क्या असम के लोगों को PM मोदी का ये तोहफा वहां बीजेपी को और बड़ी जीत दिला पाएगा?
शनिवार को पीएम मोदी अपने असम दौरे की शुरुआत करेंगे
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PM मोदी असम में 1.6 लाख लोगों को ज़मीन का पट्टा देंगे. वहीं असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल कह चुके हैं कि ये बात जाति, माटी, भेती की है. (फाइल फोटो- PTI)
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार 23 जनवरी से असम का दौरा शुरू करेंगे. इसके पहले दिन पीएम नरेंद्र मोदी असम के शिवसागर जिले स्थित जेरेंगा पठार में 1.6 लाख लोगों को जमीन आवंटन प्रमाणपत्र वितरित करेंगे. चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आदिवासी समुदाय को जमीन का पट्टा देना बीजेपी की चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. इसकी वजह साफ है. असम की राजनीति में वहां के आदिवासी समुदाय की भूमिका काफी महत्वपूर्ण बताई जाती है.
चुनाव से पहले सरकार की भूमि नीति
असम की बीजेपी सरकार ने नई भूमि नीति बनाई है. इसके तहत वह भूमिहीन लोगों को जमीन पर पट्टा आवंटन प्रमाणपत्र देने का काम कर रही है. असम में 2016 में 5.75 लाख भूमिहीन परिवार थे. जबसे BJP के नेतृत्व वाली सर्बानंद सोनोवाल की सरकार आई है, तब से राज्य में 2.28 लाख आवंटन प्रमाणपत्र दिए गए हैं. अब PM मोदी 1.6 लाख लोगों को जमीनी पट्टा देने के अभियान की शुरुआत करेंगे. ये असम के आदिवासियों के बीच एक भरोसा जगाने की कोशिश भी है कि सरकार उनको जमीन देने के प्रति गंभीर है.
पीएम मोदी का कार्यक्रम शिवसागर जिले में जेरेंगा पठार में कराया जा रहा है. इसके पीछे भी BJP की रणनीति बताई जाती है. जेरेंगा पठार का संबंध असम के पूर्ववर्ती अहोम साम्राज्य से है और यहां बड़ी आबादी अधिकतर आदिवासी, अत्यंत पिछड़ा वर्ग और चाय बागान से जुड़े श्रमिक हैं. अवैध अप्रवासी के चलते यहां की जनजातीय के लोग परेशान थे. राज्य सरकार नई भूमि नीति के तहत जनजातीय मूल के लोगों को जमीन उपलब्ध करा रही है और उनका भरोसा जीतने की कोशिश कर रही है.
असम का शिवसागर, जहां PM मोदा का कार्यक्रम होना है. (फोटो- PTI)
जाति, माटी, भेती असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल का कहना है कि BJP सरकार ये सब ‘जाति, माटी और भीती’ की रक्षा के लिए कर रही है. जाति से यहां मतलब है असम के ट्राइबल्स से, पिछड़ी जातियों से. माटी से मतलब है उनकी ज़मीनों से. और भीती का मतलब है मूल. यानी इन्हें असम के मूल नागरिक कहकर संबोधित किया जा रहा है. क्यों अहम है असम? 2016 के विधानसभा चुनाव में BJP ने 126 सीटों में से 60 पर जीत हासिल की थी. अपने सहयोगी असम गण परिषद (एजीपी) और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) के साथ मिलकर ये संख्या 86 सीटों तक पहुंचाई. इस तरह असम में पहली बार BJP की सरकार बनी. ये पूर्वोत्तर की राजनीति में पैंठ बनाने के लिहाज से काफी अहम साबित हुआ. अब BJP दोबारा और बड़ी जीत हासिल कर असम को अपना गढ़ भी बनाना चाहेगी.
पीएम मोदी का कार्यक्रम शिवसागर जिले में जेरेंगा पठार में कराया जा रहा है. इसके पीछे भी BJP की रणनीति बताई जाती है. जेरेंगा पठार का संबंध असम के पूर्ववर्ती अहोम साम्राज्य से है और यहां बड़ी आबादी अधिकतर आदिवासी, अत्यंत पिछड़ा वर्ग और चाय बागान से जुड़े श्रमिक हैं. अवैध अप्रवासी के चलते यहां की जनजातीय के लोग परेशान थे. राज्य सरकार नई भूमि नीति के तहत जनजातीय मूल के लोगों को जमीन उपलब्ध करा रही है और उनका भरोसा जीतने की कोशिश कर रही है.
असम का शिवसागर, जहां PM मोदा का कार्यक्रम होना है. (फोटो- PTI)जाति, माटी, भेती असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल का कहना है कि BJP सरकार ये सब ‘जाति, माटी और भीती’ की रक्षा के लिए कर रही है. जाति से यहां मतलब है असम के ट्राइबल्स से, पिछड़ी जातियों से. माटी से मतलब है उनकी ज़मीनों से. और भीती का मतलब है मूल. यानी इन्हें असम के मूल नागरिक कहकर संबोधित किया जा रहा है. क्यों अहम है असम? 2016 के विधानसभा चुनाव में BJP ने 126 सीटों में से 60 पर जीत हासिल की थी. अपने सहयोगी असम गण परिषद (एजीपी) और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) के साथ मिलकर ये संख्या 86 सीटों तक पहुंचाई. इस तरह असम में पहली बार BJP की सरकार बनी. ये पूर्वोत्तर की राजनीति में पैंठ बनाने के लिहाज से काफी अहम साबित हुआ. अब BJP दोबारा और बड़ी जीत हासिल कर असम को अपना गढ़ भी बनाना चाहेगी.

