फोन टैपिंग एक बार फिर चर्चा में है. ऐसी रिपोर्ट्स हैं कि भारत में कुछ चर्चित औरमहत्वपूर्ण लोगों के फोन पेगासस नाम के मैलवेयर के जरिए टैप किए गए हैं. इनरिपोर्ट्स के आधार पर विपक्ष ने केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है. वहीं,सरकार की तरफ से केंद्रीय दूरसंचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव नेइन खबरों का खंडन किया. उधर, पेगासस बनाने वाली इजरायली सर्विलांस कंपनी NSO ग्रुपभी इन खबरों को गलत बता चुकी है.बहरहाल, पेगासस के जरिए फोन टैपिंग करने के दावों में कितना दम है ये शायद आगे चलकरपता चले. फिलहाल हम आपको बताने जा रहे हैं कि भारत में कब और कौन आपके फोन को टैपकर सकता है. फोन टैपिंग के मामले में निजता के अधिकार का क्या होता है औरगैर-कानूनी तरीके से फोन टैप करने पर क्या सजा हो सकती है.देश के कई पत्रकारों, नेताओं और व्यापारियों के फोन टैप किए जाने का दावा किया गयाहै. (सांकेतिक तस्वीर)कब फोन टैप किया जा सकता है? जिस मोबाइल को आप निजी मानते हैं. जिसकी जानकारी आपअपने जीवनसाथी या करीबी दोस्त के साथ भी शेयर नहीं करते, उसकी हरेक फाइल को कोईकहीं किसी कंप्यूटर पर खोल कर देख सकता है. हर फोन कॉल को सुन सकता है, मेसेज पढ़सकता है, फोटो-वीडियो देख सकता है. आप कहेंगे कि आपके पास निजता का अधिकार है. सहीबात है. लेकिन ये अधिकार राष्ट्र की सुरक्षा और उसके हितों से ऊपर नहीं है. इसलिएविशेष परिस्थितियों में फोन टैप कराए जा सकते हैं.हां, इतना जरूर है कि जो एजेंसी फोन टैप करना चाहेगी उसे ऐसा करने का कारण स्पष्टकरना होगा. और जिसका फोन टैप किया जाना है, उसके राज्य के गृह सचिव से परमिशन लेनीहोगी. केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को भारतीय टेलीग्राफिक अधिनियम 1885 की धारा 5(2) के तहत टेलीफोन को इंटरसेप्ट करने का भी अधिकार दिया गया है. फोन टैपिंग कीइजाजत 60 दिनों के लिए दी जाती है जिसे विशेष परिस्थितियों में 180 दिन तक के लिएबढ़ाया जा सकता है. निजता का अधिकार फोन टैपिंग रोक नहीं सकता? भारतीय संविधान केतहत हमें कई मूल अधिकार मिले हैं. लेकिन निजता के अधिकार को लेकर लंबे समय तकअस्पष्टता रही. संविधान के अनुच्छेद 19, 20, 21 के अधिकारों में इसे अंतर्निहितमाना गया है. सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की बेंच ने अपने निर्णय में निजता को मौलिकअधिकार करार देते हुए कहा था कि इसे आर्टिकल 21 के तहत संरक्षण प्राप्त है. जीवनजीने के अधिकार में ही निजता की स्वतंत्रता भी आती है. इस स्वतंत्रता में बेवजह केहस्तक्षेप को गलत बताया गया है. इस वजह से कोई भी आपकी व्यक्तिगत बातचीत को सुन याटैप नहीं कर सकता. हालांकि सुरक्षा एजेंसियों को ‘विशेष परिस्थितियों’ में निजता केअधिकार को सीमित करने के अधिकार मिले हुए हैं.फोट टैप कराने के लिए इजाजत लेनी होती है और कारण भी बताना होता है. फोटो सोर्स-आजतककौन सी एजेंसियां टैप कर सकती हैं फोन? 19 नवंबर 2019 को केंद्र सरकार ने लोकसभामें जानकारी दी कि देश में 10 एजेंसियां ऐसी हैं जो फोन टैप कर सकती हैं. हालांकिऐसा करने के लिए इन एजेंसियों को केंद्रीय गृह सचिव की मंज़ूरी लेनी होती है.तत्कालीन केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी ऐक्ट,2000 का जिक्र करते हुए बताया था कि इस अधिनियम की धारा 69 केंद्र या राज्य सरकारको ये अधिकार देती है कि देश की संप्रभुता या अखंडता के हित में वो किसी कंप्यूटरके जरिए जनरेट, ट्रांसमिट या रिसीव होने वाले डेटा, या उसमें पहले से स्टोर डेटा परनज़र रख सकती है, उसे हटवा सकती है या डीकोड करवा सकती है.केंद्र सरकार के मामले में केंद्रीय गृह सचिव को और राज्य सरकार के मामले मेंसंबंधित राज्य सरकार के गृह सचिव से इसकी अनुमति लेनी होती है. केंद्र सरकार में जोदस एजेंसियां फोन टैप कर सकती हैं, वे हैं-#1- इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB)#2- सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टीगेशन (CBI)#3- एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED)#4- नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB)#5- सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस (CBDT)#6- डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यु इंटेलिजेंस (DRI)#7- नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी (NIA)#8- रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (R&W)#9- डायरेक्टरेट ऑफ सिग्नल इंटेलिजेंस (DSI)#10- दिल्ली पुलिस कमिश्नर (DPC) गैर-कानूनी टैपिंग की सजा क्या है? जैसा हमने आपकोबताया कि टैपिंग से पहले संबंधित एजेंसी को कारण बताना होगा और इजाजत लेनी होगी.लेकिन मान लें कि अगर कोई टैपिंग कर रहा है और उसने इजाजत व कारण नहीं बताया है, तबपीड़ित ऐसी स्थिति में मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज करा सकता है. वह पुलिस मेंभी इसकी FIR दर्ज करा सकता है. इसके अलावा पीड़ित भारतीय टेलीग्राफिक अधिनियम कीधारा 26 (b) के तहत कोर्ट की शरण भी ले सकता है. आरोप साबित होने पर दोषी को 3 सालकी तक सजा हो सकती है.