रोग नेशन यानी रोग देश. रोग नेशन का मतलब है वो देश जो इंटरनेशनल नियमों को नहींमानता और आतंकवाद को बढ़ाता है. रोग देश का मतलब है वो देश जो अंदर से रोगी हो चुकाहै, आतंकवाद जिसकी खुराक बन गई है. हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में मतलब एक हीहै.पाकिस्तान. दुनिया का एकमात्र देश जो इस्लाम के नाम पर बना. इस्लामिक देशों मेंएकमात्र देश, जिसके पास एटम बम है. जिसकी लोकेशन इतनी महत्त्वपूर्ण है कि हर बड़ादेश वहां अपना एक पैर रखना ही चाहता है. पर इस देश की राजनीति में काई बहुत है.क्योंकि ये देश ही बरसों से जमा किये गये नफरत के कीचड़ पर बना था. तो सबके पैरफिसल जाते हैं. 69 सालों में ये देश खुद ही ढंग से खड़ा नहीं हो पाया है. 2013 मेंपहली बार ऐसा हुआ कि एक चुनी सरकार के जाने के बाद दूसरी चुनी सरकार आ पाई. तीन बारमिलिट्री राज झेलने के बाद इस देश का वजूद इतना कमजोर हो गया है कि जब भी ये अपनेअंदर झांकने की कोशिश करता है तो इसे या तो हिंदुस्तान दिखता है या फिरअफगानिस्तान.आबादी: 20 करोड़ (लगभग यूपी के बराबर, दुनिया में छठे नंबर पर) भाषा: पंजाबी (सबसेज्यादा), पश्तो, सिंधी, उर्दू, कश्मीरी एथनिक ग्रुप: पंजाबी (44%) पश्तून (15%),सिंधी (14%), सरियाकी (8%), मोहाजिर (7.5%), बलोची (3.5%) धर्म: इस्लाम (96%)पूर्व में इंडिया, पश्चिम में अफगानिस्तान जिसकी एक पतली पट्टी छोड़ दें तोताजिकिस्तान से भी जुड़ा है, साउथ-वेस्ट में ईरान, और नॉर्थ-ईस्ट मेंचीन. पाकिस्तान- पंजाब से P, अफगानिस्तान से A, कश्मीर से K, सिंध से S ,बलूचिस्तान से TAN.चार प्रोविंस हैं-बलोचिस्तान (राजधानी-क्वेटा, आबादी-1.3 करोड़), पंजाब (राजधानी-लाहौर, आबादी-9.1करोड़), सिंध (राजधानी-कराची, आबादी-5.5 करोड़), खैबर पख्तूनख्वा (राजधानी-पेशावर,आबादी-2.7 करोड़)वहां के केंद्र शासित प्रदेश- FATA (Federally Administered Tribal Areas), राजधानी- पेशावर, आबादी-39 लाखइस्लामाबाद कैपिटल टेरिटरी, राजधानी- इस्लामाबाद, आबादी- 11 लाखऑटोनोमस टेरिटरीआजाद जम्मू और कश्मीर, राजधानी- मुजफ्फराबाद, आबादी- 30 लाख गिलगिट बाल्टिस्तान,राजधानी- गिलगिट, आबादी- 14 लाखपाकिस्तानकैसे इस्लाम के नाम पर बने देश ने आतंकवाद को पालने तक का सफर तय किया:1.आजादी के बाद पाकिस्तान ब्रिटिश यूनियन का डोमिनियन स्टेट बनकर रहा था. 1956 मेंइस्लामिक स्टेट बनने से पहले पाकिस्तान ब्रिटेन की रानी के अंडर आता था. और भारतछोड़ो आंदोलन इसी बात पर हुआ था कि अंग्रेज भारत को डोमिनियन स्टेट का दर्जा दे रहेथे. भारत के नेताओं को ये मंजूर नहीं था. पूरी आजादी चाहिये थी.मुहम्मद अली जिन्ना2.मौलाना शब्बीर अहमद उस्मानी और मौलाना मदूदी ने पाकिस्तान बनने के साथ ही जोर लगानाशुरू कर दिया कि देश में शरिया कानून लगाया जाये. क्योंकि देश ही इस्लाम के नाम परबना था. जब तक मुहम्मद अली जिन्ना थे, तब तक ये मांग उतनी मजबूत नहीं थी. उन्होंनेवादा भी किया था कि देश में सबको जगह मिलेगी. पर मार्च 1949 में एक ऑब्जेक्टिवरिजॉलूशन पास हुआ शरिया को लेकर. बाद में जब संविधान बना तो इसी को प्रस्तावना कीतरह रखा गया.जिन्ना की मौत3.प्रधानमंत्री लियाकत अली खान बड़ी असुरक्षा में देश चला रहे थे. भ्रष्टाचार रोकनेके लिये कानून भी बनाया. पर इसका बड़ा मिसयूज हुआ. लोगों ने नेताओं को फंसाना शुरूकर दिया. लियाकत पर आरोप लगा कि वो अपने दुश्मनों को साध रहे हैं इसी बहाने. फिरउनकी हत्या हो गई. 1956 में मिलिट्री जनरल अयूब खान ने सत्ता अपने हाथ में ले ली.1958 में एक रैली में फोटो खींचती एक लड़की 4.उसके बाद पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था बहुत तेजी से बढ़ी. पर अयूब खान ने एक गलती करदी. 1965 में भारत से लड़ाई कर ली और फिर अर्थव्यवस्था लुढ़क गई. अयूब पर इतने आरोपलगे कि उन्होंने याह्या खान को सत्ता सौंप दी.पाकिस्तान के फौजी अजीज भट्टी ने अपना सामान इस तरह रखा और तुरंत ही भारतीय फौज केहाथ मारे गये 1965 की लड़ाई में: Dawn5.फिर 1970 में पाकिस्तान में पहली बार लोकतांत्रिक चुनाव हुये. इरादा था कि मिलिट्रीसे डेमोक्रेसी हो जाये. पर हुआ नहीं. क्योंकि ईस्ट पाकिस्तान की अवामी लीग ने सबसेज्यादा सीटें जीत ली थीं. ये याह्या खान को मंजूर नहीं था. सत्ता देने से मना करदिया. ईस्ट पाकिस्तान में आजादी के पहले से ही बंगाली नेशनलिज्म फैल रहा था. अबविद्रोह हो गया. 1971 में ईस्ट पाकिस्तान बांग्लादेश के नाम से नया देश बन गया. इसीसमय पाकिस्तान के 90 हजार सैनिकों को भारत के सामने सरेंडर करना पड़ा था.90 हजार सैनिकों की रिहाई के लिये पाकिस्तान सरकार ने डाक टिकट निकाला था6.जुल्फिकार अली भुट्टो (लेफ्ट) ने खुद जिया उल हक (राइट) को चुना थाइसके बाद याह्या खान की जगह पर जुल्फिकार अली भुट्टो प्रेसिडेंट बने. देश में एकनया माहौल बना. एकदम से सोशलिस्ट विचारधारा आने लगी. प्रगति होने लगी. भारत के एटमबम बनाने की बात सुन कर पाकिस्तान में भी रिसर्च होने लगा. लगा डेमोक्रेसी आ ही गईहै. पर ऐसा हुआ नहीं. 1977 में मिलिट्री जनरल जिया-उल-हक ने तख्तापलट कर दिया.जुल्फिकार की फांसी के बाद रोती उनकी बीवी7.जिया ने अपने मिलिट्री रूल को सही साबित करने के लिये शरिया को कानून में घुसादिया. इसके साथ ही देश में इकॉनमिक सुधार शुरू कर दिये. फिर अमेरिका की शह परअफगानिस्तान में सोवियत रूस को रोकने के लिये पाकिस्तान में मुजाहिदीन ट्रेनिंग दीजाने लगी. यहीं से पाकिस्तान का रिश्ता आतंकवाद से जुड़ा. इसी समय कश्मीर में भीआतंकवाद शुरू हुआ.एंटी-जिया प्रोटेस्ट में मार खाती लड़की8.1988 में एक प्लेन क्रैश में जिया की मौत हो गई. और बेनजीर भुट्टो पाकिस्तान कीप्रधानमंत्री बनीं. तानाशाही, आतंकवाद और शरिया से जूझते देश में महिलाप्रधानमंत्री. इसके साथ ही देश में एक और नेता उभरा. नवाज शरीफ. फिर दोनों नेताओंमें देश की राजनीति बंटती रही. दस साल तक. पर इस दौरान अर्थव्यवस्था चरमरा गई.मिलिट्री शासन के ठीक उलट. इसके अलावा नेताओं पर भ्रष्टाचार के कई आरोप लगे. इसकेबीच उनको भारत के साथ टेंशन बढ़ाने में सुकून मिलता था. जनता को संदेश जाता कि कुछतो कर ही रहे हैं.पत्रकारों की पिटाई9.फिर पैसे से जूझते देश ने 1998 में एटम बम फोड़ लिया. अमेरिका ने पाकिस्तान पर कईप्रतिबंध लगा दिये. पर भारत के साथ टेंशन बढ़ता रहा. पाकिस्तानी सेना ने करगिल मेंघुसपैठ शुरू कर दी. फिर 1999 में भारत-पाक की लड़ाई हो गई. जिसमें पाक की हार हुई.1948, 1965, 1971 के बाद 1999 में ये चौथी हार थी. जबकि ये क्रिकेट नहीं, जंग थी.फिर भी बार-बार होती रही.करगिल के नायक कैप्टन विक्रम बत्रा10.1999 में ही मिलिट्री जनरल परवेज मुशर्रफ ने नवाज शरीफ से सत्ता हड़प ली. उसके बाददेश फिर से नये रास्ते चल पड़ा. अमेरिका के साथ अफगानिस्तान में आतंकवाद के खिलाफलड़ने लगा. और भारत में आतंकवाद के साथ. ऐसे ही चलता रहा. फिर 2007 में चुनाव हुये.चुनाव प्रचार के दौरान ही बेनजीर भुट्टो की हत्या हो गई थी. सहानुभूति में उनकीपार्टी को जीत हासिल हुई. उनके पति आसिफ अली जरदारी प्रेसिडेंट बने. यूसुफ रजागिलानी प्रधानमंत्री बने.1999 का तख्तापलट11.पर जुडिशियरी के साथ पंगे होने के चलते यूसुफ रजा गिलानी को 2012 में पद छोड़नापड़ा. 2013 में फिर चुनाव हुये. अबकी नवाज शरीफ की पार्टी को जीत हासिल हुई. 14 सालके बाद ये फिर प्रधानमंत्री बने. तब से ये पाकिस्तान को झेल रहे हैं और पाकिस्तानइनको.नवाज शरीफपाकिस्तान में सक्रिय मुख्य आतंकवादी ग्रुप्स:1. तालिबानये सुन्नी मुस्लिम ग्रुप है, जो वहाबी और देवबंदी विचारधारा से चलता है. इनकाज्यादा पैसा ड्रग और अरब देशों से आता है. ये लोग इस्लाम के नाम पर सबको भड़कातेहैं. पाकिस्तान की एजेंसी आईएसआई पर इल्जाम लगता है इनकी मदद करने का. ये लोगअफगानिस्तान में काम करते हैं.तालिबान2. तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तानये पाकिस्तानी तालिबान है. इसको बैतुल्ला मसूद ने शुरू किया था. ये लोग भीअफगानिस्तानी तालिबान के पश्तून समुदाय से आते हैं. इनका इरादा है पाकिस्तान कीसरकार को उखाड़ फेंकना और इस्लामी राज लाना. यही वो ग्रुप है, जिसने पेशावर केस्कूल में ब्लास्ट किया था.ब्लास्ट के बाद का सीन3. लश्कर-ए-तैय्यबाइस ग्रुप को हाफिज सईज ने बनाया था. इसी ग्रुप ने मुंबई में हमला किया था. कश्मीरमें इन लोगों ने बहुत आतंकवाद फैलाया है. आईएसआई इस ग्रुप को सपोर्ट करती है.इसी होटल ताज पर हमला हुआ था4. लश्कर-ए-जांघवीये सुन्नी देवबंदी ग्रुप है. इसी ग्रुप ने डेनियल पर्ल को मारा था. जब मुशर्रफ नेइनको बैन कर दिया था, तो ये लोग अफगानिस्तान भाग गये. अब इनका पाकिस्तान आना-जानालगा रहता है.डेनियल पर्ल5. अल-कायदाये लादेन और जवाहिरी का ग्रुप है. लादेन के मरने के बाद ये अब कमजोर पड़ गया था. परइरादे कमजोर नहीं हैं. अभी भी तमन्ना है कि पूरी दुनिया में इस्लाम का राज हो.पाकिस्तान में लादेन का घर6. हिज्ब-ए-गुलबुद्दीनकाबुल का कसाई हिकमतियार गुलबुद्दीन अफगानिस्तान से भागकर पाकिस्तान आ गया था.तालिबान से इनका झगड़ा है. अब जा के अफगानिस्तान की सरकार से इनका समझौता हुआ है.गुलबुद्दीन हिकमतियार7. जैश-ए-मुहम्मदमुहम्मद की सेना. कंधार कांड में छोड़े गये आतंकी मसूद अजहर का बनाया ग्रुप है. इसीको बैन करवाने के लिये भारत कोशिश कर रहा है. और चीन इसे नहीं करने दे रहा है.मसूद अजहर8. हरकत-उल-मुजाहिदीनडॉक्टर बदर मुनीर ने इसको शुरू किया था. ये कश्मीरी ग्रुप है. जो पाकिस्तान की शहपर चल रहा है.होटल मैरियट ब्लास्ट9. हक्कानी ग्रुपये एक ट्राइबल ग्रुप है. जलालुद्दीन हक्कानी और उसका बेटा सिराजुद्दीन हक्कानी इसेचलाते हैं. इनका बहुत बड़ा ग्रुप नहीं है, पर पहुंच बहुत है.2007 लाल मस्जिद में सैनिक कार्रवाई के बाद विरोधपर इसका मतलब ये नहीं है कि पाकिस्तान में इतने ही आतंकवादी संगठन हैं. बहुत हैं.हाल के समय में इस बात को लेकर अमेरिका ने पाकिस्तान पर बहुत दबाव बनाया है. तोपाकिस्तान की आर्मी ने पाकिस्तानी तालिबान को अपना टारगेट बनाना शुरू कर दिया.आतंकवादियों के खिलाफ पाक आर्मी का ऑपरेशन जर्ब-ए-अज्बइसमें भी हर आतंकवादी ग्रुप के साथ अलग-अलग व्यवहार किया जाता है. इसी चक्कर मेंआतंकवादियों ने पाकिस्तान में ही बम ब्लास्ट करना शुरू कर दिया. पाकिस्तान के हिसाबही उनके 68 बिलियन डॉलर खर्च हुये हैं आतंकवाद से लड़ाई के नाम पर. हजारों लोग मरेहैं. लाखों लोग घर छोड़-छाड़कर भागे हैं. अब आतंकवादियों ने पाकिस्तानी सरकार कोउखाड़ फेंकने का मन बना लिया है. अमेरिका, अफगानिस्तान, भारत, चीन, आर्मी, आतंकवादऔर ड्रग से जूझता पाकिस्तान आज काई पर खड़ा है. जहां से ये ना तो आगे जा पा रहा है,ना ही पीछे. बस फिसल रहा है.फोटो क्रेडिट- डॉन--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें:कोई कहे कि हमने पाकिस्तान में घुसकर मारा है, तो उस पर यकीन मत करनाघर बैठे अगर इंडिया ये काम कर दे तो पाकिस्तान तिलमिला जायेगाउड़ी हमले का बदला दिला सकता है 'काबुल का कसाई' गुलबुद्दीन हिकमतियारवो कमीना जिसके हुकुम पर लाखों हिंदुस्तानी मारे गएहवा में मरा DU का लड़का, जिसके नाम पर पाकिस्तान की पेशाब रुक जाती थीनरेन्द्र मोदी का सन्देश: कश्मीर का राग छोड़ो, तुम दे के रहोगे बलूचिस्तानभारत विभाजन के 5 गुनहगारदिल्ली में 22 हज़ार मुसलमानों को एक ही दिन फांसी पर लटका दिया गया!