. फिलहाल मैं एक छोटे कस्बेघनाऊ पहुंचने के बाद यह घटना लिख रहा हूं. इस पर कोई कार्रवाई होगी ऐसी मुझे कोईआशा नहीं है. फिलहाल मैं ठीक हूं. गुजरात सरकार के उस विज्ञापन की याद आ रही है कि"कुछ दिन तो गुज़ारिए गुजरात में"!अपने दोस्तों और प्रियजनों के लिए संदेश कि यात्रा जारी रहेगी. मैं अरब सागर जितनाधैर्यवान हूं और लखपत के जितना सहनशील. मैं जोश में हूं और अपनी यात्रा में आगेबढ़ने के लिए उतावला. बस, खबड़सिंघ (ऊंट) की तबीयत ठीक हो जाए.--------------------------------------------------------------------------------वीडियो देखें:ये भी पढ़ें:ताजमहल भारतीय संस्कृति का हिस्सा नहीं है, ये रहे 10 सुबूत!पैगंबर मुहम्मद के वक़्त और भी कई लोगों ने पैगंबरी पर दावा कर रखा थाक्या सोनिया गांधी के इस खास जज ने दीवाली पर बैन किए हैं पटाखे?