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पाकिस्तानी जब भी भारत की तरफ देखेंगे, उन्हें ये तलवार दिखाई देगी!

क्या है इस तलवार का मतलब?

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फोटो - thelallantop
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विशाल
8 नवंबर 2016 (अपडेटेड: 8 नवंबर 2016, 09:17 AM IST)
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चुनाव कई मुद्दों पर लड़े जाते हैं. कुछ प्रकट होते हैं. कुछ चादर के नीचे होते हैं. इसके लिए शब्द है, 'अंडर करंट'. 

पंजाब में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं. प्रकाश सिंह बादल सरकार के लिए शहीदों को श्रद्धांजलि देने का इससे बेहतर वक्त कोई और नहीं हो सकता. सरकार ने अमृतसर और अटारी-वाघा बॉर्डर के बीच एक भव्य युद्ध स्मारक तैयार किया गया है. ये स्मारक है स्टील की बनी एक तलवार, जो आसमान की तरफ तनी है और पाकिस्तान की तरफ झुकी है.

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पंजाब स्टेट वॉर हीरोज मेमोरियल म्यूजियम अमृतसर-लाहौर बॉर्डर से महज 16 किमी दूर खासा कैंट के सामने NH1 पर बना है. यहां ढेर सारे स्मारक और ढांचे बनाए जा रहे हैं, लेकिन इस लंबी सी लिस्ट में सबसे ज्यादा फोकस इस तलवार पर है. सरकार चाहती है कि चुनाव की आचार संहिता लागू होने से पहले इसका अनावरण करवा दिया जाए. काम भी ख्वाहिश के मुताबिक ही हो रहा है.


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इस म्यूजियम में गुरु हरगोबिंद सिंह के युद्ध, सिखों-अंग्रेजों के युद्ध, दोनों विश्व युद्ध, 1947, 1965 और 1971 के भारत-पाक युद्ध, 1962 के भारत-चीन युद्ध और 1999 के कारगिल को सहेजा गया है. थ्रीडी सिलिकॉन और फाइबर आर्टवर्क से युद्धों को इतना जीवंत बनाया गया है कि आपको असल युद्ध न देख पाने का मलाल नहीं रहेगा. ऑडियो और वीडियो तो है ही, फिर भी कोई कसर रह जाए, तो 7डी ऑडिटोरियम चले जाइए. यहां भारत के लड़े युद्ध 3डी में दिखाए जाएंगे, ताकि आप उन्हें अच्छे से महसूस कर पाएं.

इस तलवार की मूठ भगवा रंग की है, जिस पर चार शेर बने हैं. स्टेनलेस स्टील की इस तलवार की धार पर कांसा लगाया गया है. मूठ ग्रेनाइट के एक प्लेटफॉर्म पर खड़ी है, जिस पर स्टील की एक चादर लगाई गई है. इस चादर पर 1947 के कश्मीर युद्ध के बाद से शहीद हुए 3800 सैनिकों के नाम दर्ज हैं. मौसम साफ हो, तो ये तलवार आपको कई किलोमीटर दूर से भी दिख जाएगी. ब्रिगेडियर जेएस अरोड़ा (रिटा.) बड़े गुमान से कहते हैं, 'यहां तक कि पाकिस्तानी भी हमारी ये तलवार देख सकते हैं.' इसका निर्माण उनकी देखरेख में हुआ है.

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जब से ये म्यूजियम बनना शुरू हुआ है, तब से प्रकाश सिंह बादल सालभर में करीब 20 बार यहां आ चुके हैं. इसके बारे में बात करने पर चमकती आंखों और सुकून भरी आवाज में कहते हैं, 'निजी रूप से कहूं, तो मेरी पूरी जिंदगी में यही सबसे संतोष देने वाली उपलब्धि है.'

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