ओलंपियन, जिसने 54 सालों में मैराथन दौड़ पूरी की
सन 1912 में पहली बार ओलंपिक में पार्टिसिपेट किया था जापान ने. यहां के एक खिलाड़ी ने इतिहास रचने में आधी उम्र निकाल दी.
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फोटो - thelallantop
खेलों की दुनिया का महाकुम्भ है ओलंपिक. रियो ओलंपिक गेम्स 5 अगस्त से शुरू होने हैं. अब मार्केट में ओलंपिक के किस्से भी खूब आ गए हैं. ऐसा एक पुराना किस्सा है. एक देश ने पहली बार ओलंपिक में भाग लिया. और पहली बार में ही उसका एक खिलाड़ी कांड करके आ गया.
कहानी है 1912 के स्टॉकहोम ओलंपिक की. उसमें जापान ने पहली बार भाग लिया. और तो और जापान उस टाइम पहला एशियाई देश था जिसने ओलंपिक में पार्टिसिपेट किया. इसमें जापान की ओर से 2 खिलाड़ियों ने भाग लिया था. दोनों को एक भी मेडल नहीं मिला. लेकिन उनमें से एक खिलाड़ी ने पूरे 54 साल बाद अपनी रेस पूरी करने का रिकॉर्ड बनाया.
एथलीट का नाम है कानाकुरी शिजो. शिजो जापान की ओर से मैराथन दौड़ने गए थे. और उस दौड़ को कंप्लीट करने में 54 साल ले लिए.
हुआ ऐसा कि मैराथन के दौरान उन्हें प्यास लगी. तो बिजुरिया रेस बीच में ही छोड़ के पास के एक घर में घुस गए पानी पीने. प्यास बुझी तो घर की याद सताने लगी. रेस को कहा टाटा बाय और ट्रेन पकड़कर जापान पहुंच गए. इस बात को 54 साल बीत गए तब स्वीडन के अधिकारियों ने उन्हें वापस बुलाया और रेस पूरी करने का न्यौता दिया. कानाकुरी 1967 में वापस स्टॉकहोम गए. उस रेस को पूरा करने जो उन्होंने 1912 में अधूरी छोड़ दी थी. और इस तरह से कानाकुरी ने अपनी दौड़ 54 साल, 8 महीने, 32 मिनट और 20.3 सेकेंड में पूरी की.
कानाकुरी को 'फादर ऑफ जापानीज़ मैराथन' कहा जाता है.
ये स्टोरी रमन जायसवाल ने लिखी है.

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