लल्लनटॉप अड्डे पर पहुंचे राज शेखर. दोस्त बनकर. राज शेखर, तनु वेड्स मनु वाले.मधेपुरा वाले. जिनके लिखे में तन्नु करोलबाग की छत पर अंबिया, इलायची और दालचीनीकेसर सुखाती है. और बिहार में बहार होती है. आग और पानी से वादे लिखते हैं. जोलिखते रहते हैं ताकि प्रेम, बारिश और इंक़लाब सब आ एक साथ आ जाएं किसी दिन. मुंबई सेआए थे. उनके पास तनु वेड्स मनु के किस्से थे. मधेपुरा की बातें थीं. स्वरूप भी थे,हाथ में गिटार लिए हुए. राज शेखर ने लल्लनटॉप अड्डे पर तनु वेड्स मनु रिटर्न्स कागाना ओ साथी मेरे सुनाया, समझाया. बताया कैसे ये गाना उन दो लोगों के बीच फिल्मायाजाने वाला था, जो दोबारा कभी साथ नहीं आने वाले थे. ऐसे मौके पर या तो कोई दुखी सागाना होता, लेकिन आया क्या? 'ओ साथी मेरे'. साथ में ये भी कह गए कि लल्लनटॉप में तोलुक्खेबाजी वाला मामला भी चलता है. बहुत फॉर्मल-वॉर्मल हिसाब-किताब तो है नहीं. 'हमजो बिखरे कभी, तुमसे जो उधड़े कहीं' वाली लाइन का किस्सा बताते हुए कहा. डायरेक्टरवगैरह से इस 'उधड़े' पर बड़ी बात हुई. वो कह रहे थे उधड़े किसी को समझ नहीं आएगा, औरमुझे कोई और शब्द समझ नहीं आ रहा था. उधड़ने में कुछ जुड़ा हुआ रहता है, एक सिरा लगाहोता है.दूसरा खुल रहा होता है, जबकि टूटना टूट चुका होता है. इसी गाने की एक लाइनका एक किस्सा और सुनाया. उनके किसी दोस्त ने एक लाइन पर कहा कि ये दो लोगों नहींदेशों के बीच की बात भी हो सकती थी. कितना भी हम रूठे, पर बात करेंगे साथी.https://www.youtube.com/watch?v=9cofR0Y80M0