मेसी-रोनाल्डो को धकेलकर बेस्ट फुटबॉलर कैसे बने रॉबर्ट लेवांडोव्स्की?
कहानी विदेश में फुटबॉल खेलने के लिए ही पैदा हुए 'मशीन' की.
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Fifa The Best Awards में Robert Lewandowski ने Cristiano Ronaldo और Lionel Messi को पछाड़ दिया (एपी फोटो)
दुनिया में दो तरह के फुटबॉलर होते हैं. पहले, जिनमें टैलेंट भरा होता है और दूसरे जो सबकुछ कड़ी मेहनत से हासिल करते हैं. ऐसा नहीं है कि टैलेंटेड लोगों को मेहनत नहीं करनी पड़ती, लेकिन उन्हें नेचुरल टैलेंट का फायदा तो मिलता ही है. पहली कैटेगरी में आप डिएगो माराडोना, रोनाल्डीनियो और लियोनल मेसी जैसे दिग्गजों को रख सकते हैं. दूसरी कैटेगरी में क्रिस्टियानो रोनाल्डो, ज़्लाटन इब्राहिमोविच और रॉबर्ट लेवांडोव्स्की को रखा जा सकता है.
रॉबर्ट लेवांडोव्स्की, जिन्हें साथी 'द बॉडी' और पार्टनर अन्ना 'मशीन' बुलाती हैं. लेवांडोव्स्की को गुरुवार, 17 दिसंबर को साल का बेस्ट फुटबॉलर चुना गया है. यह अवॉर्ड फीफा देती है. फीफा यानि दुनियाभर की फुटबॉल की माई-बाप संस्था. हर साल दिए जाने वाले इस अवॉर्ड की रेस में क्रिस्टियानो रोनाल्डो और लियोनल मेसी भी थे. रॉबर्ट ने इन दोनों को पीछे छोड़कर यह अवॉर्ड अपने नाम किया.
फुटबॉल को क़रीब से ना फॉलो करने वालों के लिए यह आश्चर्य की बात होगी. कोई रोनाल्डो और मेसी को कैसे पछाड़ सकता है? अगर ये सवाल आपके भी दिमाग में है तो चलिए, शुरू करते हैं.
# कमी, बॉडी की
रॉबर्ट लेवांडोव्स्की. यूरोप के एक देश, पोलैंड से आते हैं. पोलैंड के लोगों के नाम बड़े अटपटे से होते हैं. और ये हम किसी अपमान की भावना से नहीं कह रहे. पोलैंड से बाहर के लोगों के लिए उनके नामों का उच्चारण करना आसान नहीं होता है. तो इस देश की राजधानी वरसाव में 21 अगस्त 1988 को रॉबर्ट का जन्म हुआ. जन्म से पहले ही रॉबर्ट के पिता सिस्टफ़ ने उनका भविष्य सोच लिया था. तभी कोई कड़क पोलिश नाम ना रखते हुए उन्होंने अपने बेटे का नाम रखा- रॉबर्ट. जिससे वह भविष्य में विदेश में आसानी से फुटबॉल खेल सकें. जी हां, लिट्रली यही वजह थी. लेकिन सिर्फ नाम से क्या ही होता है. रॉबर्ट के पास टैलेंट तो था, लेकिन बॉडी नहीं थी. इस बारे में रॉबर्ट ने एक इंटरव्यू में कहा था,'अंडर-15 नेशनल टीम के कोच ने मुझसे कहा था, 'मुझे माफ करना, लेकिन तुम नेशनल टीम में खेलने के लिए बहुत दुबले-पतले हो.'जब रॉबर्ट 17 साल के थे, पोलैंड के ट्रेडिशनल क्लब, लेगिया वरसाव ने उन्हें टीम से निकाल फेंका. यही रॉबर्ट के करियर का टर्निंग पॉइंट था. रॉबर्ट बताते हैं,
'मैंने अपना वजन बढ़ाने पर ज्यादा ध्यान देना शुरू किया. मसल बढ़ाने पर मेहनत शुरू की. इससे काफी मदद मिली.'
इसके बाद रॉबर्ट ने साल 2007-08 में पोलैंड की थर्ड डिविजन फुटबॉल लीग के जरिए कंपटिटिव फुटबॉल में वापसी की. साल 2010 में वह पोलिश फर्स्ट डिविजन में थे. यूरोप के तमाम क्लब उन्हें साइन करने की रेस में थे. इनमें एक इंग्लिश क्लब, ब्लैकबर्न रोवर्स भी था. बताते हैं कि रॉबर्ट लगभग ब्लैकबर्न से जुड़ ही गए थे. लेकिन तभी आइसलैंड में एक ज्वालामुखी विस्फोट हुआ. यूनाइटेड किंगडम जाने वाली सारी फ्लाइट्स रद हो गईं. इसके साथ ही रॉबर्ट का ट्रांसफर भी नहीं हो पाया.UCL Winner UCL Top Scorer (15 goals) UCL Forward of the Season ⚽️ UEFA Men's Player of the Year
...and now FIFA The Best Men's Player! Take a bow, Robert Lewandowski! ⭐️ https://t.co/7bPIQ73EcL pic.twitter.com/wrrxqFmgZ9 — UEFA Champions League (@ChampionsLeague) December 17, 2020
# बॉडी ही बन गए
बाद में इसी साल वह जर्मनी के क्लब, बोरुशिया डॉर्टमंड से जुड़ गए. यहां नाम कमाने के बाद साल 2014 में रॉबर्ट जर्मनी के सबसे बड़े क्लब बायर्न म्यूनिख से जुड़ गए. डॉर्टमंड में वर्ल्ड क्लास बने रॉबर्ट, म्यूनिख में और बेहतर हुए. उन्हें बेहतर बनाए रखने में उनकी पत्नी अन्ना लेवांडोव्स्का का बड़ा रोल है. पूर्व कराटे चैंपियन अन्ना ही रॉबर्ट की पर्सनल ट्रेनर और न्यूट्रीशियन हैं. अन्ना की देखरेख में रॉबर्ट की फिटनेस गज़ब की है. इस बारे में बायर्न के CEO कार्ल हाइंज़ रुम्मेनिगे ने एक इंटरव्यू में कहा था,'हमारे ड्रेसिंग रूम में लेवांडोव्स्की जैसी बॉडी किसी की नहीं है.'रॉबर्ट ने इस बारे में एक बार कहा था,
'मैं खुशनसीब हूं कि मेरी बीवी एक न्यूट्रीशियन है. उसे पता है कि मैं क्या खाता हूं और मुझे कौन सी विटामिन लेनी चाहिए.'लेवांडोव्स्की व्यक्तिगत जीवन में बहुत कड़े नियम फॉलो करते हैं. वह खाने से पहले डेजर्ट लेते हैं क्योंकि यह फैट घटाने में सहायक है. रॉबर्ट स्लीप थेरेपिस्ट की सलाह के मुताबिक ही सोते हैं. सोने के वक्त उनके बेडरूम में रौशनी का एक कतरा नहीं होता. साथ ही उनकी सोने की पोजीशन भी थेरेपिस्ट ने ही तय की है.
कभी अपने कमजोर शरीर के लिए ताने सुनने वाले रॉबर्ट लेवांडोव्स्की ने ना सिर्फ अपनी बॉडी बनाई, बल्कि दुनिया के बेस्ट फुटबॉलर की रेस में दो एलियंस (मेसी-रोनाल्डो यही कहे जाते हैं) को पीछे भी छोड़ा. रॉबर्ट की बीवी अन्ना उन्हें मशीन बुलाती हैं. क्योंकि रॉबर्ट एक मशीन की तरह अपने लक्ष्य के रास्ते में किसी को नहीं आने देते. आंकड़े देखें तो रॉबर्ट का यह निकनेम उनके फुटबॉल करियर पर भी सटीक है. जर्मन लीग, बुंदसलिगा में रॉबर्ट सिर्फ 332 मैचों में 250 गोल मार चुके हैं. वह ऐसा करने वाले सिर्फ तीसरे और पहले विदेशी फुटबॉलर हैं. उन्होंने डॉर्टमंड के लिए 74 और बायर्न के लिए 176 गोल्स किए हैं.He's done it! @lewy_official overcomes two of the greatest players in history to become #TheBest FIFA Men's Player for the first time!
@FCBayern | @LaczyNasPilka pic.twitter.com/TK34hTXcsS — FIFA.com (@FIFAcom) December 17, 2020

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