ओडिशा का सबसे बड़ा त्यौहार रज-पर्व चल रहा है. आज उसका तीसरा और आखिरी दिन है.ओडिशा के लोग मानते हैं कि इस दौरान पृथ्वी के पीरियड्स आते हैं. ये त्यौहार औरतहोने की फीलिंग को सेलिब्रेट करता है. ओडिशा का छोटा सा गांव, बालेश्वर. वहां केलोग 'बालासोर' कहते हैं. मैंने उस शहर में दो साल बिताए हैं. ऐसे सुनने में तो दोसाल मतलब कुछ भी नहीं लगता. लेकिन वो दो साल मेरी ज़िन्दगी के बहुत बड़े टर्निंगपॉइंट रहे हैं.खैर, ओडिशा की हवा में बहुत अपनापन है. बहुत सादगी है. ताज़ी हवा है. लोग आराम कीज़िन्दगी जीते हैं.(उस वक़्त मेरे पास स्मार्ट फ़ोन नहीं हुआ करता था. ये फ़ोटो मेरे पुराने नोकिया 2700क्लासिक से लिए गए हैं.)जैसी हमारे गांव में सर्दी की दोपहर होती है, गर्मियों की शामें होती हैं. वैसीआराम की ज़िन्दगी बालासोर में मुझे हर रोज़ दिखती थी. कोई जल्दीबाज़ी नहीं. कोई बेमतलबकी हड़बड़ी नहीं. चैन से जीते हैं. छककर डालमा, पोखाड़, माछ और साग खाते हैं. दोपहरमें भी 3-4 घंटे सोते हैं. पंखे से मक्खी-मच्छर उड़ाते रहते हैं. औरतें पल्ला निचोड़कर पसीना सुखाती हैं. बड़े से भगोने में घर-भर के लिए नीम्बू-पानी बनता है. गोले मेंबैठकर एक-एक घूंट सब पीते हैं और भगोना आगे बढ़ाते जाते हैं.(उस वक़्त मेरे पास स्मार्ट फ़ोन नहीं हुआ करता था. ये फ़ोटो मेरे पुराने नोकिया 2700क्लासिक से लिए गए हैं.)बहुत सी यादें हैं. लेकिन सबसे खूबसूरत जो याद है वहां की. वो है ओडिशा के सबसेखूबसूरत त्यौहार की. रज-पर्व.जब पता चला था, मुझे आश्चर्य हुआ था. बड़े शहरों में मॉडर्न होने के नाम पर बहुतबड़ी-बड़ी बातें की जाती हैं. पर पीरियड्स आज भी एक टैबू बना हुआ है. लेकिन आज भीपीरियड्स के दौरान लड़कियों को मंदिर में जाना सख्त मना होता है. सबरीमाला मंदिर नेतो कुछ महीने पहले नोटिस भी जारी कर दिया था. 10 से 50 साल तक की औरतें पीरियड्स केदौरान मंदिर में घुस ही नहीं सकतीं. मेरी भी हमेशा इस बात पर मम्मी से लड़ाई होतीथी. पीरियड्स से जुड़ी बहत्तरों तरह की गलतफहमियां हैं. लेकिन ओडिशा में पीरियड्स कात्यौहार मनाया जाता है. इस नेच्युरल प्रोसेस को सेलेब्रेट किया जाता है. कितनीखुशनुमा सी खबर है ये. 'ब्रीज ऑफ फ्रेश एयर'.रज-पर्व: जब 3 दिनों तक भूदेवी के पीरियड्स आते हैंओडिशा के लोग मानते हैं कि पृथ्वी भगवान विष्णु (भगवान जगन्नाथ) की पत्नी हैं. देवीहैं. भूदेवी. जब गर्मियां ख़त्म होने वाली होती हैं. मानसून आने को होता है. कहाजाता है कि उस वक़्त भूदेवी को पीरियड्स आते हैं. 3 दिनों तक. इसीलिए इस दौरान उनकोआराम करने की ज़रूरत होती है. इन 3 दिनों में कटाई, बोआई या जमीन से जुड़ा इस तरह काकोई काम नहीं किया जाता जिससे उनको तकलीफ हो. घर की लड़कियों और औरतों को भी इस दिनआराम दिया जाता है. जब किसी औरत को पीरियड्स होते हैं उसको उड़िया भाषा में रजस्वलाकहा जाता है. वहीं से ये शब्द आया है. रज. और इसीलिए इस त्यौहार को कहा जाता हैरज-पर्व. पीरियड्स का त्यौहार. गांव के एक बुज़ुर्ग ने बताया था कि ये त्यौहारकिसानों और फसलों से भी जुड़ा हुआ है. पीरियड्स होने का मतलब है कि लड़की चाहे तो एकनई ज़िन्दगी को पैदा कर सकती है. वैसे ही इस त्यौहार का मतलब है कि हमारी पृथ्वीफर्टाइल है. इसमें फसलें उग सकती हैं. इस त्यौहार से पहले सारी फसलें काटी जा चुकीहोती हैं. इस दौरान किसान आराम करते हैं. घर की औरतें भी आराम करती हैं. और ज़मीन भीआराम करती है.credit: Sagarika Sahooपान, पोड़ पीठा, मेहंदी और झूलेचार दिनों का फेस्टिवल. हर दिन के अलग-अलग नाम. और हर दिन अपने-आप में ख़ास.जैसे रज-पर्व शुरू होने के पहले का जो दिन होता है उसको सज-रज कहा जाता है.पीरियड्स के पहले का दिन. इस दिन खाने की खूब सारी चीज़ें बना कर एक जगह स्टोर कर लीजाती हैं. पुराने ज़माने में यही स्टोर किया हुआ खाना आगे के 3 दिनों तक खाया जाताथा. लड़कियां अच्छे से तैयार कपड़ों और गहनों से सजती है. घर की ज़मीन का कोना साफ़किया जाता है. उसको भी अच्छे से सजाया जाता है. आने वाले तीन दिनों के लिए उसकोतैयार किया जाता है. मेरी दोस्त की मम्मी ने बताया था कि ऐसा करने से पीरियड्स केदौरान भूदेवी को दर्द और तकलीफें कम होती हैं.पर्व का पहला दिन होता है पहिली रज. दूसरा वाला दिन, मिथुन संक्रांति और तीसरा दिनजिस दिन पीरियड्स ख़त्म माने जाते हैं उसको कहते हैं बासी-रज. इन तीन दिनों मेंलड़कियां अच्छे-अच्छे कपड़े और गहने पहनती हैं. सजती हैं. मेहंदी लगाती हैं. झूलाझूलती हैं. घर के काम से उनको इन 3 दिनों की छुट्टी मिल जाती है. अपने दोस्तों केसाथ दिन भर बैठ कर बातें करती हैं. हंसती हैं, खूब मस्ती करती हैं. शहरों मेंत्यौहार कम ही दिखता है. असली मज़ा गांव में ही आता है.credit: Lisa Dashइस फेस्टिवल की सबसे अच्छी चीज़ है खूब सारी वैरायटी का खाना. ओडिशा की सबसे स्पेशलडिश है पीठा. चावल के आटे से बनी हर मीठी, नमकीन डिश को पीठा कहते हैं. पोड़ पीठा,चकुली पीठा, मंडा पीठा, आसिरा पीठा. ये लिस्ट ख़त्म ही नहीं होती. रज-पर्व में सबसेज्यादा पोड़ पीठा बनता है.पीठाcredit: Lisa Dash credit: Prajna Parimitaरज-पानरज में पान खाना भी ट्रेडिशन का एक हिस्सा है. मीठे पान में भी दसियों चॉइस होतीहै. खाने के बाद अगर मीठे की तलब होती हो तो वो भी सिर्फ पान खा कर ख़त्म हो जाएगी.credit: Sagarika Sahooझूलेघरों के आस-पास और गांव भर में जगह-जगह झूले लगते हैं. मेला लगता है. घर का हरमेम्बर इन 3 दिनों में पूरे एन्जॉयमेंट के मूड में रहता है.Credit: Lisa Dashcredit: Lisa Dashमेहंदीरज में मेहंदी लगाना बहुत शुभ माना जाता है. लड़कियां इन 3 दिनों में खुद को खूबपैम्पर करती हैं.credit: Sagarika SahooCredit: Lisa Dashझोट्टीओडिशा में एक ख़ास तरह की रंगोली बनाई जाती है. झोट्टी. चावल के आते को पानी मेंभिगो देते हैं. फिर उस सफ़ेद वाले पानी से ज़मीन पर झोट्टी बनाते हैं. रज के दौरान कईजगह झोट्टी की डिज़ाइन के कॉम्पटीशन भी होते हैं. लड़कियां साथ बैठ कर रज स्पेशल गाने भी गाती हैं.(उस वक़्त मेरे पास स्मार्ट फ़ोन नहीं हुआ करता था. ये फ़ोटो मेरे पुराने नोकिया 2700क्लासिक से लिए गए हैं.)रज का आखिरी दिन होता है बसुमती स्नान. इस दिन भूदेवी के पीरियड्स ख़त्म हो जातेहैं. घर की ज़मीन को साफ़ पानी से धोया जाता है. चन्दन का लेप लगाया जाता है. खेतोंमें पूजा होती है. भूदेवी से कहा जाता है कि हर साल आपको इसी तरह पीरियड्स आतेरहें. हम आपकी सेवा करेंगे. आप हमारी फसलें उगाती रहिए.जब पीरियड्स की वजह से लड़कियां डिप्रेशन में जा रही हों. पीरियड्स के बारे में बातकरना 'बहुत अजीब' लगता हो. ऐसे में हमारे ही देश में रज-पर्व जैसे त्यौहार मनाएजाते हों. तो अच्छा लगता है.वैसे आज बसुमति स्नान है. आप सबको ढेर सारी शुभकामनाएं.