The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • Lallankhas
  • Remembering veteran actor Mac Mohan, who played Sambha in Sholay, on his death anniversary

'शोले' का वो विलेन, जिसने सिर्फ तीन शब्द बोले और अमर हो गया

सांभा को न जानता हो ऐसा कोई मुश्किल ही सिनेमाप्रेमी होगा भारत में.

Advertisement
Img The Lallantop
मैक मोहन शोले में अपने रोल के लिए सबसे ज्यादा मशहूर हुए.
pic
लल्लनटॉप
24 अप्रैल 2021 (अपडेटेड: 23 अप्रैल 2021, 03:31 AM IST)
font-size
Small
Medium
Large
font-size
Small
Medium
Large
whatsapp share
Embed
आप समझ ही गए होंगे कि हम किसकी बात कर रहे हैं. असली नाम मोहन माकीजानी. जिसे शायद ज्यादा लोग नहीं जानते. 'शोले' में इनका सांभा का किरदार सबको याद है. दुनिया इन्हें मैक मोहन के नाम से भी जानती हैं. दमदार एक्टर मैक मोहन ने 10 मई, 2010 को कैंसर से जूझते हुए मुंबई के कोकिलाबेन हॉस्पिटल में अंतिम सांस ली थी. हम आपको बताएंगे मैक के जीवन से जुड़ी कुछ खास बातें.

# कराची से लखनऊ तक का सफ़र

मोहन माकीजनी उर्फ़ मैक मोहन. जन्म 24 अप्रैल, 1938 को ब्रिटिश भारत के कराची में हुआ. मैक के पिता भारत में ब्रिटिश आर्मी में कर्नल थे. वो जानी-मानी एक्ट्रेस रवीना टंडन के मामा भी थे. साल 1940 में मैक के पिता का ट्रांसफर कराची से लखनऊ हो गया. मैक की शुरूआती पढ़ाई लखनऊ में ही हुई. पढ़ाई के दौरान इनकी दोस्ती जाने माने एक्टर सुनील दत्त से हो गई. कॉलेज से ही इन्होंने थिएटर शुरू कर दिया था. थिएटर के अलावा पुणे के फिल्म एंड टैलिविजन इंस्टिट्यूट में एक्टिंग भी सीखी. विनोद मेहरा, जिन्हें रोमैंटिक हीरो के नाम से काफी शोहरत मिली, वो भी मैक के साथ उसी इंस्टिट्यूट में थे.
अपने 46 साल के करियर में मैक मोहन ने 200 से ज्यादा फिल्मों में काम किया. हिंदी फिल्मों के अलावा उन्होंने भोजपुरी, गुजराती, हरियाणवी, मराठी, रशियन और स्पैनिश फिल्मों में भी काम किया है. कई फिल्मों में उनका असली नाम मैक ही इस्तेमाल किया गया था.

# क्रिकेटर से एक्टर कैसे बन गए?

मैक को बचपन से ही क्रिकेट खेलने का शौक था. वह क्रिकेटर बनना भी चाहते थे. उन्होंने अपने एक इंटरव्यू में उत्तर प्रदेश की क्रिकेट टीम में खेलने का ज़िक्र भी किया था. फिर एक वक़्त ऐसा आया जब उन्होंने ठान लिया कि अब तो क्रिकेटर बनना ही है. और उन दिनों क्रिकेट की अच्छी ट्रेनिंग सिर्फ मुंबई में दी जाती थी. साल 1952 में मैक मुंबई आ गए. उन्होंने कई क्रिकेट टूर्नामेंट्स में हिस्सा भी लिया था.

# मैक का दूसरा नाम, कड़क राम

मैक बड़े ही स्टाइलिश इंसान थे. उनके कपड़े बड़े ही चकाचक होते थे. हमेशा कड़क कपड़े पहनते थे. इसलिए लोग उन्हें अक्सर 'कड़क राम' कहकर बुलाते. वो कपड़े हमेशा इस्त्री किए हुए और फिटिंग के पहनना पसंद करते थे. उनके स्टाइल के कारण ही स्क्रीन पर उनका लुक अलग और शानदार दिखता था. अपनी ज्यादातर फिल्मों में वे ट्रिम दाढ़ी रखना पसंद करते थे. फिल्म में भी उन्हें अपनी ही पसंद के कपड़े पहनना अच्छा लगता था.

# रंगमंच देख भूल गए क्रिकेट, बन गए एक्टर

1952 में मैक मुंबई आए. यहां इन्होंने रंगमंच को देखा तो एक्टिंग में रूचि पैदा हो गई. मुंबई के फिल्मालय स्कूल से उन्होंने एक्टिंग सीखी. मशहूर गीतकार कैफी आजमी की पत्नी शौकत कैफी एक स्टेज ड्रामा डायरेक्ट कर रही थीं. नाटक के लिए उन्हें एक दुबले पतले इंसान की जरूरत थी. मैक मोहन के किसी दोस्त ने उन्हें इसके बारे में बताया. उन दिनों मैक को पैसों की भी जरूरत थी. लिहाजा थोड़े बहुत पैसों के लिए उन्होंने शौकत कैफी से नाटक में काम मांगने के लिए मुलाकात की. शौकत कैफी को मैक का काम काफी पसंद भी आया. उन्होंने उनसे कहा था कि तुम्हारी एक्टिंग अच्छी है. यहीं से मैक का एक्टिंग करियर शुरू हो गया.
एक फ़िल्मी सीन के दौरान मैक मोहन.

एक फ़िल्मी सीन के दौरान मैक मोहन.

हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री में अभिनेता बनने से पहले उन्होंने निर्देशक चेतन आनंद के साथ असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में काम भी किया. मैक को देव आनंद के साथ काम करके ऐसा लगा था कि जैसे वो बहुत बूढे हो गए है. सन् 1964 में इन्होंने ‘हकीकत’ फिल्म से अपने एक्टिंग करियर की शुरूआत की. 'हकीकत' फिल्म में उन्होंने एक सैनिक का किरदार अदा किया था. उसके बाद भी इन्होंने बहुत सी फिल्मों में काम किया जैसे 'ज़ंजीर', 'सलाखें', 'शागिर्द'. लेकिन जिस फिल्म के लिए उन्हें आज तक जाना जाता है वो है 1975 की फिल्म ‘शोले’. जिसमें वो सांभा के किरदार में दिखे थे. हालांकि फिल्म में उनके बहुत सारे सीन्स काट दिए गए थे. इसके बावजूद सांभा सब को याद रहा. 'शोले' के बाद फिर तो चाहे वो अमिताभ के साथ 'डॉन' हो या 'सत्ते पे सत्ता' हो, 'शान' हो या 'खून-पसीना', 'दोस्ताना' हो या 'काला पत्थर' हर फिल्म में उनकी उपस्थिति रही. अमिताभ ही नहीं ऋषि कपूर के साथ भी उन्होंने कई फिल्मों में काम किया जैसे कि 'रफूचक्कर' और 'क़र्ज़'. उनका चार लाइन का डायलॉग भी कभी-कभी हीरो पर भारी पड़ता था.
कुछ फिल्मों में तो मैक डांस करते भी नजर आए. जब ब्लैक एंड वाइट फिल्में थी और मैक दाढी भी नहीं रखते थे. मैक मोहन 'शोले' से पहले भी कई मूवीज में काम कर चुके हैं. लेकिन 'शोले' के बाद से उन्हें एक नई पहचान मिल गई थी. फिर तो मैक को कोई भी उनके असली नाम से भले ही ना जानता हो पर सांभा के नाम से जरूर जानता.

# कैंसर से जंग 

जोया अख़्तर की फिल्म 'लक बाई चांस' उनके करियर की आखिरी मूवी थी. साल 2009 में वो फिल्म ‘अतिथि तुम कब जाओगे’ के लिए शूट कर ही रहे थे कि अचानक उनकी तबियत खराब हो गई और उन्हें मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया. 71 साल के मैक को लंग कैंसर हुआ था. साल 2010 तक की मई तक वो हॉस्पिटल में एडमिट रहें. 10 मई 2010 को उन्होंने अंतिम सांस ली.

मैक मोहन.

हेमा मालिनी के साथ मैक मोहन.

# मैक मोहन की निजी ज़िंदगी की कहानी, उन्हीं की जुबानी

# शोले की रिलीज़ के बाद रोए क्यों थे?
शोले की शूटिंग एक छोटे से गांव रामनगर में की गई. लोकेशन पर पहुंचने में पूरा एक घंटा लग जाता था. सभी सुबह 5 बजे उठा करते थे. फिर 6 बजे होटल से निकलते और 7-7:30 लोकेशन पर पहुंचते’. जब सब फिल्म का फाइनल ट्रायल देख रहे थे तो मैक अचानक छोटे बच्चों की तरह रोने लगे क्योंकि उनका रोल बहुत छोटा सा रह गया था. वहां सभी मौजूद थे अमिताभ, धर्मेंद्र वगैरह. रमेश सिप्पी ने मैक से पूछा कि तुम क्यों रो रहे हो ? मैक ने कहा कि मेरा रोल तो बहुत छोटा सा रह गया, आप इसे भी काट दीजिए. तब उन्होंने मैक से कहा था कि अगर ये फिल्म हिट हो गई तो तुम्हें एक नई पहचान मिल जाएगी.
और ऐसा हुआ भी.
# मज़ेदार हादसा
एक इंटरव्यू में उन्होंने एक मज़ेदार हादसा बताया था. कहा था,
Embed
# बच्चे कहते थे 'पापा विलेन का काम छोड़ दो'
जब भी मैक को स्क्रीन पर पीटा जाता तो मैक की बड़ी बेटी को बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता था. वो मैक को काम करने से मना भी करती थी. जब भी वो स्कूल जाती थी तो सब उसे कहते थे कि तुम्हारा बाप तो चोर है ,बाप तो डाकू है. तो मैक उससे कहते कि बेटा ऐसा नहीं है. ये तो हमारा काम है. मैक की छोटी वाली बेटी तो मैक को पिटता देख रोने ही लगती थी.
# खुद को परखने वाले मैक 
उसी इंटरव्यू में मैक ने ये भी कहा था,
Embed
अमिताभ बच्चन के साथ मैक मोहन.


अमिताभ बच्चन के साथ मैक मोहन.
# चमचा विलेन 
मैक ने एक इंटरव्यू के दौरान खुद को चमचा विलेन भी बताया था. उन्होंने कहा कि वो पीटते कम हैं और पिटते ज्यादा हैं. क्योंकि उनको सोफिस्टिकेटिड लड़ाई ज्यादा पसंद थी. शायरी करना भी उन्हें बहुत अच्छा लगता था. वो स्वभाव के बहुत अच्छे थे. उन में बस एक ही बुरी आदत थी कि वो शराब बहुत पीते थे. सिगरेट तो इतनी ज्यादा पीते थे कि माचिस की जरूरत ही नहीं पड़ती. सिगरेट से सिगरेट जला लिया करते.
# मैक के जाने से इंडस्ट्री को घाटा
मैक के अंतिम संस्कार पर शक्ति कपूर, प्रिया दत्त, रंजीत और तब्बसुम जैसे लोग भी आए. प्रिया दत्त का कहना था कि उनके पापा से मैक मोहन का बहुत खास रिश्ता  था. क़ॉलेज से ही वो उनके साथ पढ़ रहे हैं. रमेश सिप्पी ने भी एक इंटरव्यू में कहा कि सांभा के रोल के लिए मैक से अच्छा कोई हो ही नहीं सकता था. जावेद अख़्तर जिन्होंने सांभा के लिए वो कालजयी लाइन लिखी थी, उनका भी यहीं कहना था कि मैक ही वो एक थे जो उन लाइंस को अच्छे से बोल सकते थे. जिस तरह से उन्होंने पहाड़ की उस चोटी पर बैठकर गब्बर से कहा, कोई और उन जैसा कर ही नहीं सकता था.

ये स्टोरी हमारे साथ इंटर्नशिप कर चुकी मेघा ने की है. 




वीडियो: मृदुल शर्मा ने जब अक्षय कुमार के चक्कर में पैर तुड़वा लिया

Advertisement

Advertisement

()