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'रात में बाबाओं की दुकान सजाने वाले चैनलों को दिन में ज्ञान देने का कोई हक नहीं'

मकालू ने ज्ञान देने वालों पर गजब ज्ञान दिया है.

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18 सितंबर 2017 (अपडेटेड: 18 सितंबर 2017, 01:04 PM IST)
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निर्मल जीत सिंह नरूला उर्फ निर्मल बाबा
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vineet singh
 विनीत दी लल्लनटॉप के रीडर और पक्के वाले दोस्त हैं. बलिया से हैं. जहां से चंद्रशेखर प्रधानमंत्री बने थे. उन्हीं ने देवस्थली विद्यापीठ स्कूल खोला था जिस स्कूल में पढ़े हैं विनीत. आजकल मुंबई में रहते हैं और वहीं से दुनिया देख रहे हैं. अपने देखे सुने का तमाम एक्सपीरिएंस लल्लन के साथ भी बांटते हैं. अपने दोस्त मकालू से परेशान रहते हैं, उसके किस्से भेजते हैं. आप भी पढ़िए.



makalu 1

कल रात की बात है. रात के डेढ़ बज रहे थे. और मैं जागा हुआ था. न न मैं कोई नाइट शिफ्ट नहीं करता. आफिस तो सुबह सुबह ही जाना होता है मुझे इसलिए रोज जल्दी ही खा-पीकर सो जाता हूं. लेकिन कल रात मुझे नींद ही नहीं आ रही थी. वजह? ये तो मुझे भी नहीं पता. जब सारी करवट बदल चुका और सारी तरकीब फेल हो गई तो मैंने सोचा जबरदस्ती आंखें बंद रखने से बेहतर है कि टीवी देख लेता हूं.
बताता चलूं कि मैं फ़िल्में कम ही देखता हूं और सीरियल्स तो बिल्कुल नहीं. सो नेचुरली मैं टाइम पास के लिए न्यूज चैनल्स की तरफ बढ़ गया. झूठ क्या बोलना. मैं दिन के चौबीस घंटे में अड़तालिस घंटे तक टीवी पर न्यूज देख सकता हूं. मुझे हर खबर ब्रेकिंग न्यूज जैसी ही लगती है. चाहे वो सुबह से दोहराई ही क्यूं न जा रही हो. एक ही खबर को चैनल बदल बदल कर देखता हूं.
बवाल स्वामी ओम
बवाल स्वामी ओम

खैर. मैंने एक न्यूज चैनल लगाया. मेरा फेवरेट चैनल. जो देखा उसे देखकर आंखों पर यकीन ही नहीं हुआ. दिन में देशभक्ति बेचने वाला चैनल रात को लिंग और शारीरिक कमजोरी की बूटी बेच रहा था. दिन भर महिला सशक्तिकरण का अगुवा होने का दावा करने वाला चैनल रात को महिलाओं को खड़ा कर के पुरूषों को शारीरिक चुनौतियों के सामने खड़ा होने की प्रेरणा दे रहा था.
मैंने चैनल चेंज कर दिया. अब यहां भी नजारा अलग नहीं था. दिन में अंधविश्वास को मिटाने की दुहाई देने वाला चैनल. जिसका एंकर रोज पूछता है कि आखिर लोग बाबाओं के मकड़जाल में कैसे फंस जाते हैं? उसी चैनल पर इस वक्त अभिमंत्रीत रूद्राक्ष बेचा जा रहा था. जिसको पहन कर आपकी शादी, नौकरी, सेक्स लाइफ, दांपत्य जीवन, पितृ दोष, स्वप्न दोष, शत्रु बाधा, धन लाभ, स्वाथ्य लाभ से लेकर बवासीर तक को लाभ होगा.
पापू
पापू

चैनल बदल दिया मैंने लेकिन अबकी बार भी रिजल्ट कुछ अलग नहीं था. यहां एक दिव्य चव्यनप्राश बिक रहा था जिसकी वजह से बहुत सी शादियां टूटने से बच चुकीं हैं. और जो गवाह थे उनकी बातों को डिटेल में न ही बताऊं तो बेहतर होगा.
कसम से ये क्या चक्कर है गुरु. न्यूज चैनल कहां गए? रिमोट चेक किया. नम्बर तो सही दबा रहा था मैं और न्यूज चैनलों के नाम भी सही थे.
मैंने आखिरी कोशिश की. इस बार भी वही बात. घुटने के दर्द से छुटकारा दिलाने का ऐड खत्म ही हुआ था कि एक बाबा प्रगट हो गए. बोले- टीवी पर देखकर चटनी बदलने से कृपा नहीं आएगी. उसके लिए टिकट कटा कर समागम में आना होगा.
स्वामी नित्यानंद सीडी वाले
स्वामी नित्यानंद सीडी वाले

मैंने खीझ के अपने दोस्त मकालू को फोन किया. निशाचर है. मैंने पूछा- मकालू ये क्या चल रहा है न्यूज चैनल्स पर? कहीं अंधविश्वास तो कहीं जड़ी बूटी बिक रही है और कहीं चेहरा पहचानो और फोन मारो कंपटीशन चल रहा है. ख़बरें कहां हैं?
मकालू थोड़ा हंसते हुए बोला- गुरु इतनी रात गए जगे हुए हो? सब खैरियत तो है?
मैंने कहा- नींद नहीं आ रही है रात को अब इसे क्या खाक खैरियत कहूं? मेरी छोड़ो मेरे सवालों का जवाब दो.
मकालू बोला- गुरू एक बात बताओ. क्या एक भी मेहनती इंसान या नौकरी रोजगार करने वाला आदमी इस वक्त तक जगा होगा?
मैंने कहा- सवाल ही पैदा नहीं होता. थक कर सो गया होगा. मैं ही रोज सो जाता हूं .
मकालू बोला- गुरु बस इसी बात में सारा राज़ छिपा हुआ है. दरअसल रात के इस वक्त बेरोजगारी, नौकरी, बॉस, बीवी, बीमारी, गरीबी, सेक्सुअल लाइफ, कोर्ट कचहरी की वजह से अपनी जिंदगी से हताश और निराश लोग जगे होते हैं. परेशानी उन्हें सोने नहीं देती. रात का सन्नाटा उनके लिए और भी मुसीबत का सबब बन जाता है और जब वो अपनी परेशानियों से जूझ रहे होते हैं उसी वक्त एक बहुत बड़ा बाजार उनके लिए दुकान लगा रहा होता है. उन्हे अंधेरे में हसीन सपने बेचे जाते हैं. उनके सवालों का जवाब बेंचा जाता है.
लेकिन ये तो गलत है- मुझसे रहा नहीं गया- "ये टीवी वाले पूरे दिन ज्ञान ठेलते हैं और रात को क्या सारे सिद्धांतों को अपने साथ ही लेकर सो जाते हैं?
गुरु तुम गुरूघंटाल ही रह जाओगे. समाचार चैनलों को क्या तुम नीम हकीम से कम समझते हो? दिन में राजनीतिक गोरखधंधा करते हैं और रात के बारह बजे के बाद उनका दूसरा गोरखधंधा शुरू होता है. फिर दिन भर का सारा ज्ञान ताखे पर रख दिया जाता है. रात के अंधेरे में वो सब कुछ बेचा जाता है जिसके खिलाफ दिन भर चिल्ला रहे होते हैं.
बीच में रुककर मकालू ने मुझसे पूछा- गुरु तुम्हें नींद क्यूं नहीं हीं आ रही है? सो जाओ वर्ना तुम भी किसी दिन खुद ही ग्राहक बन जाओगे.
हां सो जाना ही बेहतर है. वैसे तुम क्या कर रहे हो?
गुरु मैं टीवी पर टेलीशापिंग से बर्तन खरीद रहा था- मकालू ने जवाब दिया.
अब इससे आगे मैं क्या बात करता मकालू से. मकालू भी न्यूज चैनलों वाली हरकत कर रहा था. जो काम मुझे नहीं करने की सलाह दे रहा था वही काम वो खुद कर रहा था. मैंने फोन रखा और टीवी, बत्ती के साथ ही आंख बंद करके लेट गया.
मैं समझ गया हूं- सब मोह माया है.
जाते जाते एक वीडियो देखते जाओ. हनीप्रीत के बारे में जान लो जिसके ऊपर सबसे ज्यादा वीडियो ट्रेंड कर रहे हैं.



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