17 जनवरी 2016 को खुदकुशी कर लेने वाले रोहित ने फेसबुक पर आठ साल के अपने लेखन केदौरान गाज़ा से लेकर गाज़ियाबाद तक, शायद ही कोई मुद्दा हो जिस पर टिप्पणी नहीं कीहो. जाति से लेकर गाय की राजनीति तक पर पोस्ट लिखीं. रोहित वेमुला (26 साल)हैदराबाद विश्वविद्यालय में शोधार्थी और एक छात्र नेता था. खुदकुशी के बाद वोदलितों के प्रति होनेवाले भेदभाव के खिलाफ व्यापक आंदोलन का चेहरा बन गया. रोहित कीपोस्ट को संपादित कर निखिला हेनरी ने रोहित वेमुला की ऑनलाइन डायरी 'जाति कोई अफवाहनहीं' को किताब का रूप दिया है. जो यहां हम प्रकाशक जगरनॉटबुक्स की अनुमति से आपकोपढ़वा रहे हैं.-------------------------------------------------------------------------------- ज़िंदगी, रोमांस और अपने बारे में रोहित वेमुलाराधिका वेमुला और मणि कुमार वेमुला के यहां 30 जनवरी 1989 को रोहित वेमुला का जन्महुआ था.वेमुला ने आंध्रप्रदेश के गुंटुर में अपनी ज़िंदगी के बारे में बहुत कम लिखाहै. गुंटुर मिर्च के उत्पादन में सबसे आगे है. हैदराबाद विश्वविद्यालय मेंबायो-टेक्नोलॉजी विभाग में एसएससी में दाखिला लेने के बाद भी वेमुला हर साल गुंटुरजाता था. बाद में वेमुला ने हैदराबाद विश्वविद्यालय से ही साइंस टेक्नोलॉजी एंडसोसाइटी विभाग में पीएचडी शुरू की. वेमुला की मां माला जाति की दलित महिला थीं.उनके पति वड्डेरा समुदाय (अन्य पिछड़ी जाति, ओबीसी) के थे.पांच साल विवाहित रहने केबाद सन 2000 में उनका तलाक हो गया. उनकी तीन संतानें थीं- एक रोहित वेमुला की बड़ीबहन डी. नीलिमा और दूसरा, छोटा भाई राजा चैतन्य वेमुला. वेमुला अपनी मां को उन दोस्तंभों में गिनता था जिन्होंने उसकी ज़िंदगी को सहारा दिया था. इनमें से दूसरा थाउसका दोस्त शेख रियाज़. अपनीऑन लाइन तस्वीरों के नीचे लिखी एक दो पंक्तियों में हीवेमुला अपनी घरेलू ज़िंदगी के 20 सालों के बारे में जानकारी देता है. इन पंक्तियोंमें वेमुला सिलाई का काम करने वाली अपनी मां और घर से हमेशा गायब रहने वाले अपनेपिता की प्राइवेट सेक्योरिटी गार्ड की वर्दी का उल्लेख करता रहता है. वेमुला अपनेको एक ‘निराश रोमांटिक’शख्स के रूप में पेश करता था. उसे लोगों से प्यार था. उसेसंगीत और शराब से मोहब्बत थी. हालांकि उसकी मौलिक पहचान एक राजनीतिक कार्यकर्ता केरूप में थी, वह क्रिकेट खेलने, दोस्तों के साथ मौज मस्ती करने, प्यार करने और प्यारके टूटने और मानवता में अपने विश्वास के बारे में भी लिखता रहता था. वेमुला इन सबके बारे में पूरी तरह डूबकर लिखता था. उसकी भाषा मस्ती और दुख से सराबोर होती थी.आखिर वह अपनी जवानी के शिखर पर था. डॉ. बीआर आंबेडकर के साथ साथ कार्लमार्क्स औरकार्लस गान भी उसकी प्रेरणा के स्रोत थे, लेकिन उसे एआर रहमान के गाने मरहबा यामुस्तफा में भी उतना ही मज़ा आता था. उसे यकीन था कि हैदराबाद विश्वविद्यालय मेंउसे अच्छे दोस्त मिलेंगे और वह अच्छी ज़िंदगी बिता पाएगा.A. घर और दूसरे मसलों के बारे में30 जनवरी 2008 रोहित वेमुला के पास जो भी है उसमें वह खुश है..(वह) प्रतिभावान (है)22 जुलाई 2010 मैंने हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय में दाखिला ले लिया. यहां कामाहौल अद्भुत है. लोग अच्छे हैं. खुशी महसूस हो रही है. कुछ अच्छे दोस्तों को ढूंढरहा हूं. 6 मार्च 2011 आज मुझे सलामी बल्लेबाज़ के तौर पर खेलने का मौका मिला(हैदराबाद विश्वविद्यालय के एक मैच में- संपादक). सहयोग के लिए प्रवीण और रोहित(दोस्त- संपादक) का शुक्रिया. 17 जून 2012 मैं घरेलू हिंसा के ख़िलाफ़ हूं. मैंनेअपनी मां के तकलीफों को देखा है और मैं आगे आने वाले परिवर्तनों का हिस्सा बननाचाहता हूं. असली मर्दानगी तो तब है जब औरत आपके साथ रहना चाहे (न कि उसे साथ रहनेको मजबूर करने में) 13 मार्च 2014 (उसने कई तस्वीरें पोस्ट कीं –संपादक) मैं अपनीमां की सबसे अच्छी दोस्त, एक बिल्ली की तस्वीर लेने की कोशिश कर रहा था. वह इसे‘रास्कल’ (दुष्ट) कह कर पुकारती है. लेकिन मेरे घर में यह बिल्ली ही एक ऐसा जीव हैजो मां की बात मानती है. वह भाग गई. वो मेरे साथ कभी नहीं खेलती. हमारे घर में एकरेफ्रिजेरेटर है जिसके कारण हमारे घर को मुहल्ले में लोग बहुत प्यार करते हैं. मैंइसमें रखे पानी की बोतलें नहीं छूता क्योंकि उनमें से ज़्यादातर पड़ोसियों की हैं.टी वी का रिमोट तो प्रायःहमेशा पड़ोस के बच्चे के हाथ में ही रहता है. पिता कीवर्दी, हॉस्पिटल में सिक्योरिटी गार्ड. (सार्वजनिक नल की तस्वीर के साथ-संपादक)पानी का स्रोत और गपशप की जगह. मेरे जूनियर रिसर्च फेलोशिप मिलने के पहले यही(सिलाई की मशीन –संपादक) परिवार की आमदनी का ज़रिया थी...यह मेरी मां का प्यारापेशा है. वह कहती है कि ‘मशीन’ औरत को ताकतवर बना सकती है. अब वो एक शिक्षक है. अबवह आस पास के औरतों को सिलाई-कढ़ाई सिखाती है. 13 मार्च 2014 रियाज़ की मोटर साइकिलजिस पर मैंने गाड़ी चलानी सीखी.B. रूमानी व्यक्तित्व14 अप्रैल 2009 किसी के साथ रह कर भी अकेले महसूस करने से बेहतर है अकेले रहना. 6फरवरी 2014 मैं जानता हूं कि मेरा इस तरह बात करना जैसे कि मैं तुम्हें समझता हूं,गलत है. मुझे इस बात का अहसास है कि तुम्हारी समस्याएं बहुत ही तकलीफ देह हैं. मैंतो सिर्फ इतना कहने की कोशिश कर रहा हूं कि ‘तुम अकेले नहीं हो’, दुनिया में ऐसेलाखों लोग हैं जो इस वक्त ठीक तुम्हारी तरह असहनीय परिस्थितियों को झेल रहे हैं.तुम खुश रहो, मैं बस यही चाहता हूं. 23 मार्च 2014 लड़की ने अपनी जानी-पहचानी स्नेहभरी आवाज़ में पूछा, ‘तुम कैसे हो?’ उसकी आंखें वैसी ही अबूझ सी लग रही थीं. लड़कातुरंत नीचे की तरफ देखने लगा और मुस्कुरा कर बोला, ‘बिलकुल ठीक!’ मैंने लड़की कोमुस्कुराते हुए देखा. उसकी मुस्कुराहट कागज़ के फूल की ताज़गी कामुका बला कर रहीथी. ‘बुरी तरह टूटा हुआ हूं, लेकिन किसी तरह ज़िंदगी चल रही है,’ उसे एक अनजानी सीआवाज़ सुनाई दी. लेकिन पक्के तौर पर नहीं कह सकता कि वह आवाज़ उसके अंदर से आई थीया किसी दूर की जगह से. खैर, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. इन दोनों में कोई खास फर्कनहीं है. ओस की बूंदों जैसी आंखों वाले अनजान शख्स से आईने में मेरी बातचीत. 26मार्च 2014 कभी-कभी एक छोटी-सी बात हमारी तर्कशक्ति को चुनौती देकर चली जाती है.अगर मैं अपने इतिहास में जा कर जी सकूं तो क्या होगा? जिस किसी व्यक्ति का बचपनथोड़ा मुश्किलों से भरा रहा हो और किशोरावस्था भी थकाने वाली रही हो ऐसे व्यक्ति केदिमाग में यह सवाल आना एक सामान्य सी बात है. काश कि मैं ऐसे लोगों से नहीं मिलाहोता और उन्हें अपने से दूर जाते हुए बेवकूफों की तरह नहीं देखता! अगर मुझे ऐसेवक्त में वापस जाने का फिर से मौका मिलता जब सारी दुनिया खूबसूरत दिखती थी तो क्यामैं अपनी ज़िंदगी नए सिरे से शुरू करना चाहता? मेरे प्यार के मौसम में सूरज, चांद,तारे, आसमान, फूल और रंग केवल एक दर्शक नहीं थे. ये सब मेरी ज़िंदगी के जश्न मेंशामिल किरदार थे. होशो-हवास रखने वाला कोई भी इंसान उन क्षणों को फिर से जीनाचाहता. लेकिन मैंने ऐसा नहीं चाहा. मैंने कभी अपनी पुरानी ज़िंदगी में वापस नहींजाना चाहा. आज मेरा इतिहास चाहे कितना भी परेशानियों से भरा क्यों न हो लेकिन मेरीपुरानी ज़िंदगी में कुछ भी ऐसा नहीं जिसे मैं याद करना चाहूं. आज मेरे सपनों मेंभले ही परेशान करने वाली बातें मुझे सताए लेकिन ऐसा भी एक वक्त था जिसमें मेरे पाससपने देखने लायक कुछ भी नहीं था. आज मेरी स्मृति में दुख भरे पल होते हैं, मैं बुरेसपने देखता हूं, मैं लहूलुहान भी होता हूं, अवसादों से घिर जाता हूं लेकिन उन दिनोंमैं बिलकुल उदासीन था. मैं पूरी तरह शिथिल था. मुझसे प्यार करने वाला कोई न था,मुझे परखने वाला कोई न था. अपने उलझे हुए दिमाग से निकले किसी पेचीदा सवाल का जवाबआपने कितनी बार गंभीरतापूर्वक, चतुराई पूर्ण तरीके और अपने ही अंदर उलझे हुए तर्कोंसे दिया है? टूटा हुआ, दफनाया हुआ. 18 अप्रैल 2014 'तुम्हें पता है कि मुझेतुम्हारे बारे में लोगों ने आगाह किया था?' लड़के की ओर आश्चर्य से देखते हुए लड़कीने कहा था, मानो उसी ने आसमान में सभी तारे जड़ दिए हों. और अपनी अधखिली हंसी केखास अंदाज़ में उसके बालों को सहलाते हुए लड़के ने फुसफुसाते हुए कहा था, 'लेकिनतुम तो हो न यहां.' और मैंने आसमान में किसी के हौले-हौले कराहने की आवाज़ सुनी थी.ज़रूर ही चांद उसे सितारों से मिलवा रहा होगा. 3 जुलाई 2015 वह दिलों को इकट्ठाकरती है पर इसके बाद उसे उनकी कोई चिंता नहीं रहती. गीली रेत में पैरों के निशान कीतरह, बच्चे की मुस्कुराहट की तरह वह ज़िंदगी पर हमला करती है. अकेली रातों में तेज़बरसातों की तरह वह एक मरहम जैसी है जो जलाती है. सबको पता है कि वह लोगों की जानलेती है, आपकी ज़िंदगी को बेमतलब बना देती है लेकिन फिर भी उससे आज तक कोई बच नहींपाया है- मौत की तरह, प्यार की तरह. कुछ लोग कहते हैं कि उसका कोई मकसद है जैसे किदुनिया को बचाना. उसे कैसे बताऊं कि मैं भी उसी दुनिया का एक हिस्सा हूं. कुछ लोगकहते हैं कि वह सबसे प्यार करती है फिर मैं सबमें शामिल क्यों नहीं? मैं जिस किसीहोंठ को चूमता हूं उसमें मुझे अकेलेपन का अहसास मिलता है. हर आलिंगन मुझे और भीसिकुड़ा जाती है. शराब का हर प्याला उस बुजुर्ग की तरह लगता है जिसकी सलाह का मतलबमुझे ढूंढ़ना है. क्या मुझे इस बात के लिए दुखी होना चाहिए कि मैंने उससे इसज़िंदगी में प्यार नहीं किया? या कि मुझे खुश होना चाहिए कि मुझे एक और ज़िंदगीजीने का मकसद मिल गया? अप्रकाशित लेखन का भावानुवाद (इसे पहले तेलुगु में लिखा गयाथा जिसे बाद में फेसबुक पर पोस्ट करने के लिए अनूदित किया गया- संपादक)C. अपने बारे में कुछ21 अप्रैल 2011 मुझे आज एक बात का पता चला. मेरे ऊपर परीक्षा से संबंधित कोई शापहै. भले ही मैं कितनी भी मेहनत क्यों न करूं, मैं परीक्षा में अच्छा नहीं कर सकता.मैं इस शिक्षा से बिलकुल ऊब चुका हूं. मैंने इस विषय में पढ़ाई करने का फैसला क्योंकिया? इस भीड़ में मैं अपने को बिलकुल अलग-थलग पाता हूं. 9 अगस्त2011 संगीत सेसुकून मिलता है. जब हर चीज़ बदल जाती है तब भी गीत नहीं बदलते. मेरा अनुमान है किअगर आप अपने दिल की बात कहने की कोशिश करें तो आपकी ज़ुबान बंद हो जाती है. 12मार्च2012 ज़िंदगी उस सिगरेट की तरह है जो एक तरफ से जल रही है. चाहे आप इस पिएं यान पिएं, यह खत्म हो जाने वाली है. इसी तरह ज़िंदगी भी खत्म हो जाती है, चाहे आप इसका मज़ा लें या इसे बीतते हुए देखें. फैसला आपके हाथ में होता है. इसलिए सावधानी सेचुनाव करना चाहिए. वैसे, मैं अच्छा सिगरेट पीने वाला इंसान हूं. 15 अप्रैल 2012मेरे शब्दों में आंतरिक अर्थ होते हैं. मेरे चुप रहने के कई कारण हैं. आखिर मेंहरेक चीज़ का मतलब साफ़ हो जाएगा. मुझ पर भरोसा रखो. 23 फरवरी 2013 तुम अगर अपनेचारों तरफ नज़र दौड़ाओगे तो वैसे लोग दिखाई देंगे जैसे हमारे चारों तरफ़ (गरीब औरबूढ़े लोग- संपादक) दिखाई देते हैं. हमारे पास उन्हें देने के लिए पैसे तो नहींहैं, लेकिन उनके साथ मुस्कुरा कर और गर्म जोशी से मिलने से ही उन्हें खुशी मिलती हैऔर उनकी ज़िंदगी में उम्मीद जगती है. बुज़ुर्गों से बात करो. तुम्हें उनसे सीखने कोमिलेगा. तुम्हारी बात से उनका दिल भी सुकून मिलेगा. बूढ़े लोग मानो अनुभवी बच्चोंकी तरह होते हैं. हमें अपनी क्षमता के मुताबिक उनका खयाल रखना चाहिए. 24 फरवरी 2013हम मानव इतिहास के सबसे बेहूदा वक्त में जी रहे हैं. हम असुरक्षा की भावना से घिरेहुए हैं न कि उत्साह से. हम पैसे से प्रेरित हो रहे हैं, अपनी भावना से नहीं. हमभूल चुके हैं कि हम कैसे ज़िंदगी जीते थे. हमें आज की तुलना में 10 गुणे से भी कमपैसा मिलता था लेकिन हम मस्ती से दोपहर में झपकी ले सकते थे. हम नाम गाम के पीछेनहीं भागते थे. हमें सहानुभूति और ईमानदारी की फिक्र होती थी. हम गलत चीज़ों परसवाल उठाने और उनसे लड़ने से डरते नहीं थे. हमें दूसरों की मदद करने में घबराहटनहीं होती थी, नहीं पैसों के नुकसान से. हम कभी दूसरों से अपनी तुलना नहीं करते थेक्योंकि हम सोचते थे कि हम सभी एक परिवार के सदस्य हैं और हमें लालची होने कीज़रूरत नहीं है. हम अपना खाना, संपत्ति और प्यार लोगों के साथ बांटते थे. हम मेंदेशभक्ति थी लेकिन अंध-देशभक्ति नहीं. हम पर्व त्योहार आपस में मिलने-जुलने के लिएमनाते थे न कि राजनीति के मकसद से या अपनी संख्या का ज़ोर दिखाने के लिए. एक बातसोच लो हम आज क्या कर रहे हैं? क्या हम सचमुच ज़िंदगी जी रहे हैं या बस प्रेतों कीतरह समय बिता रहे हैं? 6 मई 2013 बचपन लाजवाब होता है. हमें (अपने कामों के बारेमें- संपादक) किसी को कोई सफाई नहीं देनी होती. हम दुनिया की किसी भी चीज़ को पानेकी चाहत रख सकते हैं, बिना परवाह किए कि हम उसके लायक हैं या नहीं. छोटी-सी झपकी केबाद हम सब कुछ भुला देते हैं. न कोई निराशा, न अकेलापना न आत्म-आलोचना, न अपने ऊपरकिसी तरह का संदेह. न हमें अपने दिन की योजना बनाने की ज़रूरत होती है और न किसीसमस्या से जूझने की ज़रूरत. बचपन! 13 मई 2013 कभी कभी सोचता हूं कि काश मैं अपनेदिमाग का स्विच बंद कर पाता ताकि ऐसी बातों पर सोचने से बच पाता जिनकी व्याख्याकरना ठीक नहीं होता. मैं सोचता हूं, बहुत ज़्यादा सोचता हूं और यही मेरी एक बड़ीसमस्या है. 25 मई 2013 अपने अंदर के शैतान से तुम आखिरी बार कब मिले थे? वही शैतानजिसे तुम अपने समाज, परिवार, दूसरे लोगों से छिपाने की कोशिश में लगे रहते हो- वहीतुम्हारे अंदर का अपना ही अंधकार पूर्ण, बल शाली और अजीबो गरीब स्वरूप. उसने आखिरीबार कब सामाजिक मर्यादाओं को तोड़कर तुम्हारी सोच और आचरण पर कब्ज़ा कर लिया था?कब? 3 मार्च 2014 मैं अंधकार और प्रकाश, सहानुभूति और ईर्ष्या, अच्छाई औरविद्रूपता, प्यार और उदासीनता दोनों से बना हूं. तुम्हें मुझ से क्या मिलेगा यह इसबात पर निर्भर करता है कि तुम मेरे किस पहलू को छूते हो. 3 जून 2014 चलो, इंतज़ारखत्म हुआ. मैं साइंस, टेक्नोलॉजी एंड सोसाइटी स्टडीज़ में पीएचडी के लिए चुन लियागया हूं. 9 अगस्त 2014 लोग तुम पर बुरी मंशा रखने की तोहमत लगा सकते हैं लेकिन हमेंउनके प्रति फिर भी सहानुभूति की भावना रखनी चाहिए. रहम दिल होना प्रतिभाशाली होनेया सही होने से कहीं बेहतर है. 27 अक्टूबर 2014 हम सितारों की धूल और ओस की बूंदोंसे बने हैं. इस दुनिया में हमें कोई उपलब्धि मिले या न मिले, हम अद्भुत हैं क्योंकिहम साधारण नहीं. 31 जनवरी 2015 (अपने 18 दोस्तों को धन्यवाद देते हुए- संपादक) मेरेजन्मदिन को यादगार और खास बनाने के लिए शुक्रिया मेरे दोस्तों. पिछला साल मेरे लिएबहुत बुरा था. मुझे किसी ने धक्का दे दिया था, मैं गिर पड़ा था. मैं आक्रामक हो गयाथा और बेवजह के झमेलों में फंस गया था. कई बुरे पल गुज़रे. लेकिन इसी ने मुझे यहजानने का मौका भी दिया कि ऐसे वक्त में कौन मेरा साथ देगा और कौन नहीं. जब कभीज़िंदगी ने मेरे साथ नाइंसाफी की, तुम लोगों ने मेरा हौसला बढ़ाया. दोस्ती निभानेऔर मेरा साथ देने के लिए तुम सभी का एकबार फिर शुक्रिया. ‘आश्चर्य चकित होनाआनंददायक होता है, सपने देखना मज़ेदार होता है’ एलेन पो आओ हम साथ मिलकर सपनादेखें. 15 मार्च 2015 मैंने शांत और स्थिर रहने की कोशिश की लेकिन मेरा इतिहास मुझेऐसा नहीं करने देगा. 15 फरवरी 2015 बीयर पीने के बाद पानी का स्वाद हमेशा अद्भुतलगता है.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़िए : सुबह बुआ के पूजाघर में ढेर सारा धुआं मिला, बुआ नहीं मिलीं खुशी मेंआप गाना सुनकर नाचते हैं और दु:ख में उसके बोल समझ आने लगते हैं छात्रसंघ का चुनावजीते थे तो ‘मंटू’ का बनारस में डंका बजता था