विनीत दी लल्लनटॉप के रीडर और पक्के वाले दोस्त हैं. बलिया से हैं. जहां सेचंद्रशेखर प्रधानमंत्री बने थे. उन्हीं ने देवस्थली विद्यापीठ स्कूल खोला थाजिस स्कूल में पढ़े हैं विनीत. आजकल मुंबई में रहते हैं और वहीं से दुनिया देख रहेहैं. अपने देखे सुने का तमाम एक्सपीरिएंस लल्लन के साथ भी बांटते हैं. अपने दोस्तमकालू से परेशान रहते हैं, उसके किस्से भेजते हैं. आप भी पढ़िए.--------------------------------------------------------------------------------अभी अभी मकालू मिल गया. कहीं जाने की जल्दी में था.मैंने पूछा- सब खैरियत तो है?मकालू बोला- खैरियत मेरे दुश्मनो से पूछा करो. जब से मैंने आर्मी ज्वाइन की है तबसेसबको छठी का दूध याद दिला दिया है.आर्मी? अपनी पुरानी वाली नौकरी छोड़ दी क्या? वैसे तुम्हारी शारीरिक बनावट तो फौज केलायक नहीं है. तुम्हें भर्ती किसने कर लिया?- मेरे मुंह से ये स्वाभाविक सा सवालबिना पूछे बाहर फिसल गया.बोला- यार मैंने Trolling army ज्वाइन की है. वहां शरीर नही बल्कि बुद्धि की ज़रूरतहोती है.Trolling army?? गलती से फिर पूछ पड़ा.मकालू ने मुद्रा बदली और मुझे किसी उपदेशक की तरह समझाने लगा- गुरू ये समूह है हमजैसे लोगों का, जिनके अंदर रचनात्मक तरीके से गाली देने का हुनर है. हम सबके जीवनऔर उनके बयानों की ताक में रहते हैं. जहां मौका मिला नहीं, हम जहरीले शब्दों से वारशुरू कर देते हैं. और अगर मौका नहीं मिला तो बना लेते हैं. अधिकतर हमारी निष्ठाकिसी के लिए बिकी हुई होती है. हम उसके लिए ही काम करते हैं. मुख्यतः हमारीकर्मभूमि फेसबुक, ट्विटर है.कुछ-कुछ तो समझ में आ गया. लेकिन आखिर किस आधार पर गलियां देते हो ? मैंने पूछा.अपनी पैदाइश के जस्ट बाद ट्रोलिंग का शिकार हुआ बच्चा तैमूरमकालू शुरू हो गया- हम ताक में रहते हैं किसके घर बच्चा पैदा हुआ. उन्होंने क्यानाम रखा. किसकी बीवी ने कैसे कपड़े पहने. किसने हमारी जाति, धर्म, खाना-पहनावा,नेता- अभिनेता से लेकर हमारी गाय, भैंस या मुर्गा-मुर्गी के ऊपर किसी तरह कीटिपण्णी की. और इतने बड़े देश में मौको की कमी नहीं है. रोजगार तो मिल ही जाता है.मैंने कहा- लेकिन ये थोड़ा गलत सा काम नहीं लग रहा है? और भला तुम्हारी गाली सेकिसका क्या बिगड़ने वाला है? झूठ मूठ में खुद का ही मुंह गन्दा होगा. छोड़ो ये सब औरसुनाओ कल का क्या प्लान है? पद्मावत देखने चलोगे?मकालू की मुद्रा इस बार ठीक नहीं लगी. उसकी आंखे लाल हो गईं - गुरू पुराने दोस्त नाहोते तो अब तक मैं तुम्हारे दूध का भी दही बना चुका होता. अब तक तुम्हारा कांड होगया होता. आज कल मैं करणी सेना के लिए डेपुटेशन पर काम कर रहा हूं. पता नहीं तुमकौन से राजपूत हो. मिलावटी तो नहीं हो? कुछ हवा नहीं है कि क्या चल रहा है दुनियामें. तुम्हें पता है पद्मावती के नाम पर कितना बवाल काटा है हमारी सेना ने?करणी सेना को ट्रोल करता खिलजीबवाल मतलब ऑनलाइन गलियां दी हैं? - मैंने धीरे से पूछा.गुरु जैसे बहुत तरह का मोड ऑफ़ पेमेंट होता है. Cash,NEFT,Paytm,UPI वगैरह. और जैसेसामने वाली पार्टी जिस तरह के पेमेंट में कम्फर्टेबले होती है हम उसे वैसे हीपेमेंट अदा करते हैं. उसी तरह हमारे पास भी बहुत तरह कि वैरायटी है. हम ऑनलाइन केसाथ साथ ऑफलाइन भी ऑपरेट करते हैं. गालियों के साथ साथ लाठी-डंडे और पत्थर का भीइस्तेमाल करते हैं. बड़े मौकों पर हम ऑफलाइन भी काम करते हैं. रोड पर उतरकर तोड़ फोड़भी करते हैं. फिर हम नहीं देखते कि बस में बच्चे बैठे हैं या बूढ़े. हमें तो बसपत्थर बरसाना होता है. कश्मीर के पत्थरबाज भी फेल हैं हमारे आगे. यकीन नहीं आता तोभंसाली से पूछना. वैसे तुम कब और किस थिएटर में जा रहे हो पद्मावत देखने?मुझे समझ आ गया था कि मैंने उड़ता तीर ले लिया है. मैंने किसी साहसी योद्धा कि तरहतुरंत पाला बदला और जोर से बोला- मां पद्मावती जिंदाबाद, अल्लाउद्दीन खिलजीमुर्दाबाद. राजपूताना जिंदाबाद.मकालू बोला- अब आए न लाइन पर. वैसे गुरु तुमको अंदर कि बात बताता हूं. हमारे आकाओंको पता था कि पद्मावत है नहीं. लेकिन जरा सोचो जनता की भावनाएं भड़काने का मौका रोजरोज कहां मिलता है. वो तो शुक्र है भाई भंसाली का जिसने इतना शानदार मौका दिया.कितने बेरोजगार लौंडो को काम मिला. घर पर खली बैठने से तो अच्छा है की कही तोड़ फोड़ही करे. मन भी लगा रहता है है और शरीर भी सही रहता है. खैर तुम ये राजनीति नहीं समझपाओगे.मुझे सही में समझ नहीं आ रहा था कि क्या रिएक्शन दूं.तभी मकालू मेरे पास आकर कान में फुसफुसाया- मेरे पास पद्मावत फिल्म का पास पड़ा है.घर आके ले जाना. भाभी और बच्चों को भी ले जाना. बहुत अच्छी फिल्म बनाई है भंसालीने. बस एक बात का ध्यान रखना कि अंधेरे में जाना अगर मेरे सामने जाते दिख गए तोमज़बूरी में तुम्हारा जौहर करना पड़ जायेगा- और झटके से मकालू निकल गया.और अब मेरे माथे से पसीना निकल रहा है. भाई साहब क्या भरोसा ऐसे पागलों का. कब घरबुलाकर सिनेमा का पास दें और कब गालियां सुनाकर गुर्दा फेल कर दें.--------------------------------------------------------------------------------मकालू के और किस्से:'रात में बाबाओं की दुकान सजाने वाले चैनलों को दिन में ज्ञान देने का कोई हक नहीं'गौरी लंकेश की मौत पर हंसने वालों के लिए सबसे सही बात इस आदमी ने बोली है!‘बराला कांड’ पर सबसे सही बात इस आदमी ने कही है! गाय दूध देना बंद कर दे तो उसका क्या होता है?घर और काम की टेंसन से मुक्ति चाहिए तो बाबा के पास नहीं, मेरे साथ ‘बी बा’ चलो:मकालूक्या पीएम मोदी सच में कभी छुट्टी नहीं लेते?भौकाली अप्रेजल लपकना है तो ‘मकालू कोचिंग’ जॉइन करोसोशल मीडिया पर गालियों से बचना है तो ‘बच्चन अन्ताब’ बन जाओसूट बूट पहना के बिठा देने से कोई पत्रकार नहीं हो जाता: मकालूअगर आप भी सिगरेट और चाय उधार की पीते हैं तो ये पढ़िए!पद्मावती का रिव्यू ये रहा