'प्रधानमंत्री चुना है, जादूगर नहीं' कहने वालों को एक देशभक्त का जवाब
पीएम ने अपने आधे कार्यकाल में इतने करतब दिखाए हैं कि राष्ट्रद्रोही मुंह छिपाए हैं.
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फोटो - thelallantop
कल रात देर से सोया. निन्नी नहीं आ रही थी. जेब में एक हजार का नोट पड़ा था पुराना वाला. लाइन में लगा नहीं तो बदलवा नहीं पाया. आगे भी लाइन में लगकर अपने खाते में जमा नहीं कर पाऊंगा. तो इसी उधेड़बुन में था कि इस नोट का क्या करना है. सबसे शुरू में सबसे आखिरी वाला खयाल आया. कि जैसे शराबी ये दुआ करता है एक बोतल उसके साथ दफनाई जाए. वैसे ही मैं भी दुआ करूं कि ये मेरे 'अच्छे दिनों' का साथी नोट मेरे साथ ठिकाने लगाया जाए. फिर सोचा कि नहीं. इसे अच्छे से शीशे में मढ़वाकर दीवार पर लटका दूंगा. और आने वाली पीढ़ियों को दिखाता रहूंगा हमारे रामराज 2.0 का सुबूत. यही सोचते हुए नींद आ गई.
हम लोग गाली देते देते झाग छोड़ने पर आ गए हैं. हर आने जाने वाले को समझाते हैं. उसे सफेद रुमाल में ये लिखकर पकड़ा देते हैं "थोड़ा सब्र करो, प्रधानमंत्री चुना है जादूगर नहीं." इस अकेले जुमले के पीछे जिंदगी बसर हो रही है.
तभी नींद में मैंने महसूस किया कि कोई स्याला मच्छर कान में घों घों कर रहा है. मुझे मितरों मितरों का साउंड आ रहा था. हुमास के एक कंटाप मारा कान पर. इतनी जोर से लगा कि उठ बैठा. मुंह पर हाथ फेरते हुए बोला, कितना बुरा सपना था. फिर भी लगा कि सपना तो बीत चुका है. और उस जुमले से भी पीछा छूट चुका है. मन कह रहा है कि उन लोगों को जाकर खोजूं जो कहते थे प्रधानमंत्री चुना है, जादूगर नहीं. और एक एक कर उनको सारे जादू दिखाऊं.
जो काम हमारे प्रधानमंत्री कर गए हैं वो जादूगर ओपी शर्मा इस जनम में तो करने से रहे. हम अपनी बात बता रहे हैं. एक टुटपुंजिये शॉपिंग मॉल में घुसे. तारीख थी 8 नवंबर टाइम शाम के साढ़े सात बजे थे. घुसे कि एकाध कुर्ता ले लेंगे. दो भूसट(शर्ट) ले लेंगे. अंदर जाकर पता चला कि पसंद करते करते डेढ़ घंटा हो गया. हाथ में तीन शर्ट लेकर काउंटर पर पहुंचा. बिल बनाइस. हम नए करकराते नोट निकालकर उसके सामने किए. हजार और पांच सौ के. वो कहिस "सर ये तो बंद हो गए. आप कार्ड से पेमेंट कर दीजिए." हम कहे आंय? कब? कइसे? अभी एक घंटा पहले तो एटीएम से निकाले हैं. वो बोला सर, अभी पीएम ने हाथ नचाया, और बंद हो गए.
हम आश्चर्यचकित होकर अपने पर्स में झांक रहे थे. ये रद्दी पैंट में लादे घूम रहे हैं हम. ये काम तो किसी जादूगर का ही हो सकता है. इसके पहले वाला करतब याद है? यहां पब्लिक चिल्ला रही थी उड़ी अटैक-उड़ी अटैक. सरकार कुछ कर नहीं रही. जादूगर ने हाथ नचाया. सर्जिकल स्ट्राइक हो गई. इस जादू से छोटे जादूगरों की बंद होती दुकान को भी थोड़ा खर्चा पानी मिला. राहुल गांधी को काम मिला. अरविंद केजरीवाल की मार्केट तो पाकिस्तान तक चमक गई. अब कहोगे कि जादूगर नहीं चुना है?
वो महान जादूगर हैं. वो उधर पेट्रोल डीजल के दाम बढ़ाते हैं, यहां व्हाट्सऐप पर देश की जीडीपी बढ़ जाती है. वो वहां रेलवे किराया बढ़ाते हैं, यहां फेसबुक पर रेलवे वर्ल्ड क्लास सुविधाओं से लैस हो जाती है. नजर उठे तो जादू, नजर झुके तो जादू. दायां हाथ हवा में उठे तो जादू झड़ता है, बायां हाथ चमकाकर दुश्मन को ललकारते हैं तो जादू का सा असर होता है.
तुम उंगली के पोरों पर गिनना शुरू करो. जादू गिनकर थक जाओगे, खत्म नहीं होंगे. वाइन के ग्लास में दोस्तों संग नींबू पानी वही पी सकते हैं. किसी को भी कभी भी बड्डे विश कर सकते हैं. और जब वो करते हैं तो बड्डे हो जाता है. सुबह अफगानिस्तान जाते हैं, दोपहर को पाकिस्तान से निकलते हैं. अपने दोस्त की यौमे पैदाइश पर उसको सरप्राइज दे देते हैं. फिर उनका दोस्त उनको पठानकोट में सरप्राइज दे देता है. इसी तरह तो जादू होता है यार.
वो सीधे मंच से भी जादू दिखाते हैं. वहां जाकर भावुक हो जाते हैं. इधर पब्लिक अपनी भावना को फॉइल में लपेटकर हॉट पॉट में रख देती है. अगले साल निकालने के लिए. ये सबसे उच्च स्तर का जादू है. इसकी काट अगर किसी के पास हो तो बताना. हम भी मान लेंगे कि हमने प्रधानमंत्री चुना है जादूगर नहीं.
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