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मुनव्वर राना ने शरारती अंदाज में बताया, हवाई जहाज में बेल्ट क्यों बांधते हैं?

उर्दू शायर की ये शोखियां आपके चेहरे पर मुस्कुराहट बिखेर देंगी.

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पंडित असगर
16 नवंबर 2016 (अपडेटेड: 16 नवंबर 2016, 10:26 AM IST)
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मुनव्वर राना. उर्दू शायरी का एक नाम. उन्होंने मां पर ऐसी शायरी रची कि आज उनका नाम मां का ही एक लकब लगता है. क्योंकि मां लफ्ज होठों पर आता है और मेरे जहन में मुनव्वर राना. इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर ऑफ़ आर्ट में 'साहित्य आजतक' का पहला दिन था. यूं तो महफ़िल 'लल्लनटॉप अड्डा' पर 10 बजे से ही सज गई थी. मगर रौनक उस वक्त आई जब मुनव्वर राना के लफ़्ज़ों में लिपटी मां आई. मुनव्वर राना हेल्थ से थोड़ा मजबूर. मगर जब स्टेज की तरफ बढ़े. तो वहां बैठे लोगों में जोश खरोश पैदा कर दिया. और कहा, तमाम शोखियां अब भी मुझमें वैसे ही बाकी हैं. जैसे पहले थीं. मैं अभी दुबई से वापस आ रहा था. हवाई जहाज में बगल की सीट पर एक जनाब बैठे हुए थे. उन्होंने मुझ से पूछा कि ये जहाज में सीट बेल्ट क्यों बांधते हैं तो मुनव्वर राना ने उसे बताया ताकि एयर होस्टेस महफूज़ रह सकें. हंसते हुए वो कहते हैं, 'मुमकिन है ये बात हंसने की न हो, लेकिन एयर होस्टेस के महफूज़ रहने की वजह ये है कि हम रस्सी से बंधे रहते हैं.' उनके इतना कहते है लल्लनटॉप अड्डा कहकहों से गुलजार हो गया. मुनव्वर राना ने कहा कि लोगों ने अलग अलग रुख को देखा और शायरी की. हमने मां को देखा और उस पर शायरी की. जब हमने मां पर शायरी की तो आलोचक, शब्दकोष चीखने लगे. और कहने लगे कि ये गलत है, गजल के मानी महबूबा से बातें करना है. फिर आप मां पर गजल कैसे लिख सकते हैं. मैंने कहा नहीं अगर एक मामूली सूरत-ओ-शक्ल की औरत मेरी महबूब हो सकती है तो मेरी मां, मेरी महबूबा क्यों नहीं हो सकती. और मैं अपने अहद पर ये सोचके कायम रहा, जब आचार्य तुलसीदास के महबूब भगवान राम हो सकते हैं तो मेरी महबूबा मेरी मां क्यों नहीं हो सकती. जिंदगी के 45 बरस इसमें गुजार दिए. और मुझे ख़ुशी है कि इस शायरी में पूरा खानदान है. रिश्ते हैं. मां है, बहन है, मौसी है. मुन्नवर राना ने बताया कि मेरी पांच बेटियां हैं और बहू है. मैंने हमेशा उन्हें यही कहा कि अपनी औलाद को अपना दूध जरूर पिलाओ. 2 कतरे, चार कतरे या 10 कतरे जरूर मुंह में डाल दो. लेकिन वो क्या चल गया है नेस्ले दूध, पता नहीं क्या, क्या. लेकिन इस ज़माने में मेरी इस बात को कोई सुनता ही नहीं. मैं कहता हूं अगर सरहद पर जंग छिड़ जाए तो माएं उस वक्त क्या कसम दिलाएंगी. जब उन्हें देश की हिफाजत के लिए भेजेंगी. क्योंकि दूध तो उन्होंने पिलाया ही नहीं. क्या ये कहेंगी कि जाओ तुम्हें नेस्ले के दूध की कसम. और आखिर में उन्होंने अपने शेर से महफिल को उसे मियार बख्शा.
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साहित्य आजतक में उन्होंने शायरी की बात की. शायरों के बारे बात की. अपनी जिंदगी के किस्से सुनाए. कुछ ऐसे शेर भी सुनाए जिनके लिए वीडियो को देखना बेहद जरूरी है. लिख तो मैं यह भी देता इसलिए वीडियो को देखें.

ये रहा वीडियो

https://www.youtube.com/watch?v=izAjXJwAq1s
 

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