फ्रांस के उपन्यासकार प्राउस्ट ने कहा था, ''जिंदगी उन सबको सुंदर लगनी चाहिए,जिन्हें मृत्यु कभी भी घेर सकती है. यानी उन सबको, जिन्हें हम 'मानवजाति' कहतेहैं.''शायद यही वजह है कि लोग मृत्यु 'अफॉर्ड' नहीं कर पाते. उनकी चाह होती है कि जिनसेवो जुड़े हैं उन्हें कभी खोया ना जाए. उनसे बात की जाए. जापान में यही चाह लोगों कोएक सफेद रंग के टेलीफोन बूथ तक खींच लाती है. जापान के पूर्वी भाग में ओत्सुची शहरहै. प्रशांत महासागर के किनारे. यहीं पर है वो बूथ.टेलीफोन बूथ, फोटो साभार- 'The Phone of the Wind' Documentaryयहां एक छोटा सा बच्चा अपने दादा से फ़ोन पर बात कर रहा है. कहता है, ''मैं चौथीक्लास में पहुंच गया हूं. इस साल डायना दूसरी क्लास में पहुंच जाएगी.'' इसके बादबच्चा डायना को फ़ोन पकड़ा देता है. बच्ची फ़ोन पर कहती है, ''ग्रैंडपा मैंने अपना होमवर्क कर लिया है. हम सब बढ़िया हैं. ठीक है. बाय बाय.''इस बच्चे को अब भी लगता है कि वो अपने दादा की आवाज़ सुन सकता है. हालांकि वो ऐसानहीं कर सकता. जापान में 2011 में आई सुनामी में उसके दादा की मौत हो गई थी.2015 में आई जापान की नेशनल पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक इस सुनामी में 15 हजार सेज्यादा लोग मारे गए थे. ओत्सुची शहर में काफी नुकसान हुआ था. लोगों ने अपनेपरिवारों को खोया था. इसके बाद इतारु सासाकी नाम के आदमी ने ये टेलीफोन बूथ लगवायाथा.इस बूथ में एक पुराना गोल डायल वाला टेलीफोन रखा है. इसे 'विंड फ़ोन' नाम दिया गयाहै. फ़ोन बंद ही रहता है. जिनको सुनामी में मारे गए अपने लोगों की याद आती है वोयहां उनसे 'बात' करने आते हैं. इमोशनल हो जाते हैं. शिकायतें करते हैं. सवाल करतेहैं. ये बातचीत एकतरफ़ा होती है. सिर्फ एक सिंबॉलिक बातचीत.बूथ में रखा टेलीफोन, फोटो साभार- The Phone of the Windलोगों को लगता है इस एकतरफा बातचीत से हमारा दिल हल्का होता है. जो बात हम उनसेकहना चाहते हैं या नहीं कह पाए, हो सकता है उन तक पहुंच जाती होगी. हमें यही उम्मीदहै.कैसे हुई शुरुआत?जिस गार्डन में ये बूथ लगा है, इतारु सासाकी वहां की देखभाल करते थे. सुनामी मेंउनके भाई की मौत हो गई थी. इसके बाद सासाकी ने अपने गार्डन में ये टेलीफोन बूथलगवाया ताकि वो अपने भाई से बात कर सकें. सासाकी जब कभी दुखी होते थे या उन्हें भाईकी याद आती थी वो इस फ़ोन में आकर फुसफुसाते थे. धीरे-धीरे ये बात दूसरे इलाकों तकभी पहुंच गई. दूसरे लोग यहां आने लगे. यहां तीन सालों में दस हजार से ज्यादा लोग आचुके थे. इस टेलीफोन बूथ पर NHK World ने 'The Phone of the Wind' नाम से एक डॉक्यूमेंट्रीबनाई थी. इस डाक्यूमेंट्री में लोगों को इस बूथ में बात करते हुए दिखाया गया है.यहां एक बूढ़ा बाप अपने बड़े बेटे से बात करने आता है. वो उसकी फोटो भी दिखाता है.फोटो साभार- The Phone of the Windएक पिता अपनी बच्ची से बात करते हुए कहता है, ''पांच साल हो गए इस घटना को. अगर तुममेरी आवाज सुन सकती हो तो प्लीज सुनो.'' वो रोने लगता है और कहता है, ''मुझे समझनहीं आता मैं क्यों जी रहा हूं. इस्से, प्लीज एक बार मुझे डैडी कहो. मैंने एक घरबनवाया है लेकिन तुम लोगों के बिना उसका कोई मतलब नहीं है. मैं तुम्हारी आवाज़ सुननाचाहता हूं लेकिन मैं ऐसा नहीं कर सकता.''रेन कोज़की, 15 साल के हैं. उनके पापा ट्रक ड्राईवर थे. सुनामी में उनकी मौत हो गईथी. रेन अपने पापा से बात करते हुए कहते हैं, ''हम जो कुछ भी कर सकते हैं कर रहेहैं, इसलिए आप चिंता मत कीजिए. आप कैसे हैं? मैं आपसे बस एक चीज पूछना चाहता हूं.आपको इस तरह जाना क्यों पड़ा?''पूरी डॉक्यूमेंट्री यहां देखी जा सकती है-https://www.youtube.com/watch?v=ke-H5EEqvRs--------------------------------------------------------------------------------ये स्टोरी निशांत ने की है.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें-आपका आईफोन बंदूक बन जाता है क्या?क्या आपको भी फोन में ब्लास्ट का डर सताता है? जानिए क्या करें और क्या न करें!