आज आप पुनीत शर्मा की कलम के जादू में गुम होंगे. इंदौर के रहने वाले. हाल मुकाममुंबई. पढ़ाई की बायोटेक की. मगर नौकरी की इश्तेहार लिखने की. गाने भी लिखते हैं.औरंगजेब और रिवॉल्वर रानी के नगमे रचे. हर वक्त सिनेमा की पिनक में रहते हैं. नशायूं ही तारी रहे.--------------------------------------------------------------------------------कल मैं ट्विटर पर चहलकदमी कर रहा था. वहां ज़रा कम ही जाता हूं. मैंने देखा कि स्वराभास्कर के एक बयान पर लोग उसे बुली कर रहे हैं. उनकी हरकत ऐसी थी, जैसे झुंड बनाकरलकड़बग्घे हमला करते हैं. उनमें से अधिकतर बुली ऐसे थे, जो अपनी गुप्त पहचान सेट्विटर के जंगल में विचरते हैं और कमज़ोरों पर हमला करते हैं. उनमें सबसे ज्यादा लोगसत्ता के साथी होते हैं. सत्ता किसी की भी हो, मेरे लिए सत्ता है. तो ये प्राणीसत्ता पर हमला नहीं करते, सत्ता पर सवाल उठाने वाले पर करते हैं. उनकी ट्वीटहिस्ट्री देखकर समझ आता है कि उन्होंने अपना नैरेटिव तय कर लिया है.अगर मैं आपको पंचतंत्र की एक कथा के दो विकल्प दूं. पहली में लकड़बग्घे एक कमजोरहिरण-शावक को घेरकर मारते हैं और दूसरे विकल्प में लकड़बग्घे ताकतवर शेर को घेरकरमारते हैं. आप कौन सा विकल्प चुनेंगे? मैं तो शेर वाला विकल्प चुनुंगा और इसलिएनहीं कि शेर क्रूर है, बल्कि इसलिए कि वो पलटकर और जोर से वार कर सकता है. वोमुकाबला दिलचस्प है, लेकिन ये लकड़बग्घे इतने दिलेर नहीं.तभी मैं ये सोचने लगा कि इस मुखौटे के पीछे छिपे इंसान की आत्मा में कितने घावहोंगे. उसी का दर्द दबाने के लिए शायद वो इतनी गालियां बकता हो. जैसे नुक्कड़ पर खड़ेबेरोजगार लड़के, जो आने-जाने वालों पर फब्तियां कसते हैं, क्योंकि उनकी जिंदगी मेंबहुत कुछ अंदर से टूट चुका है. उसका दुःख वो कमजोर को डराकर कम करना चाहते हैं,इसलिए वो किसी लीडर के पिछलग्गू बन जाते हैं. वो कूपमंडूक की तरह ना कुछ नया देखनाचाहते हैं और ना सीखना.मेरा ये गीत उन 'मुखौटे वाले मेंढकों' को समर्पित है. 'हे मेंढक मुखौटे वाले! मनमें तेरे कितने छाले?'हे मेंढक मुखौटे वाले! मन में तेरे कितने छाले?फूटे छाले छिपा-छिपाकर, अपने भीतर रखता है, दर्द नहीं दबता जब तेरा, सबको गाली बकताहै.बेमुंह का मेंढक, उस पर भी सत्ता का अनुयायी है, सहज तरह से बोलूं तो, तू हरिराम सानाई है. रीढ़ से खाली कॉकरोच का, धुर सफेद सा खून है तू, घने अंधेरे कमरे में, खुदपर हंसती परछाई है. लाश देखकर अपनी, खुद ही तू सियार सा हंसता है, दर्द नहीं दबताजब तेरा, सबको गाली बकता है.हे मेंढक मुखौटे वाले! मन में तेरे कितने छाले?लीडर की बंदूक को कंधा दे, तू वही शिखंडी है, और वो पोछे जिससे पिछवाड़ा, तू ऐसीझंडी है. वो सत्ता की कुल्फी खाकर, तुझको छू-छू करता है, चूस रहा है जिसको तू, वोउस कुल्फी की डंडी है. पीड़ा के संताप में प्यारे, रोज तू कितना धंसता है, दर्द नहींदबता जब तेरा, सबको गाली बकता है.हे मेंढक मुखौटे वाले! मन में तेरे कितने छाले?रूह पर तेरी कितने फोड़े और कितनों से पीप बहे? मन का तेरे तट टूटा या भावनाओं केद्वीप बहे? दिल की चमड़ी के टांके उधड़े या बुद्धि उबल गई? ऐसे कितने सपने थे, जो आकरतेरे समीप बहे? मुस्तक़बिल तेजाब है तीखा, तुझ पर रोज बरसता है? दर्द नहीं दबता जबतेरा, तभी तू गाली बकता है?हे मेंढक मुखौटे वाले! मन में तेरे कितने छाले?--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें: दिल एक कुत्ता है, गया है बागों में, पड़े जो पत्थर फिर, गली को लौटेगा'सबसे ख़ूबसूरत सपने वो होते हैं, जिनके टूटने का आपको पूरा यकीन हो'