एक ऐसा गीत है, जिसने दो साल पहले ही उस समस्या का समाधान बता दिया था जिससे आजसमूचा भारत दो-चार हो रहा है. कतार से निजात पाने का तरीका बताने वाले गीतकार संदीपनाथ को पता भी नहीं होगा कि उनके इस गीत को लिखने के दो साल बाद ये गीत इतनाप्रासंगिक हो उठेगा. हालांकि इसे गाने वाले गायक लभ जंजुआ आज इस दुनिया में नहींहैं. कहते हैं क्रांतियां तब तक अधूरी हैं जब तक कोई क्रांतिगीत उसके साथ ना जुड़ाहो. बड़े-बड़े क्रांतिकारी आयोजनों को सफल करवाने में एक फैक्टर बहुत कारगर साबित हुआहै. वो है कोई ऐसा गीत जो आन्दोलनकारियों में जोश भर दे. उनकी रगों में बह रहे ख़ूनकी रफ़्तार बढ़ा दे. एक ऐसा प्रेरक गीत लीडर के दर्जनों भाषणों पर भारी पड़ता है. कलविपक्ष ने भारत बंद का ऐलान किया था. आप मानो, न मानो, कल के भारत बंद की बत्ती गुलहोने के पीछे यही वजह थी. विपक्ष के पास ऐसा कोई गीत ही नहीं था जो बैंक के बाहरलंबी-लंबी कतारों में लगी जनता को उकसा सके. जो उनको लाइन तोड़ कर सरकार के इसहाहाकारी फैसले के विरोध में उतरने की हिम्मत दे सके. हमसे पूछा होता किसी ने तो हमतमाम भारत बंद के अभिलाषी लोगों से कहते कि आप ये वाला गीत हर बैंक और एटीएम केसामने रिपीट मोड पर बजाओ. जनता खुदै सब कुछ बंद कर देगी. कतार से त्रस्त जनता जब'तोड़ दे कतार' का मंत्र बार-बार सुनती तो उसे रोकने की ताकत किसी माई के लाल में नाहोती. 'सरहद पर जवान मर रहे हैं' से ज्यादा मारक साबित होता ये 'तोड़ दे कतार' वालामंतर. लेकिन साहिर कहते हैं ना कि 'हाय ये हो न सका!' तो भैया विपक्ष का आइडिया रहाफ़ेल और जनता की बनी रही रेल. खैर आप गीत सुनिए जिसमें क्यू को ब्रेक करने की महिमाका बखान हो रहा है. वैसे तो इस गीत में प्रेम की नीरस गतिविधियों से बेज़ार शख्स कोये सलाह दी जा रही है कि वो कतार तोड़े और कुछ आउट ऑफ़ दी बॉक्स करे. लेकिन थोड़े सेहेरफेर के साथ ये गीत आज के हालात पर भी सटीक बैठता है. नोट :- जिस फिल्म का ये गीतहै उसका नाम 'इक्कीस तोपों की सलामी' है. अब चाहे आप ऐसा उकसाऊ गीत लिखने वालेगीतकार को दें ये सलामी या देश को कतार में ला खड़ी करने वाली सरकार को. आपकी अपनीश्रद्धा है. https://www.youtube.com/watch?v=N3wHZiQpUQY