--------------------------------------------------------------------------------आज सतलज-यमुना लिंक मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया: 'नहर की जमीन किसानोंको वापस देना गलत'.और इस बात पर पंजाब कांग्रेस इतना भड़की कि सारे कांग्रेसी विधायकों ने अपने मुखियाकैप्टन अमरिंदर सिंह को अपना इस्तीफा सौंप दिया. ये इस्तीफा अभी विधानसभा के स्पीकरको जायेगा. इसके साथ ही कांग्रेसी सांसद कैप्टन ने अपना इस्तीफा लोकसभा के स्पीकरको सौंप दिया है.पंजाब की अकाली-भाजपा गठजोड़ की सरकार अभी कुछ कर पाती इससे पहले ही कांग्रेस नेदांव खेल दिया है. जुलाई के महीने में ही कैप्टन ने कहा था कि अगर सुप्रीम कोर्ट काफैसला पंजाब के खिलाफ जायेगा तो हम लोग रिजाइन कर देंगे. ये भी कहा था कि मुझेपक्की खबर है कि अकाली नेता प्रकाश सिंह बादल भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार केखिलाफ हो जायेंगे. रिजाइन कर देंगे. 105 लाख एकड़ की खेतिहर जमीन है. इस फैसले सेपंजाब के लोगों को पीने का पानी भी नहीं मिलेगा.-------------------------------------------------------------------------------- पर क्या है ये मुद्दा?सतलज यमुना लिंक एक नहर है जो पंजाब में सतलज और हरियाणा में यमुना नदी को जोड़तीहै. ताकि पंजाब की तरफ से हरियाणा के किसानों को पानी मिल सके. 214 किलोमीटर लंबीहै ये नहर. अगर इसके साथ की सारी छोटी-बड़ी नहरों को जोड़ दें तो 495 किलोमीटर कीलेंथ हो जाती है. पंजाब में 122 और हरियाणा में 90 किलोमीटर लंबी है ये नहर. दिल्लीके पल्ला तक आती है. इस नहर की नींव डाली थी प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने.आइए पढ़ते हैं क्या है पूरा मुद्दा:1. भारत की आजादी के बाद पानी को लेकर झंझट हुई. 29 जनवरी 1955 को पंजाब, राजस्थान,कश्मीर ने रावी और व्यास नदियों के पानी पर समझौता किया. 1960 में भारत औरपाकिस्तान ने इंडस रिवर ट्रीटी साइन किया. उस समय तक हरियाणा नहीं बना था.2. 1966 में पंजाब से काटकर हरियाणा बना दिया गया. और एक बार फिर शुरू हुआ पानी कोलेकर लफड़ा. 1971 में एक हाई लेवल कमिटी बनी जिसने पंजाब और हरियाणा के बीच पानी कोबांट दिया. पर पानी तो पानी है. जमीन नहीं है. पता नहीं चल पाता कि किसने कितना रोकदिया या ले लिया. हरियाणा को समस्या होने लगी.नहर का प्रजेंट स्टेटस सोशल मीडिया से3. मेन मुद्दा ये था कि पंजाब के मुताबिक पंजाब को हरियाणा से ज्यादा पानी चाहिए.दोनों ही राज्य धान, गेहूं और गन्ना उगाते हैं. तो दोनों को ही पानी चाहिए. बहुतज्यादा. तो खेती की गलत पॉलिसी भी इसके लिए जिम्मेदार है. पंजाब वाले कहते हैं किजब इंडस ट्रीटी साइन हुई तो पंजाब के पानी को आधा कर दिया गया. फिर राजस्थान के साथट्रीटी हुई. इंदिरा नहर बनाई गई. हरियाणा के लिये भाखड़ा डैम से भी पानी लाया गया.दो नहरें बनाई गई थीं. पर पूरा नहीं हो पा रहा था हरियाणा का काम.4. कुछ साल के बाद केंद्र सरकार ने सतलज-यमुना लिंक प्रपोज किया. जिससे कि हरियाणाको पानी मिलने लगे. हरियाणा ने अपनी तरफ से नहर बनानी शुरू कर दी. पर पंजाब इसकेलिए तैयार नहीं था. ये वही वक्त था जब पंजाब में ग्रीन रिवोल्यूशन हो चुका था.केंद्र सरकार के दबाव के बावजूद पंजाब नहीं मान रहा था.पंजाब का क्या कहना हैइनके मुताबिक हरियाणा के साथ पानी शेयर करने का डाटा 1920 के आधार पर है. हमहरियाणा को एक बूंद देने की स्थिति में नहीं हैं.हरियाणा का क्या कहना हैइनके मुताबिक इस राज्य में पानी की कमी है. इनको उतना पानी मिलता नहीं. तो खेती मेंसमस्या आ रही है. पंजाब के बिल पर हरियाणा ने कहा कि ये असंवैधानिक है. ऐसे थोड़ीहोता है. प्रकाश सिंह बादल ने हरियाणा को 191.75 करोड़ रुपये भी दिये कि नहर बनानेका खर्चा है. हम कैंसिल कर रहे हैं. पर हरियाणा ने मना कर दिया पैसा लेने से.हरियाणा ने हाल में ही कहा था कि पंजाब के पानी ना देने की वजह से हरियाणा को 35हजार करोड़ रुपये का घाटा हुआ है. अगर पंजाब ने भी अपनी तरफ से नहर बना लिया होतातो हरियाणा में 8 लाख टन ज्यादा अनाज पैदा होता. 5. 1977 में प्रकाश सिंह बादलपंजाब के मुख्यमंत्री बने. दूसरी बार. उस वक्त हरियाणा के मुख्यमंत्री थे देवीलाल.इसी समय इस नहर का डिजाईन पास हुआ था. और किसानों से जमीन लेने की बात तय की गईथी. दिल्ली को 0.2 MAF और राजस्थान को 8 MAF मिलना था. पंजाब ने इस पर दम साधे रखा.1979 में हरियाणा सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची.6. हरियाणा के हिस्से में 90 किलोमीटर की नहर थी. इसे उन लोगों ने 1980 में ही पूराकर लिया था. अंबाला से शुरू होकर करनाल के मूनक तक बन चुकी थी नहर. रावी और व्यासनदियों से 3.5 मिलियन एकड़ फुट(MAF) पानी मिलना था. पर मात्र 1.62 MAF ही मिला. पंजाब में तो जितनी भी नहर खुदी थी, उसे भरने का काम शुरू कर दिया गया था.7. 8 अप्रैल 1982 को इंदिरा गांधी ने पटियाला के कपूरी गांव में इस नहर की नींव रखीथी. 80-90 के दशक में पंजाब में आतंकवाद बहुत फैल गया था जिसके चलते ये मुद्दाथोड़ा ठंडा पड़ गया. क्योंकि इस नहर में लगे दो इंजीनियरों को मार दिया गया था.8. 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या हो गई. उसके बाद राजनीतिक अफरा-तफरी मच गई थी.फिर 1985 में राजीव गांधी ने अकाली दल के नेता हरचंद सिंह लोंगोवाल के साथ मिलकर एकसमझौता करा दिया. इसके बाद पंजाब ने भी नहर में काम लगा दिया. पर बहुत धीरे-धीरेकाम चल रहा था.इंडियन एक्सप्रेस9. मामला कोर्ट में चलने लगा. 2002 में सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार को नहर खोदनेका आदेश दिया.10. इस मुद्दे ने आग पकड़ी 2004 में. कांग्रेस की सरकार थी पंजाब में. मुख्यमंत्रीअमरिंदर सिंह ने सारे कॉन्ट्रैक्ट कैंसिल कर दिये. 2004 में ही पंजाब ने एक्ट लाकरकहा कि हम पानी के एग्रीमेंट को निरस्त करते हैं. तभी ये मामला सुप्रीम कोर्ट चलागया. इसके बाद अकाली दल और कांग्रेस में होड़ लग गई कि कौन पंजाब के किसानों का भलाज्यादा चाहता है. अब जब कांग्रेस ने एग्रीमेंट को निरस्त कर दिया था तो भाजपा कीसरकार इसे कैसे मान सकती थी. कैप्टन अमरिंदर सिंह को तो पानी का देवता ही घोषित करदिया गया था. हिंदुस्तान में तो हर किसी को देवता बनने की धुन होती है. ऐसे मेंबाकी नेता कैसे पीछे रहेंगे.11. 2004 में पंजाब के इस एग्रीमेंट को निरस्त करने के बाद राष्ट्रपति ने सुप्रीमकोर्ट से फिर पूछा कि क्या किया जाए इस मामले का. ये मामला दबा रहा. इतना भावनात्मकहो गया है ये मुद्दा कि कई बार दोनों राज्यों में हिंसा भी हुई है.12. बारह साल बाद सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति का रिफरेंस लिया और इस पर अपना फैसलादेने की बात की. 21 मार्च 2016 को अकाली दल की सरकार ने पंजाब सतलज यमुना लिंककैनाल बिल पास कर दिया. कि नहर बनाने के लिए जितनी जमीन ली गई थी वो सब वापस कर दीजाएगी किसानों को. 5376 एकड़ जमीन. जमीन लेते वक्त जो पैसा किसानों को दिया गयाथा, वो वापस भी नहीं लिया जायेगा.--------------------------------------------------------------------------------पंजाब कांग्रेस के सारे विधायकों ने रिजाइन किया!