मुनव्वर राना. उर्दू शायरी का एक नाम. उन्होंने मां पर ऐसी शायरी रची कि आज उनकानाम मां का ही एक लकब लगता है. क्योंकि मां लफ्ज होठों पर आता है और मेरे जहन मेंमुनव्वर राना. इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर ऑफ़ आर्ट में 'साहित्य आजतक' का पहला दिनथा. यूं तो महफ़िल 'लल्लनटॉप अड्डा' पर 10 बजे से ही सज गई थी. मगर रौनक उस वक्त आईजब मुनव्वर राना के लफ़्ज़ों में लिपटी मां आई. मुनव्वर राना हेल्थ से थोड़ा मजबूर.मगर जब स्टेज की तरफ बढ़े. तो वहां बैठे लोगों में जोश खरोश पैदा कर दिया. और कहा,तमाम शोखियां अब भी मुझमें वैसे ही बाकी हैं. जैसे पहले थीं. मैं अभी दुबई से वापसआ रहा था. हवाई जहाज में बगल की सीट पर एक जनाब बैठे हुए थे. उन्होंने मुझ से पूछाकि ये जहाज में सीट बेल्ट क्यों बांधते हैं तो मुनव्वर राना ने उसे बताया ताकि एयरहोस्टेस महफूज़ रह सकें. हंसते हुए वो कहते हैं, 'मुमकिन है ये बात हंसने की न हो,लेकिन एयर होस्टेस के महफूज़ रहने की वजह ये है कि हम रस्सी से बंधे रहते हैं.' उनकेइतना कहते है लल्लनटॉप अड्डा कहकहों से गुलजार हो गया. मुनव्वर राना ने कहा किलोगों ने अलग अलग रुख को देखा और शायरी की. हमने मां को देखा और उस पर शायरी की. जबहमने मां पर शायरी की तो आलोचक, शब्दकोष चीखने लगे. और कहने लगे कि ये गलत है, गजलके मानी महबूबा से बातें करना है. फिर आप मां पर गजल कैसे लिख सकते हैं. मैंने कहानहीं अगर एक मामूली सूरत-ओ-शक्ल की औरत मेरी महबूब हो सकती है तो मेरी मां, मेरीमहबूबा क्यों नहीं हो सकती. और मैं अपने अहद पर ये सोचके कायम रहा, जब आचार्यतुलसीदास के महबूब भगवान राम हो सकते हैं तो मेरी महबूबा मेरी मां क्यों नहीं होसकती. जिंदगी के 45 बरस इसमें गुजार दिए. और मुझे ख़ुशी है कि इस शायरी में पूराखानदान है. रिश्ते हैं. मां है, बहन है, मौसी है. मुन्नवर राना ने बताया कि मेरीपांच बेटियां हैं और बहू है. मैंने हमेशा उन्हें यही कहा कि अपनी औलाद को अपना दूधजरूर पिलाओ. 2 कतरे, चार कतरे या 10 कतरे जरूर मुंह में डाल दो. लेकिन वो क्या चलगया है नेस्ले दूध, पता नहीं क्या, क्या. लेकिन इस ज़माने में मेरी इस बात को कोईसुनता ही नहीं. मैं कहता हूं अगर सरहद पर जंग छिड़ जाए तो माएं उस वक्त क्या कसमदिलाएंगी. जब उन्हें देश की हिफाजत के लिए भेजेंगी. क्योंकि दूध तो उन्होंने पिलायाही नहीं. क्या ये कहेंगी कि जाओ तुम्हें नेस्ले के दूध की कसम. और आखिर मेंउन्होंने अपने शेर से महफिल को उसे मियार बख्शा. घेर लेने को मुझे जब भी बलाएं आगईं ढाल बनके सामने मां की दुआएं आ गईं ऐ अंधेरे देख ले मुंह तेरा काला हो गया मांने आंखें खोल दीं घर में उजाला हो गया साहित्य आजतक में उन्होंने शायरी की बात की.शायरों के बारे बात की. अपनी जिंदगी के किस्से सुनाए. कुछ ऐसे शेर भी सुनाए जिनकेलिए वीडियो को देखना बेहद जरूरी है. लिख तो मैं यह भी देता इसलिए वीडियो को देखें.ये रहा वीडियोhttps://www.youtube.com/watch?v=izAjXJwAq1s-------------------------------------------------------------------------------- ये भी पढ़ेंपैसों या पद के लिए मैं राजनीति में नहीं आया था: आशुतोष