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भारत में 3 पासपोर्ट रख सकते हैं क्या? हिमंता की पत्नी पर लगा आरोप, जानिए दोहरी नागरिकता और OCI का पूरा सच

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुयान सरमा के पासपोर्ट विवाद के बीच जानिए क्या कहता है भारत का पासपोर्ट एक्ट 1967. क्या कोई भारतीय रख सकता है दो-तीन देशों की नागरिकता?

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8 अप्रैल 2026 (पब्लिश्ड: 02:30 PM IST)
Riniki Bhuyan Sarma Passport
रिनिकी भुयान पासपोर्ट विवाद: क्या भारत में रख सकते हैं 3 देशों के पासपोर्ट?
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हाल के दिनों में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुयान सरमा के पासपोर्ट को लेकर जो विवाद उठा है उसने न सिर्फ राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है बल्कि आम भारतीय के मन में भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं. विपक्ष का आरोप है कि रिनिकी के पास एक नहीं बल्कि तीन देशों के पासपोर्ट हैं. दूसरी ओर मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे फर्जी बताया है और कानूनी कार्रवाई की बात कही है.

लेकिन इस पूरे मामले ने एक ऐसी बहस को छेड़ दिया है जो हर उस हिंदुस्तानी के लिए जरूरी है जो विदेश जाने या वहां बसने का सपना देखता है. क्या एक भारतीय नागरिक के पास दो या तीन पासपोर्ट हो सकते हैं. क्या भारत में 'डुअल सिटीजनशिप' यानी दोहरी नागरिकता का कोई प्रावधान है. और अगर कोई चोरी-छिपे ऐसा करता है तो भारतीय कानून उसके साथ क्या सुलूक करता है. आज के इस मेगा एक्सप्लेनर में हम इन्हीं पेचीदा सवालों के जवाब बहुत आसान भाषा में समझेंगे.

क्या वाकई कोई भारतीय रख सकता है दो देशों का पासपोर्ट

सबसे पहले उस बुनियादी सवाल पर आते हैं जो इस पूरे विवाद की जड़ है. भारत का संविधान और यहां का नागरिकता कानून बहुत स्पष्ट है. भारत में 'Single Citizenship' यानी एकल नागरिकता का नियम चलता है. इसका सीधा मतलब यह है कि अगर आप भारत के नागरिक हैं तो आप किसी और देश के नागरिक नहीं हो सकते. और अगर आप किसी और देश की नागरिकता लेते हैं तो आपकी भारतीय नागरिकता उसी पल खत्म मान ली जाती है.

अब बात पासपोर्ट की. पासपोर्ट सिर्फ एक ट्रैवल डॉक्यूमेंट नहीं है बल्कि यह आपकी नागरिकता का सबसे बड़ा प्रमाण है. भारतीय पासपोर्ट एक्ट 1967 के मुताबिक एक भारतीय नागरिक एक समय में केवल एक ही वैध साधारण पासपोर्ट रख सकता है. अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर दूसरा पासपोर्ट बनवाता है या किसी विदेशी पासपोर्ट को छिपाकर भारतीय पासपोर्ट का इस्तेमाल करता है तो यह एक गंभीर दंडनीय अपराध है. इसके लिए जेल और भारी जुर्माने दोनों का प्रावधान है.

रिनिकी भुयान सरमा वाला पूरा विवाद क्या है.

इस कहानी की शुरुआत हुई कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस से. खेड़ा ने आरोप लगाया कि रिनिकी भुयान सरमा के पास यूएई (UAE), एंटीगुआ एंड बारबुडा और मिस्र (Egypt) के पासपोर्ट हैं. उन्होंने कुछ दस्तावेज भी दिखाए और दावा किया कि मुख्यमंत्री ने अपने चुनावी हलफनामे में अपनी पत्नी की इन संपत्तियों और विदेशी पहचान को छिपाया है. कांग्रेस का तर्क है कि अगर यह सच है तो यह सीधे तौर पर भारतीय कानून का उल्लंघन है.

इस पर पलटवार करते हुए हिमंत बिस्वा सरमा ने इन दस्तावेजों को 'फोटोशॉप्ड' और फर्जी बताया. उन्होंने दावा किया कि ये तस्वीरें सोशल मीडिया पर मौजूद किसी पाकिस्तानी ग्रुप से ली गई हैं और इनमें नाम की स्पेलिंग से लेकर फोटो तक सब कुछ गलत है. रिनिकी भुयान सरमा ने इस मामले में एफआईआर (FIR) भी दर्ज कराई है. मामला अब अदालती लड़ाई की ओर बढ़ रहा है लेकिन इसने लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या वाकई सिस्टम में ऐसी कोई सेंध लगाई जा सकती है.

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दोहरी नागरिकता और ओसीआई (OCI) के बीच का बारीक फर्क

अक्सर लोग ओसीआई यानी 'Overseas Citizen of India' कार्ड को ही दोहरी नागरिकता समझ लेते हैं लेकिन यह पूरी तरह सच नहीं है. भारत सरकार विदेशी मूल के भारतीय लोगों को ओसीआई कार्ड देती है जो एक तरह का लाइफटाइम वीजा है. इससे आप भारत में रह सकते हैं, काम कर सकते हैं और जमीन (खेती वाली छोड़कर) खरीद सकते हैं. लेकिन ओसीआई कार्ड धारक के पास भारत में वोट डालने का अधिकार नहीं होता और न ही वह कोई सरकारी पद संभाल सकता है.

सबसे जरूरी बात यह है कि ओसीआई कार्ड मिलने का मतलब यह नहीं है कि आपके पास भारत का पासपोर्ट है. ओसीआई कार्ड धारक के पास उसी देश का पासपोर्ट होता है जिसकी उसने नागरिकता ली है. उदाहरण के लिए अगर कोई भारतीय मूल का व्यक्ति अमेरिका का नागरिक बन गया है तो उसके पास अमेरिकी पासपोर्ट होगा और साथ में भारत का ओसीआई कार्ड. उसके पास भारतीय पासपोर्ट नहीं हो सकता. भारत में 'Dual Passport' जैसी कोई चीज कानूनी तौर पर अस्तित्व में नहीं है.

पासपोर्ट एक्ट 1967: नियम तोड़ने पर कितनी सजा

अगर कोई भारतीय नागरिक अपनी विदेशी नागरिकता छिपाता है और भारतीय पासपोर्ट का इस्तेमाल जारी रखता है तो पासपोर्ट एक्ट की धारा 12 के तहत उस पर कार्रवाई होती है. इसमें कम से कम एक साल और अधिकतम पांच साल तक की जेल हो सकती है. साथ ही 50,000 रुपये तक का जुर्माना भी लग सकता है. पासपोर्ट अथॉरिटी ऐसे व्यक्ति का पासपोर्ट तुरंत जब्त (Impound) कर सकती है और उसे ब्लैकलिस्ट भी किया जा सकता है.

गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के पास ऐसे कई मामले आते हैं जहां लोग विदेश में पीआर (Permanent Residency) मिलने के बाद भी भारतीय पासपोर्ट नहीं सरेंडर करते. सरकार अब इस पर बहुत सख्त है. इमिग्रेशन चेक और डिजिटल डेटाबेस के जरिए अब ऐसी चोरियों को पकड़ना आसान हो गया है. अगर कोई पकड़ा जाता है तो उसे न सिर्फ भारत में कानूनी कार्रवाई झेलनी पड़ती है बल्कि संबंधित देश भी उसे डिपोर्ट (Deport) कर सकता है.

गोल्डन वीजा और विदेशी पासपोर्ट का 'शॉर्टकट'

विवाद में यूएई के 'गोल्डन कार्ड' का भी जिक्र आया. असल में दुनिया के कई देश निवेश के बदले रेजिडेंसी या नागरिकता देते हैं. इसे 'Citizenship by Investment' कहा जाता है. एंटीगुआ, सेंट किट्स और डोमिनिका जैसे कैरेबियाई देश मोटी रकम के बदले अपना पासपोर्ट दे देते हैं. कई अमीर भारतीय टैक्स बचाने या आसान इंटरनेशनल ट्रैवल के लिए इन देशों के पासपोर्ट की तरफ आकर्षित होते हैं.

लेकिन पेंच वही है: जैसे ही आप इन देशों का पासपोर्ट लेते हैं, आपका भारतीय पासपोर्ट अवैध हो जाता है. यूएई का गोल्डन वीजा सिर्फ एक लंबी अवधि का रेजिडेंसी परमिट है, वह नागरिकता या पासपोर्ट नहीं है. इसलिए अगर किसी के पास सिर्फ गोल्डन वीजा है तो वह भारतीय पासपोर्ट रख सकता है. लेकिन अगर उसने वहां का पासपोर्ट ले लिया तो उसे भारतीय पहचान छोड़नी होगी.

मिडिल क्लास और आम आदमी पर इसका क्या असर है.

शायद आपको लगे कि यह तो अमीरों और नेताओं की लड़ाई है, हमें क्या फर्क पड़ता है. लेकिन यकीन मानिए, इसके नियम आपके लिए भी उतने ही कड़े हैं. आज के दौर में बहुत सारे मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चे पढ़ाई या नौकरी के लिए विदेश जा रहे हैं. वहां सेटल होने के दौरान कई बार लोग अनजाने में या थोड़े से लालच में दोनों देशों के फायदे उठाना चाहते हैं.

याद रखिए, भारत सरकार अब डेटा शेयरिंग को लेकर बहुत सक्रिय है. अगर आपने विदेशी नागरिकता लेने के बाद भारतीय पासपोर्ट का इस्तेमाल एक बार भी ट्रैवल के लिए किया तो आप पर 'Illegal Stay' और 'Passport Fraud' का केस बन सकता है. यह आपकी पूरी करियर प्रोफाइल को खराब कर सकता है. इसलिए जैसे ही विदेशी नागरिकता मिले, 90 दिनों के भीतर भारतीय पासपोर्ट सरेंडर करना और 'Renunciation Certificate' लेना सबसे सुरक्षित रास्ता है.

भविष्य की राह: क्या भारत कभी दोहरी नागरिकता देगा.

लंबे समय से प्रवासी भारतीयों (NRIs) की यह मांग रही है कि भारत को भी अमेरिका या यूके की तरह दोहरी नागरिकता की अनुमति देनी चाहिए. तर्क यह दिया जाता है कि इससे विदेशों में बैठे टैलेंट और पैसे का भारत में आना आसान होगा. नीति आयोग और कई हाई-लेवल कमेटियों में इस पर चर्चा भी हुई है.

सुरक्षा कारणों और संवैधानिक जटिलताओं की वजह से सरकार फिलहाल इसके पक्ष में नहीं दिखती. भारत की आंतरिक सुरक्षा और संवेदनशील पड़ोस को देखते हुए 'सिंगल सिटीजनशिप' को ही सबसे सुरक्षित माना जाता है. फिलहाल सरकार का पूरा जोर ओसीआई (OCI) कार्ड के फायदों को बढ़ाने पर है ताकि बिना नागरिकता दिए भी प्रवासियों को घर जैसा अहसास कराया जा सके.

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नियम सबके लिए एक हैं

रिनिकी भुयान सरमा का मामला अभी जांच के घेरे में है और जब तक आरोप साबित नहीं होते तब तक कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी. लेकिन एक बात पत्थर की लकीर है: भारत का कानून किसी को भी एक साथ दो या तीन पासपोर्ट रखने की इजाजत नहीं देता. चाहे वह मुख्यमंत्री की पत्नी हो या कोई आम नागरिक, पासपोर्ट के नियम सबके लिए बराबर हैं.

अगर आप या आपका कोई जानने वाला विदेश में बसने की सोच रहा है तो नियमों की पूरी जानकारी रखें. शॉर्टकट हमेशा महंगे पड़ते हैं. पासपोर्ट और नागरिकता जैसे संवेदनशील विषयों पर पारदर्शिता ही सबसे अच्छा बचाव है. अफवाहों और सोशल मीडिया की आधी-अधूरी जानकारियों के बजाय हमेशा आधिकारिक सरकारी पोर्टल्स की मदद लें.

वीडियो: हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी पर पवन खेड़ा ने क्या आरोप लगाए? पुलिस घर पहुंच गई

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