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फिर मुसीबत में AAP विधायक, लेकिन वजह CBI का छापा नहीं है

एक नहीं कई विधायकों के लिए मुश्किल की घड़ी है.

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5 जुलाई 2017 (अपडेटेड: 5 जुलाई 2017, 01:30 PM IST)
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आम आदमी पार्टी मुसीबतों से निकली पार्टी है इसलिए मुसीबतों से कभी नहीं निकल पाती. इसके विधायकों पर इस वक्त फिर खतरा मंडराया हुआ है. दिल्ली भाई दिल्ली, देश की राजधानी. यहां के विधायकों की शादी नहीं हो रही. राखी बिड़लान ने रीजन भी क्लियर कर दिया. मामला रकम का है. यहां माननीय विधायकों की सैलरी बहुत कम है. दिल्ली सरकार ने मोदी सरकार के पास कागज भेज रखा है. मोदी सरकार ने कागज दबा रखा है. जिसमें विधायकों की सैलरी में भारी हाइक होनी है. हो सकता है कल को आम आदमी पार्टी पूरी दिल्ली में ये बोर्ड लगवा दे कि "प्रधानमंत्री सर, दिल्ली सरकार अच्छा काम कर रही है, विधायकों की सैलरी बढ़वा दीजिए." देखिए लोगों की किस्मत कितनी जल्दी पल्टी मारती है. कहां तो CBI मुसीबत बनी हुई थी, अब शादी बनी हुई है. आई मीन सैलरी मुसीबत बनी हुई है.
rakhi

लेकिन शादी न होने की इकलौती वजह सैलरी का कम होना नहीं हो सकता. माफ करो थोड़ा पिन मारने की कोशिश कर रहा हूं. मांगलिक फांगलिक वाली थ्योरी अपने पास रखो. और प्लीज किसी तरह की 'कमजोरी' का तो जिक्र ही मत कर देना नहीं तो हम गोबर सूंघ के मर जाएंगे, इल्जाम तुम पर आएगा. किसी भी शादी के तय होने में सौ तरह के झाम होते हैं. पंडिज्जी कहीं 36 की जगह 46 गुण मिला देते हैं तो कहीं लड़का देखने आए लड़की के घर वालों को कुछ नहीं जमता. कुछ नहीं तो लड़के की मां की चप्पल का रंग ही बेकार लग जाता है. या उनको दो रंग के कप में चाय दे दो तो भड़क जाते हैं. शादी न होने का कोई एक कारण थोड़ी होता है कि मुंह उठा के कह दो "सैलरी कम नहीं है इसलिए शादी नहीं हो रही." हमारी बुआ कहती थीं "बियाह नसीब कराता है, बिटिया का नसीब होगा तो पानी पूरी का ठेला लगाने वाले के घर ब्याह देंगे तब भी राज करेगी." उनको लगता था कि उनकी बिटिया केवल पानी पूरी खाकर जिंदगी खुशी खुशी बिता लेगी. और किसी चीज की जरूरत न होगी.
कुंवारे AAP विधायक प्रवीण कुमार
कुंवारे AAP विधायक प्रवीण कुमार

बुआ और उनकी बिटिया के किस्से में ज्यादा डीप नहीं घुसेंगे नहीं तो विधायकों का हाई प्रोफाइल मामला डिस्कस होने से रह जाएगा. फिलहाल हमारा सबसे बड़ा कन्सर्न है कि किस प्रकार विधायकों की शादी कराएं. देखो गीली सुपारी की कसम सैलरी बढ़वाने का पौव्वा है नहीं हमाए पास. हम उत्तै मोटा कद्दू लीलते हैं जित्ता मुंह है. बियाह करा देंगे, फिर पार्टी कराने की जिम्मेदारी उनकी है. पार्टी मतलब असली पार्टी, माल पुए वाली. उनकी पार्टी की तो वैसे भी लंका लगी पड़ी है. उसमें कौन शामिल होना चाहेगा. लेकिन एक बात तो है गुरू. केजरीवाल जो रोज प्रेस के सामने बताते हैं "मोदी जी करा रहे हैं..मोदी जी करा रहे हैं" उनके दावे का दम निकल गया है. अगर मोदी जी करा रहे होते तो कब की हो जाती. केजरीवाल जी तो 'लगाई बुझाई' के एक्सपर्ट हैं. क्यों नहीं कहीं से जुगाड़ लगाते कि उनके विधायकों के हाथ पीले हो जाएं.
केजरीवाल जी ममता दीदी के काफी करीब हैं. एक बार उधर भी जोर लगाएं. शादी ब्याह जितनी जल्दी हो जाए अच्छा है, नहीं तो आदमी के बहकने का डर रहता है. जहां शादीशुदा कपिल मिश्रा संदीप कुमार बहक सकते हैं वहां बाकियों का क्या कहा जाए? इसलिए ज्यादा लबाय चबाय हम नहीं बतियाएंगे. भले के लिए सलाह दे रहे हैं कि सैलरी वाला बहाना न बनाएं. विधायकों की शादी जल्द से जल्द कराएं.


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