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कौन थीं साध्वी प्रेम बाईसा, जिनकी एक इंजेक्शन लगने के थोड़ी देर बाद मौत हो गई?

प्रेम बाईसा ने जोधपुर के एक गुरुकुल में शिक्षा ली और 12 साल की उम्र से धार्मिक प्रवचन देने लगीं. उनके पिता ही उनके गुरु थे.

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Sadhvi Prem Baisa
साध्वी प्रेम बाईसा. (फाइल फोटो- आजतक)
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सौरभ
30 जनवरी 2026 (पब्लिश्ड: 12:04 AM IST)
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25 साल की साध्वी प्रेम बाईसा को नाथ परंपरा के अनुसार भगवा वस्त्र पहनाकर बैठी हुई अवस्था में समाधि दी गई. उनकी मौत जोधपुर के आश्रम में हुई. बाईसा को एक इंजेक्शन लगा, जिसके बाद संदिग्ध परिस्थितियों में उनकी मौत हो गई. साध्वी की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका जवाब अब तक ना तो उनसे जुड़े लोग दे पाएं हैं, ना ही पुलिस.

रिपोर्ट्स के मुताबिक आश्रम में बुलाए गए एक कंपाउंडर ने उन्हें इंजेक्शन लगाया, जिसके बाद वे बेहोश हो गईं. अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने शाम 5:30 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया. अस्पताल के डॉक्टर ने उनके पिता वीरम नाथ को पोस्टमार्टम कराने की सलाह दी और एंबुलेंस भी देने की पेशकश की, लेकिन पिता शव को अपनी गाड़ी से वापस आश्रम ले गए.

NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक रात करीब 10:30 बजे पुलिस पहुंची और पोस्टमार्टम के लिए साध्वी के पिता को समझाया. पहले वे तैयार नहीं थे, लेकिन बाद में लोगों के समझाने पर सरकारी अस्पताल ले जाने के लिए राजी हुए. वे साध्वी का मोबाइल भी पुलिस को देने में हिचकिचा रहे थे, बाद में पुलिस ने ले लिया.

कौन थीं प्रेम बाईसा?

साध्वी प्रेम बाईसा ने बहुत कम समय में धार्मिक कथावाचक के रूप में पहचान बनाई. उन्होंने राजस्थान के कई हिस्सों में अच्छी लोकप्रियता हासिल कर ली थी. लोगों को जब उनकी मौत की खबर पता चली तो सैकड़ों की संख्या में आश्रम के बाहर भीड़ इकट्ठा हो गई.

उनका परिवार मूल रूप से राजस्थान के पश्चिमी हिस्से के छोटे से गांव परेऊ से ताल्लुक रखता है. पिता पहले ट्रक ड्राइवर थे. उनकी मां का नाम अमरू देवी था. न्यूज़ 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, जब मां का देहांत हुआ तब बाईसा की उम्र महज़ पांच साल थी. परिवार जसनाथजी संप्रदाय का अनुयायी था. गांव में पूजा-पाठ को लेकर विवाद के बाद परिवार जोधपुर के जसथी गांव चला गया. यहां वे जसनाथजी मंदिर के सेवक बन गए. मां की मौत के बाद पिता ने संन्यास लिया और वे वीरम नाथ कहलाने लगे. उन्होंने ही बेटी को नाथ परंपरा में दीक्षित किया.

प्रेम बाईसा ने जोधपुर के एक गुरुकुल में शिक्षा ली और 12 साल की उम्र से धार्मिक प्रवचन देने लगीं. कुछ ही समय में वे लोकप्रिय हो गईं. समय के साथ दान मिलने लगे और पिता-बेटी ने जोधपुर, परेऊ और जसथी में तीन आश्रम बना लिए.

मौत पर उठे सवाल

मौत के बाद सुसाइड नोट जैसा पोस्ट
साध्वी प्रेम बाईसा की मौत हो चुकी है. मौत के कुछ समय बाद उनके इंस्टाग्राम पर सुसाइड नोट जैसी एक पोस्ट लिखी गई. पोस्ट में ‘अग्नि परीक्षा’ जैसी बातें लिखी गईं. आखिर में लिखा गया कि जीते जी न्याय नहीं मिला, जाने के बाद मिलेगा.

सवाल उठा कि साध्वी की मौत के बाद यह पोस्ट किसने किया. इस पर उनके पिता ने कहा कि यह पोस्ट उन्होंने ही लिखा था. पिता का कहना है कि उनके मन में बेटी के लिए जो भावनाएं थीं वे सब उन्होंने व्यक्त कीं.

क्या इंजेक्शन से मौत हुई?
पिता ने बताया कि बाईसा को गले में कुछ दिक्कत थी. इसलिए उन्होंने पास के अस्पताल में फोन किया. वहां से एक कंपाउंडर आया. उसने इंजेक्शन लगाया. लगाते ही बाईसा को छींके आने लगीं. छींके रुकी ही नहीं. थोड़ी देर बाद उन्हें सांस लेने में दिक्कत होने लगी. वो गिर गईं. तुरंत साध्वी को अस्पताल ले जाया गया. जहां डॉक्टरों ने बचाने की कोशिश की, लेकिन बचाया नहीं जा सका.

सवाल ये उठता है कि क्या इंजेक्शन लगने से साध्वी की तबीयत बिगड़ी? अगर यह सच है तो क्या इंजेक्शन के जरिए उन्हें मारने की कोशिश की गई? जिस कंपाउंडर ने इंजेक्शन लगाया था, उससे पूछताछ की जा चुकी है. 

वायरल वीडियो मौत की वजह?
दरअसल पिछले साल एक सीसीटीवी वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें प्रेम बाईसा अपने पिता को गले लगाती दिख रही थीं. उन्होंने इसे पिता-पुत्री के स्नेह का सामान्य भाव बताया था और इसे बदनाम करने की साजिश कहा था. उस मामले में एक व्यक्ति को गिरफ्तार भी किया गया था. जो पोस्ट बाईसा के पिता ने मौत के बाद की, उसमें अग्नि परीक्षा की बात की गई थी. इस अग्नि परीक्षा को उस वीडियो से जोड़ा जा रहा है.

उनके पिता ने आजतक से बात करते हुए कहा कि यह वीडियो 2021 का था. वह कई दिन बात अपनी बेटी से मिल रहे थे. बेटी भावुक थी. लेकिन वीडियो को गलत तरीके से पेश किया गया.

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