साउथ कोरिया की कंपनी सैमसंग ने आईफोन-7 की टक्कर वाला गैलेक्सी नोट 7 स्मार्टफोनउतारा था. और आईफोन-7 के लॉन्च होने के महीने भर के भीतर ही इस फोन को बंद कर दिया.एक लाख करोड़ से ऊपर का घाटा लगा है. 25 लाख के करीब बिके हुये फोन वापस मंगा लियेगये. इसकी वजह भी ऐसी है कि सैमसंग के ब्रैंड को ही धक्का लगा है. हुआ ये कि इतनेमहंगे फोन में ब्लास्ट हो रहा था. एयरप्लेन में लैंडिंग और टेक-ऑफ के दौरान हर फोनको बंद करने के लिये कहा जाता है. पर सैमसंग गैलेक्सी नोट 7 को पूरी फ्लाइट में बंदरखने के लिये स्पेशल अनाउंसमेंट होता है. यूरोप में सैमसंग ने 45 हजार नोट 7 कीबुकिंग कर रखी थी. सब कैंसिल हो गया. इंग्लैंड में तो रिलीज ही नहीं हुआ ये फोन.पर फोन ब्लास्ट क्यों होते हैं? क्या वो बम की तरह होते हैं?फोन की स्क्रीन बड़ी होती जा रही है. फोन पावरफुल होते जा रहे हैं. उनकी बैटरी कीजरूरत बढ़ती जा रही है. ये बात पूरी तरह सच है कि अगर ब्लास्ट होता है तो ये बनानेवालों की ही गलती होती है. बैटरी को पूरा इस्तेमाल करने के चक्कर में वो लोगगड़बड़ा देते हैं. बढ़ाने के चक्कर में बैटरी की 90 परसेंट क्षमता इस्तेमाल की जाचुकी है. इन लिथियम ऑयन बैटरियों की ब्लास्ट होने की कई वजहें हैं. पर सबसे ज्यादाइसीलिये होता है कि उनसे काम बहुत ज्यादा ले लिया जाता है. लिथियम आयन बैटरियांस्मार्टफोन में बहुत ज्यादा इस्तेमाल होती हैं. क्योंकि ये बहुत हल्की होती हैं औरइनमें बहुत सारी ऊर्जा इकट्ठा की जा सकती है. फोन की प्रोसेसिंग स्पीड हर डेढ़ सालमें डबल हो जाती है. जबकि बैटरी में उस हिसाब से बदलाव नहीं आ पाता. आमतौर पर फुलचार्ज स्मार्टफोन एक दिन से ज्यादा नहीं चल पाता. बैटरी लाइफ समस्या तो है. पर इसकोसॉल्व करना उससे बड़ी समस्या बन गई है.बैटरी क्या होती है?बैटरी केमिकल एनर्जी को स्टोर करती है. जब स्मार्टफोन को चार्ज किया जाता है, तोकेमिकल रिएक्शन शुरू हो जाते हैं. इलेक्ट्रॉन एनोड से कैथोड जाते हैं और बैटरीचार्ज हो जाती है. जब इसको यूज किया जाता है तो इलेक्ट्रिसिटी पैदा होती है.इलेक्ट्रॉन एनोड की तरफ जाने लगते हैं. और जब सारे चले जाते हैं तो बैटरी डिस्चार्जहो जाती है.पर बैटरी किस चीज की बनी होती है?एक बैटरी में एनोड, कैथोड और इलेक्ट्रोलाइट रहते हैं. जिसमें से इलेक्ट्रॉन घूमतेरहते हैं. लिथियम ऑयन बैटरियों में कैथोड कोबॉल्ट, निकेल, मैंगनीज का बना होता है.एनोड ग्रेफाइट का होता है. इलेक्ट्रोलाइट लिथियम सॉल्ट का बना होता है.जब सारा खेल इलेक्ट्रॉन का ही होता है तो फिर दिक्कत क्या है?सुनने में फोन का काम बड़ा आसान सा होता है. लेकिन केमिस्ट्री और टेक्नॉलजी काचक्कर अलग होता है. बैटरी में चाहे कुछ भी लगा लें पर ये चलेगी सिर्फ केमिकल चीजोंके दम पर. और ये चीजें सबमें बराबर होती हैं. इसका उपाय होता है कि फोन का साइजबढ़ा दें. पर अब फोन पतले होते जा रहे हैं. तो ये फॉर्मूला भी नहीं चलेगा. फिर फोनके बार-बार चार्ज-डिस्चार्ज होने से एनोड और कैथोड पर इलेक्ट्रॉन और केमिकल की एकपरत जम जाती है. बैटरी का रजिस्टेंस बढ़ जाता है. लोड ज्यादा बढ़ने लगता है.पर ब्लास्ट कैसे हो जाता है?रजिस्टेंस बढ़ने से बैटरी को ज्यादा काम करना पड़ता है. टेम्परेचर बढ़ जाता है. 80डिग्री सेंटिग्रेड से ऊपर जाने पर बैटरी के कंपोनेंट खराब होने लगते हैं. और यहींपर वो जलने लगते हैं. छोटी सी बैटरी में प्रेशर बनने लगता है. ब्लास्ट हो जाता है.इलेक्ट्रोलाइट ही जलने लगता है. हालांकि साइंटिस्ट इसपे काम कर रहे हैं. किऐसा इलेक्ट्रोलाइट आ जाये जो ब्लास्ट ना करे.सैमसंग ने अभी तक ये क्लियर नहीं किया है कि नोट 7 की दुर्दशा की क्या वजह है.भविष्य में इन सारी चीजों की जगह पर सॉलिड स्टेट की चीजें इस्तेमाल की जायेंगी. तोक्षमता बढ़ जायेगी और ब्लास्ट भी नहीं होगा.पर अभी क्या करें?बैटरी को सबसे ज्यादा काम दो स्थितियों में करना पड़ता है- पहला, चार्जिंग जब 80 सेऊपर हो जाये. दूसरा, जब डिस्चार्ज 20 से नीचे हो जाये. तो इसके बीच रखने पर बैटरीसेफ रहती है. रात भर चार्ज में रखने से कोई फायदा नहीं होगा. फिर बेहतर होगा कि फोनको महीने में एक बार फुल डिस्चार्ज कर लिया जाये.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ लो: नया गैलेक्सी फोन चार्जिंग में खोंस के सो न जाना, घर वर सब बर जाएगा