राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों की एक बात ने मुझे शर्मसार कर दिया
इस चुनाव के नतीजे में इस बात पर सबसे ज्यादा गुस्सा आया.

राष्ट्रपति चुनाव में कोई भी पार्टी विप जारी नहीं कर सकती है. ऐसा माना जाता है कि हमारे विधायक इस चुनाव में किसी पार्टी की नहीं, बल्कि अपने क्षेत्र की जनता की नुमाइंदगी कर रहे होते हैं. क्रॉस वोटिंग सियासी कयासबाजी के लिए ठीक है, लेकिन इससे लोकतंत्र की सेहत पर कोई खराब प्रभाव नहीं पड़ता है.
इस चुनाव के नतीजे में जिस बात पर सबसे ज्यादा गुस्सा आया, वो है 77 वोटों का रद्द किया जाना. हमारे 77 माननीय सांसदों और विधायकों को अपना वोट तक नहीं डालना आता. कुल 22 सांसदों के वोट रद्द किए गए और 55 विधायकों के. इन माननीय नेताओं की इस मूर्खतापूर्ण हरकत ने 20,942 मूल्य के वोट जाया कर दिए. ये लोग अपने क्षेत्र की जनता का प्रतिनिधित्व करने में नाकामयाब रहे. जबकि इस चुनाव में वोटिंग करना इतना आसान है कि अंक ज्ञान रखने वाला कोई बच्चा भी अपना मत दे सकता है.

चुनाव परिणाम
क्या है वोट देने का तरीका चुनाव आयोग राष्ट्रपति चुनाव के लिए दो किस्म के मतपत्र जारी करता है. पहला हरे रंग का जो कि हमारे सांसदों के लिए होता है. दूसरा गुलाबी रंग का जिसे हमारे विधायक इस्तेमाल करते हैं. वोट देने के लिए खास पेन होता है. आपको करना बस इतना होता है कि जिस उम्मीदवार को आप पहली वरीयता का वोट देना चाहते हों, उसके नाम के आगे '1' और जिसे दूसरी वरीयता का वोट देना है उसके नाम के आगे '2' लिख देना होता है. अगर कोई जनप्रतिनिधि इतना भी करने में सक्षम नहीं है तो उसे जनता से वोट मांगने का क्या अख्तियार है?
बहरहाल आप उन राज्यों के बारे जानिए जहां क्रॉस वोटिंग हुई है. क्रॉस वोटिंग उस सूबे की सियासी तस्वीर पेश कर करती है. आप भी पढ़िए और गुनिए-
दिल्ली 2015 के चुनाव में आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में प्रचंड बहुमत हासिल किया था. 70 सीट में उसे 67 सीट हासिल हुई थी. चार विधायक बागी होकर पार्टी से बाहर निकल चुके हैं. इसके अलावा बवाना की सीट खाली है. शेष बचे 62. मीरा कुमार को मिले महज 55 वोट. इसका मतलब आम आदमी पार्टी के कुछ विधायकों ने कोविंद के पक्ष में वोटिंग की है. यहां 6 वोट रद्द किए गए हैं.
गोवा गोवा में कांग्रेस के कुल विधायक हैं 16. मीरा कुमार के पक्ष में गए 11. इसका मतलब है कि 5 विधायकों ने कोविंद के पक्ष में वोट डाला.
महाराष्ट्र यहां पर भी कोविंद के पक्ष में जम कर क्रॉस वोटिंग हुई. बीजेपी-शिवसेना के 185 विधायक हैं, लेकिन कोविंद के पक्ष में पड़े 208 वोट. कांग्रेस और एनसीपी के विधायकों की संख्या है 83. मीरा कुमार के पक्ष में पड़े महज 77 वोट. नतीजों के बाद कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अशोक चव्हाण ने सफाई देते हुए कहा कि यह पता लगाना बहुत मुश्किल है कि किसने क्रॉस वोटिंग की है.
गुजरात गुजरात में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में यहां हुई क्रॉस वोटिंग और शंकर सिंह वाघेला के बागी तेवर ने पार्टी को संकट में डाल रखा है. यहां बीजेपी के 121 विधायक हैं. कोविंद के पक्ष में 132 पड़े हैं. कांग्रेस के 57 विधायक होने के बावजूद मीरा कुमार को 49 वोटों से संतोष करना पड़ा. कुल 8 कांग्रेसी विधायकों ने कोविंद के पक्ष में मतदान किया.
पश्चिम बंगाल पश्चिम बंगाल एक तरह से विपक्ष का गढ़ था. विधानसभा के दोनों बड़े धड़े कोविंद के खिलाफ थे. 294 सदस्यों वाली विधानसभा में बीजेपी गठबंधन के पास महज 6 विधायक थे. नतीजों में कोविंद को मिले 11 वोट. माने यहां भी कोविंद के पक्ष में 5 विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की है.
राजस्थान
राजस्थान में भी जम कर क्रॉस वोटिंग हुई लेकिन कोविंद की बजाए मीरा कुमार के पक्ष में. 2013 के विधानसभा चुनाव में 200 में 163 जीत कर बीजेपी सत्ता में आई थी. कांग्रेस के खाते में महज 24 सीट थीं. राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों में मीरा कुमार को मिले 34 वोट. अगर दो निर्दलीय और बसपा के दो वोट जोड़ भी दिए जाएं तो भी बीजेपी के कम से कम 6 विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की है.
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