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मैंने आईपीएल का एक भी मैच नहीं देखा और न ही देखूंगा

एक क्रिकेट प्रेमी पाठक के मन की बात. गुस्सा है. आईपीएल से. उसमें होने वाली चोंचलेबाजी से.

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लल्लनटॉप
23 अप्रैल 2016 (अपडेटेड: 23 अप्रैल 2016, 07:56 AM IST)
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ये आर्टिकल हमें लिख भेजा है एक क्रिकेट प्रेमी ने. वो जिसका पहला और आखिरी प्यार क्रिकेट ही रहा है. चंडीगढ़ से आकर मुंबई में एक कॉर्पोरेट जॉब में मशगूल इन जनाब के दिल में क्रिकेट ही धड़कता है. स्कूल कॉलेज में जम कर क्रिकेट खेला और अब एक दिन नौकरी को ठेंगा दिखाकर क्रिकेट अकादमी शुरू करना इनका सपना है. दुनिया इन्हें कमलजीत सिंह के नाम से जानती है. और हम इन्हें लल्लन खास कहते हैं.


  हर साल आईपीएल सीज़न के शुरू होते ही एक बात पक्की हो जाती है. ऑफिस से घर वापिस आ कर कुछ करने को न हो तो फ़्रिज से चिल्ड बियर निकालो और टीवी के सामने बैठ जाओ. 3-4 घंटे के अच्छे खासे एंटरटेनमेंट की गारंटी है. किसी को (मतलब आपकी वाइफ या गर्लफ्रेंड) अगर क्रिकेट पसंद नहीं हो तो भी कोई प्रॉब्लम नहीं है. आपकी वाइफ या गर्लफ्रेंड भी आपके साथ उतने ही शौक से मैच देखेगी. ऐसा इसलिए क्यूंकि आईपीएल क्रिकेट मैच नहीं है. ये तो जरिया है एंटरटेनमेंट का, पैसा बनाने का और सेलेब्रिटी स्पॉटिंग का. खैर, मुद्दे की बात ये है कि इस बार मैंने आईपीएल का एक भी मैच नहीं देखा है. न ही किसी मैच का स्कोर या रिजल्ट क्रिकइन्फो पे चेक किया है. न ही मुझे ये पता है कौन फॉर्म में है और कौन नहीं. मुझे कोई फ़र्क भी नहीं पड़ रहा. होने को ये बहुत बड़ी बात है क्यूंकि अब से कुछ 10 साल पहले तक क्रिकेट मेरा पहला प्यार था. आप किसी मैच की भी बात उठाइए और मैं आपको उस मैच की सारी डीटेल्स डे सकता था. जैसे कि 21 मई 1997 को चेन्नई में हुए इंडिया वर्सेज़ पाकिस्तान के मैच में सईद अनवर ने तो 194 रन बनाये ही थे. साथ ही साथ राहुल द्रविड़ ने बभी 107 रन बना कर अपनी वन-डे सेंचुरियों का खाता खोला था. एक दूसरा इक्ज़ाम्पल है युवराज सिंह. जिसने नैरोबी में अक्टूबर 2000 में ऑस्ट्रेलिया के अगेंस्ट 84 रन की इनिंग्स खेल कर अपने आप को इंडियन क्रिकेट टीम में परमानेंट कर लिया था. पर अब बात कुछ और है. नीचे मैंने कुछ वजहें लिखने की कोशिश की है कि क्यूं मैं इतना बड़ा क्रिकेट फैन हो कर भी इस आईपीएल का एक भी मैच नहीं देख रहा हूं:

1. क्रिकेट नहीं धंधा है

जैसा की मैंने ऊपर लिखा, आईपीएल क्रिकेट नहीं है धंधा है. और मुझे प्रॉब्लम होती है इस बात से कि एक स्पोर्ट को किस तरह से कमर्शियलाइज़ कर के बेचा जा रहा है. विकेट गिरने पर या छक्का लगने पर रीप्ले नहीं दिखाया जाता. दिखाया जाता है कि कैसे रिवाइटल या शिलाजीत ले कर आप अपनी ज़िन्दगी रंगीन कर सकते हैं. आजकल सिक्सर को सिक्सर या छक्का नहीं बल्कि 'यस बैंक मैक्सिमम' बोला जाता है. जहां देखो ऐड ही ऐड. सब बेच डाला कमबख्तों ने. बिकने को अगर कुछ बचा है तो वो है बैट्समैन के पैड और ग्लव्स के अन्दर वाली साइड.
 

2. क्रिकेटर्स कहां हैं?

आईपीएल की एक बात अच्छी है. यंग क्रिकेटर्स को इतना बड़ा एक्सपोज़र और मौका सिर्फ आईपीएल ने ही दिया है. काफ़ी गरीब क्रिकेटर्स के घर का चूल्हा तो आईपीएल ने ही जलाया है. लेकिन साथ ही साथ बहुत सारे छिछले क्रिकेटर्स को स्टार भी इसी आईपीएल ने बना दिया है. कुछ क्रिकेटर्स तो एक-दो मैचेज़ के दम पे पूरा सीज़न खेल जाते हैं. ऐसे क्रिकेटर्स को देख कर लगता है जैसे सिर्फ आईपीएल तक पहुंचना ही उनकी ज़िन्दगी का मकसद था. हाँ कोहली, डिविलियर्स, वाटसन जैसे क्रिकेटर्स लगातार परफॉर्म करते हैं मगर ऊपर से देखा जाये तो क्रिकेट की क्वालिटी काफी घटिया हो चली है. सचिन जैसे क्रिकेटर के रिटायर्मेंट के बाद तो आईपीएल और भी बेस्वाद लगने लगता है.
 

3. क्लब वर्सेज़ कंट्री

आगे जाकर क्रिकेट देश के लिए नहीं बल्कि क्लबों के लिए खेला जाने लगेगा या नहीं, इस बात का फैसला तो वक़्त ही करेगा. फिलहाल इंटरनेशनल क्रिकेटर्स को अपने अपने क्लब के लिए खेलता देखकर ऐसा लगता है के कहीं न कहीं पैशन की कमी ज़रूर है. बात करते हैं हाल ही में हुए टी-20 वर्ल्ड कप की. वेस्ट इंडीज़ का चैंपियन डांस पैशन का नतीजा है. वरना एक टीम जिसका बोर्ड उसकी बात नहीं सुनता, सैलरी नहीं देता, उस टीम में इतना जोश कि इंडिया और इंग्लैण्ड की टीमों को सेमी-फाइनल और फाइनल में रौंद दिया. आप ही बताइए कि अगर एक क्लब अपने क्रिकेटर्स को पैसे नहीं देगा तो क्या इतने जोश से वो अपनी टीम के लिए खेल पायेंगे?
 

4. क्रिकेट का ओवरडोज़

ये बात तो सच है कि अब क्रिकेट का ओवरडोज़ शुरू हो गया है. कुछ ज़्यादा ही. वर्ल्ड टी-20 खतम भी नहीं हुआ कि आईपीएल शुरू हो गया. आईपीएल के खतम होते ही श्री लंका टीम का इंग्लैण्ड टूर शुरू हो जायेगा और साथ ही साथ वेस्ट-इंडीज़ में ऑस्ट्रेलिया, साउथ अफ्रीका की ट्राई-सीरीज़. अब ऐसा तो है नहीं कि एंटरटेनमेंट के और ज़रिये नहीं हैं. नेटफ्लिक्स और उसके जैसी और ऐप्स से कुछ नए तरीके भी ढूंढ दिए हैं.
  ऐसा नहीं है कि मुझे क्रिकेट से लगाव नहीं रहा. अभी भी 3 बजे उठकर ऐशेज़ सीरीज़ के मैच देखता हूं. वर्ल्ड कप का बेसब्री से इंतज़ार रहता है. फेवरेट क्रिकेटर्स जैसे कि डिविलियर्स, स्टेन, जो रूट, कोहली का कैरियर भी फॉलो करता हूं. मगर आईपीएल से प्यार नहीं है, और न ही कभी होगा.

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