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श्रीजी महल से नंदगांव पहुंचा फाग का निमंत्रण!

पति पत्नी और वो कैमरा वाली जोड़ी ने इस बार नंदगांव की होली की तस्वीरें और किस्से भेजे हैं.

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केतन बुकरैत
23 मार्च 2016 (Updated: 12 जुलाई 2016, 08:10 PM IST)
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पति पत्नी और वो कैमरा की सातवीं किस्त. आशीष और आराधना ने होली पर फ़ोटो भेजनी शुरू की है. आशीष फ़ोटो खेंचते हैं और आराधना राइटर हैं. पिछली बार उन्होंने बरसाने की होली के बारे में बताया था. इस बार उन्होंने नंदगांव की होली के बारे में लिख भेजा है.
  दूसरे दिन नंदगाँव में होली खेली जाती है. नंदगांव मतलब 'कृष्ण का घर'. नंदगांव नन्दीस्वरा पहाड़ी पर बसा है. कहा जाता है कि शिव ने तपस्या करके कृष्ण से वरदान माँगा कि मुझे वृन्दावन में पहाड़ बना दो ताकि गोपियाँ अपने पैरों की धूल छोड़ते हुए मुझपर चढ़ती -उतरती रहें. कृष्ण ने उनकी तमन्ना पूरी की और शिव नन्दीस्वरा पहाड़ी बन गए. इसी नन्दीस्वरा पहाड़ी के ऊपरी छोर पर बना हुआ है 'कृष्ण-मन्दिर'. यहाँ कृष्ण और बलराम के हाथ में पिचकारी बनी हुई है. 1.1- 1 यहां जिस प्रकार की होली होती है उसमें हर कोई कृष्ण और राधा होता है. मन्दिर में आने वाली हर स्त्री राधा, और पुरुष कृष्ण. फ़र्क नहीं पड़ता कि उसकी उम्र कितनी है. हर किसी को मन्दिर के पुरोहित पिचकारियों और गुलाल की थालों से रंग अर्पित कर रहें हैं. 2. 2 3. 3   नंदगांव की होली बरसाने से बिल्कुल अलग है. यहां होली गलियों में ना होकर 'कृष्ण के आँगन' में होती है. सिर्फ होली नहीं खेली जाती है बल्कि साथ में ख़ूब खेल-तमाशे भी चलते रहते हैं. ढोल-मंजीरे ने गज़ब माहौल बनाया हुआ होता है. एक तरफ़ बलदेव की मनपसंद कुश्ती चल रही होती है. दूसरी तरफ़ राधा-कृष्ण के बीच होने वाला कताई नृत्य (हाथों को क्रास में पकड़ कर घूमने वाला खेल). हर कोई इन चीज़ों का मज़ा ले रहा होता है. 4. 4   5. 5 6. 6 एक बात और जो काफ़ी अनोखी लगती है, कि यहाँ देश-विदेश से आए हुए ट्रांसजेंडर्स का जमावड़ा लगा होता है. सारे के सारे भाव-विह्वल से राधा-कृष्ण के रूप में परिवर्तित हो जाते हैं. 7. 7 8. 8 9. 9   हर तरफ़ हुड़दंग, उत्सव और उल्लास रहता है. चल बेटा सेल्फी ले ले रे टाइप माहौल. इन सबको क़ैद करने के लिए हज़ारों देसी-विदेशी फोटोग्राफर्स की भीड़ भी रहती है. और इन सबके साथ सबको इंतज़ार रहता है राधा रानी के गाँव से आने वाले लोगों का. 10. 10   11. 11   12. 1   दोपहर के बाद हाथों में गेरुआ झंडा लेकर सभी लोग मन्दिर में प्रवेश करते हैं. झंडे के ऊपर कृष्ण का मुकुट और मोर पंख रहता है. पूरा माहौल शान्त हो जाता है. जैसे नंदगांव वाले कह रहें हों कि लो भई बरसाने वालों !अब ये उत्सव तुम्हारे हवाले. सभी लोग सबसे पहले ध्वज को श्री-कृष्ण की मूर्ति से स्पर्श कराते हैं. 13. 12   इसके बाद वो सभी भजन-कीर्तन में जुट जाते हैं और पूरा नंदगांव उनके ऊपर गुलाल, फूलों से बने पानी वाले रंग, गुलाब की पंखुड़ियां और साथ में केशू के फूलों की बारिश करता है. उस समय हर और सब कुछ सिन्दूरी लाल रंग का हो जाता है. 14. 14 15. 18 16. 19
आशीष और आराधना की बरसाने वाली होली.

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