लैंग्वेज भाईसाहब आपकी बहुत गंदी है!
सबकी अपनी अभिव्यक्ति है. सबकी अपनी भाषा है. हर भाषा की अपनी मौलिकता है, लेकिन भाषा ही सबसे अहम है. हर रस की अपनी एक भाषा है. संवाद के लिए अलग भाषा. प्रेम के लिए अलग भाषा. गुस्से के लिए अलग, कर्ज मांगने के लिए अलग और किसी को छलने के लिए अलग. वशीकरण के लिए अलग भाषा और उच्चाटन के लिए अलग.
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इन दिनों भाषा को लेकर देश में कई बहसें चल रही हैं.
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