The Lallantop
Advertisement

ग़ज़ल को मां तक लाने वाले की मां चली गई

मुनव्वर राना को जो शोहरत हासिल हुई, उसके पीछे मां पर लिखे उनके शेर रहे. उनकी मां के जाने के बाद उनके ये शेर बारहा याद आते हैं.

Advertisement
pic
10 फ़रवरी 2016 (अपडेटेड: 9 फ़रवरी 2016, 04:56 AM IST)
Img The Lallantop
मुनव्वर राना
Quick AI Highlights
Click here to view more
मां पर सबसे मकबूल शेर कहने वाले की मां चली गई. शायर मुनव्वर राना की मां आयशा ख़ातून ने लखनऊ के सहारा अस्पताल में आखिरी सांस ली. लंबे समय से उन्हें किडनी की बीमारी थी. https://twitter.com/MunawwarRana/status/697007352629690368 मुनव्वर राना को जो शोहरत, जो फरोग़, जो एहतेराम हासिल हुआ, उसके पीछे मां पर लिखे उनके शेर रहे. स्याह दौर जब भी आए, मां ही उनके लिए पाक़ीज़ा रौशनी का ख़जाना बनीं. जानने वाले जानते हैं कि मुनव्वर का ख़ुद पर भरोसा जल्दी नहीं चटकता. लेकिन कभी कोई खरोंच भी इस पर आई तो वे दौड़कर लखनऊ से रायबरेली पहुंच गए. ख़राब दौर में मुनव्वर हमेशा कहते रहे, मां के पास आया हूं. सब ठीक हो जाएगा. आज मुनव्वर नि:शब्द हैं. हम भी. इस मौके पर हम सबको यही मुनासिब होगा कि मुनव्वर के मां पर लिखे अशआर फिर से याद किए जाएं.

1

अब देखिए कौन आए जनाज़े को उठाने यूं तार तो मेरे सभी बेटों को मिलेगा

2

1

3

हो चाहे जिस इलाक़े की ज़बां बच्चे समझते हैं सगी है या कि सौतेली है मां बच्चे समझते हैं

4

हवा दुखों की जब आई कभी ख़िज़ां की तरह मुझे छुपा लिया मिट्टी ने मेरी मां की तरह

5

सिसकियां उसकी न देखी गईं मुझसे ‘राना’ रो पड़ा मैं भी उसे पहली कमाई देते

6

2

7

भेजे गए फ़रिश्ते हमारे बचाव को जब हादसात मां की दुआ से उलझ पड़े

8

लबों पे उसके कभी बद्दुआ नहीं होती बस एक मां है जो मुझसे ख़फ़ा नहीं होती

9

3

10

जब तक रहा हूं धूप में चादर बना रहा मैं अपनी मां का आखिरी ज़ेवर बना रहा

11

4

12

ऐ अंधेरे! देख ले मुंह तेरा काला हो गया मां ने आंखें खोल दीं घर में उजाला हो गया

13

5

14

मेरी ख़्वाहिश है कि मैं फिर से फ़रिश्ता हो जाऊं माँ से इस तरह लिपट जाऊँ कि बच्चा हो जाऊं

15

जब भी देखा मेरे किरदार पे धब्बा कोई देर तक बैठ के तन्हाई में रोया कोई

16

यहीं रहूंगा कहीं उम्र भर न जाऊंगा ज़मीन मां है इसे छोड़ कर न जाऊंगा

17

6

18

मेरा बचपन था मेरा घर था खिलौने थे मेरे सर पे माँ बाप का साया भी ग़ज़ल जैसा था

19

7

20

बुज़ुर्गों का मेरे दिल से अभी तक डर नहीं जाता कि जब तक जागती रहती है माँ मैं घर नहीं जाता

21

8

Advertisement

Advertisement

()