शरलॉक होम्स को लिखने वाला उसी से सबसे ज्यादा नफरत क्यों करने लगा?
इस वजह से सबसे अच्छा जासूस शरलॉक 10 साल तक कहानियों में मरा रहा

Did you miss me?
बीबीसी की टीवी सीरीज़ 'शरलॉक होम्स' के तीसरे सीज़न का आखिरी सीन. मॉरियारिटी की आवाज़ पूरे लंदन में गूंजने लगती है - Did you miss me?(क्या आपने मुझे मिस किया?). शरलॉक होम्स में हीरो और विलेन, दोनों अमर हैं.
यकीन नहीं आता कि शरलॉक होम्स एक ऊब चुके डॉक्टर की कल्पना ने जन्मा होगा. लेकिन यही सच है. इस डॉक्टर का नाम था सर आर्थर कॉनन डॉयल - आंखों का वो डॉक्टर जिसने लंदन में प्रैक्टिस तो जमाई, पर कभी ज़्यादा मरीज़ नहीं देखे. अकेले बैठे-बैठे वो बोर हो जाया करता था.
1886 में आर्थर की बोरियत ने एक शॉर्ट नॉवेल जना - 'अ स्टडी इन स्कारलेट'. इसी के ज़रिए पाठक पहली बार शरलॉक और डॉक्टर वॉटसन से मिले. इसके बाद जो घटा, वो इतिहास का हिस्सा है. 'अ स्टडी इन स्कारलेट' के बाद 3 और नॉवेल और 56 शॉर्ट स्टोरी आईं और '221 B, बेकर्स स्ट्रीट' लोगों की कल्पना में एक असल पते की दर्ज हो गया.

डॉयल की रीयल लाइफ मिस्ट्री
डॉयल जासूसी कहानियां लिखा बस नहीं करते थे, वो असल ज़िंदगी में जासूस थे भी. किसी अनसुलझे केस में उन्हें काफ़ी दिलचस्पी रहती थी. द क्यूरियस केस ऑस्कर स्लेटर एक मिसाल है. ये केस 82 साल की एक बूढ़ी औरत की मौत का था. स्कॉटलैंड के ग्लास्गो की इस अमीर औरत का नाम मैरियन गिलक्रिस्ट था. इस खून का इल्ज़ाम स्लेटर के सिर पर था.डॉयल ने इस केस में 'होम्स' वाली तिगड़म आज़माई. इससे कुछ नए सबूत इनके हाथ लगे. तो गवाहों को वापस बुलाया गया और प्रॉसिक्यूशन के सबूतों पर सवाल उठाए गए. डॉयल को मिले सारे सबूत, स्लेटर की बेगुनाही के लिए दायर की याचिका के रूप में पब्लिश हुए. इस बात ने सनसनी फैला दी. लोग वापस मुकदमा चलाने की मांग करने लगे. लेकिन स्कॉटिश अधिकारियों ने इस बात को आया-गया कर दिया.

बाद में स्लेटर ने जेल से डॉयल को चोरी-छुपे कई मैसेज भेजे. इससे डॉयल का केस में इंटरेस्ट फिर से जाग गया. उन्होंने स्लेटर के केस में दखल देने के लिए स्कॉटलैंड के नेताओं को खत लिखे और स्लेटर की फीस के लिए अपनी जेब से पैसे लगाए. आखिर में स्लेटर को जेल से रिहा कर दिया गया. स्लेटर को 6 हज़ार पौंड मुआवज़े के तौर पर भी मिले. लेकिन स्लेटर ने इसे डॉयल के साथ बांटा नहीं.
डॉयल और होम्स
हम शरलॉक के जितने गुण गाएं, वो कभी डॉयल का पसंदीदा कैरेक्टर नहीं बना. शायद इसलिए डॉयल ने उसे 1893 में मार दिया. शरलॉक के फैन्स के लिए ये अचानक घटे एक हादसे की तरह था. वो इस बात को सहन नहीं कर पा रहे थे. तो डॉयल ने 10 साल बाद शेरलॉक को वापस ज़िंदा कर दिया. इसमें कुछ दबाव शरलॉक के फैन्स का था और कुछ व्यावसायिक मजबूरी भी - शरलॉक फैन्स के साथ-साथ प्रकाशकों को भी बहुत पसंद था.डॉयल ने कभी अपने दोस्त से कहा था, 'मेरे बस में होता तो मैं उसे कभी दोबारा ज़िंदा नहीं करता. सालों तक उसे ज़िंदा करना मेरे बस से बाहर रहा. क्योंकि मुझे शेरलॉक से ऐसी फीलिंग आने लगी थी, जैसी मुझे 'पैत दे फोए ग्रा' (pâté de foie gras) खाने से आने लगी थी. मैंने ये डिश इतनी खाई है कि अब उसे याद करते ही मेरा सर घूमने लगता है.'
डॉयल ने शरलॉक के अलावा फैंटेसी और साइंस फिक्शन भी लिखा. इस थीम पर उनके 3 नॉवेल और 2 शॉर्ट स्टोरी आईं. 'द लॉस्ट वर्ल्ड(1912)', 'द पॉइज़न बेल्ट(1913)', 'द लैंड ऑफ़ मिस्ट(1926)', 'द डिसइंटिग्रेशन मशीन(1928), और 'वेन द वर्ल्ड स्क्रीम्ड(1929). 1997 में 'द लॉस्ट वर्ल्ड' पर इसी नाम से एक फिल्म भी बनी थी.

ऑर्थर कॉनन डॉयल
'सर' ऑर्थर कॉनन डॉयल
डॉयल ने जो हासिल किया, शरलॉक के दम पर किया. लेकिन उन्हें 'सर' की उपाधि दिलाने में शरलॉक का रोल नहीं था. ये सम्मान उन्हें एक पैम्फ़लेट लिखा था, जिसमें बोर युद्ध में ब्रिटेन की भागीदारी को सही ठहराया गया था. बोर युद्ध और प्रथम विश्व युद्ध में डॉयल ने अपने बेटे, भाई और दो भतीजों को छीन लिया था. डॉयल ने इन दोनों लड़ाइयों का इतिहास भी लिखा.शरलॉक होम्स ने तब से लेकर आज तक रचे गए डिटेक्टिव्स के लिए एक टेम्प्लेट की तरह काम किया है. शरलॉक की कहानियों पर फिल्में और टीवी सीरियल्स बनते रहते हैं. जिस तरह आइरीन एडलर हमेशा शरलॉक के लिए 'द वुमन' रही, उसी तरह शरलॉक आपने फैन्स के लिए हमेशा 'द डिटेक्टिव' रहेगा. नए डिटेक्टिव आते रहें तो आते रहें.
ये लेख टीना ने लिखा है. दी लल्लनटॉप के लिए इसका अनुवाद रुचिका ने किया है.
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