पति पत्नी और वो कैमरा की सातवीं किस्त. आशीष और आराधना ने होली पर फ़ोटो भेजनी शुरूकी है. आशीष फ़ोटो खेंचते हैं और आराधना राइटर हैं. पिछली बार उन्होंने बरसाने कीहोली के बारे में बताया था. इस बार उन्होंने नंदगांव की होली के बारे में लिख भेजाहै.-------------------------------------------------------------------------------- दूसरे दिन नंदगाँव में होली खेली जाती है. नंदगांव मतलब 'कृष्ण का घर'. नंदगांवनन्दीस्वरा पहाड़ी पर बसा है. कहा जाता है कि शिव ने तपस्या करके कृष्ण से वरदानमाँगा कि मुझे वृन्दावन में पहाड़ बना दो ताकि गोपियाँ अपने पैरों की धूल छोड़तेहुए मुझपर चढ़ती -उतरती रहें. कृष्ण ने उनकी तमन्ना पूरी की और शिव नन्दीस्वरापहाड़ी बन गए. इसी नन्दीस्वरा पहाड़ी के ऊपरी छोर पर बना हुआ है 'कृष्ण-मन्दिर'.यहाँ कृष्ण और बलराम के हाथ में पिचकारी बनी हुई है. 1. यहां जिस प्रकार की होलीहोती है उसमें हर कोई कृष्ण और राधा होता है. मन्दिर में आने वाली हर स्त्री राधा,और पुरुष कृष्ण. फ़र्क नहीं पड़ता कि उसकी उम्र कितनी है. हर किसी को मन्दिर केपुरोहित पिचकारियों और गुलाल की थालों से रंग अर्पित कर रहें हैं. 2. 3. नंदगांवकी होली बरसाने से बिल्कुल अलग है. यहां होली गलियों में ना होकर 'कृष्ण के आँगन'में होती है. सिर्फ होली नहीं खेली जाती है बल्कि साथ में ख़ूब खेल-तमाशे भी चलतेरहते हैं. ढोल-मंजीरे ने गज़ब माहौल बनाया हुआ होता है. एक तरफ़ बलदेव की मनपसंदकुश्ती चल रही होती है. दूसरी तरफ़ राधा-कृष्ण के बीच होने वाला कताई नृत्य (हाथोंको क्रास में पकड़ कर घूमने वाला खेल). हर कोई इन चीज़ों का मज़ा ले रहा होता है. 4. 5. 6. एक बात और जो काफ़ी अनोखी लगती है, कि यहाँ देश-विदेश से आए हुएट्रांसजेंडर्स का जमावड़ा लगा होता है. सारे के सारे भाव-विह्वल से राधा-कृष्ण केरूप में परिवर्तित हो जाते हैं. 7. 8. 9. हर तरफ़ हुड़दंग, उत्सव और उल्लास रहताहै. चल बेटा सेल्फी ले ले रे टाइप माहौल. इन सबको क़ैद करने के लिए हज़ारोंदेसी-विदेशी फोटोग्राफर्स की भीड़ भी रहती है. और इन सबके साथ सबको इंतज़ार रहता हैराधा रानी के गाँव से आने वाले लोगों का. 10. 11. 12. दोपहर के बाद हाथों मेंगेरुआ झंडा लेकर सभी लोग मन्दिर में प्रवेश करते हैं. झंडे के ऊपर कृष्ण का मुकुटऔर मोर पंख रहता है. पूरा माहौल शान्त हो जाता है. जैसे नंदगांव वाले कह रहें होंकि लो भई बरसाने वालों !अब ये उत्सव तुम्हारे हवाले. सभी लोग सबसे पहले ध्वज कोश्री-कृष्ण की मूर्ति से स्पर्श कराते हैं. 13. इसके बाद वो सभी भजन-कीर्तन मेंजुट जाते हैं और पूरा नंदगांव उनके ऊपर गुलाल, फूलों से बने पानी वाले रंग, गुलाबकी पंखुड़ियां और साथ में केशू के फूलों की बारिश करता है. उस समय हर और सब कुछसिन्दूरी लाल रंग का हो जाता है. 14. 15. 16.-------------------------------------------------------------------------------- आशीष और आराधना की बरसाने वाली होली.