The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • Lallankhas
  • pati patni aur wo camera, a web series on banaras by aradhana singh and ashish singh for the lallan top

मैगी नाम का अंग्रेज, बनारस में दिखाता करतब!

पति पत्नी और वो कैमरा 2: बनारस के घाटों की एक और मजेदार सत्य कहानी तस्वीरों समेत

Advertisement
pic
17 फ़रवरी 2016 (अपडेटेड: 12 जुलाई 2016, 08:14 PM IST)
Img The Lallantop
अस्सी घाट पर खेल दिखाते फिरंगी. सभी फोटोः आशीष सिंह
Quick AI Highlights
Click here to view more
पति पत्नी और वो कैमरा की दूसरी किस्त आपके सामने है. इस सीरीज में पति हैं डॉ. आशीष सिंह. जो शौकिया फोटोग्राफर हैं. पत्नी हैं आराधना. जो तस्वीरों के कैप्शन को कहानी सा विस्तार देती हैं. और जो कैमरा है. वो इनके इश्क राग का साथ देता एक शानदार भोंपा है. aradhana singh picनैरेटरः आराधना सिंह
बनारस के घाटों पर जितने हम दिखते हैं, उतने ही विदेशी। घाट के चबूतरों पर बैठ वायलिन बजाते। योग-ध्यान करते। महंगे कैमरों में बनारस को समेटते। देसी लावारिस कुत्तों को दूध-बिस्कुट खिलाते। चूड़ी बिन्दी बेचती सात आठ साल की लड़कियों से फ़ैशन टिप्स लेते। किसी अघोरी के साथ दम मारते। किसी पंडे के संग मोक्ष प्राप्ति के लिए कर्मकांड करते। हर आने जाने-वाले को नमस्ते करते। नावों पर बैठ साइबेरियाई पक्षियों को दाना खिलाते। घाट की गन्दी सीढ़ियों पर पसरे। गंगा में खड़े होकर जल देते। आरती में ताली पीटते। हर हर महादेव का नारा लगाते। बनारस को टटोलते खंगालते। विदेशी। और तिस पर भी बनारस का अस्सी घाट। ये वैसे तो हमेशा से लाइमलाइट में रहा है पर तीन सालों में इसके दिन कुछ ज्यादा ही फिर गए हैं। माने कि इसकी साफ़-सफ़ाई पर काफ़ी काम हुआ है और अभी हो भी रहा है। ज़्यादातर विदेशी जिन्हें यहां दो-तीन महीने रहना है, उन्हें यहां के मोहल्लों में सस्ते ठिकाने मिल जाते हैं। बी.एच़.यू. के पास होने के कारण भी यहां रात के दस बजे तक ख़ूब रौनक़ रहती है। बाक़ी तो "काशी का अस्सी" और उस पर बनी "मोहल्ला अस्सी" में यहां की ख़ूब डिटेलिंग है। kashi ka assi एक शाम को लगभग सात बजे अस्सी पर मंडराते हुए हमें लगभग सौ-डेढ़ सौ लोगों का एक हुजूम गोला बनाए नजर आता है। कोई सीढ़ियों पर खड़ा है। किसी को बैठने के लिए ज़गह मिल गई है। कोई चबूतरे पर खड़ा है। कोई पीछे से उचक-उचक कर देखने की कोशिश कर रहा है। हम भी धीरे-धीरे जगह बनाते हुए वहां पहुंचते हैं। देखते हैं कि सात-आठ विदेशियों का एक ग्रुप जो जगलिंग में पारंगत हैं, यहां अपने करतब दिखा रहा है। इनमें पांच लड़के और तीन लड़कियां हैं। इनकी उम्र 17 से 25 के बीच होगी। इनके साथ कुछ देसी भी शामिल हैं. नौ से 17 साल तक के पास के मोहल्लों के बच्चे। जो निम्नमध्यवर्गीय परिवारों से हैं। ये पूरा का पूरा ग्रुप अपना खेल ख़ूब उत्साह से दिखाता है। फिर उनमें से एक आदमी काली हैट लेकर सबके पास जाता है। बोलता है, "नमस्ते! योर टिप्स विल बी एप्रिशीएटेड"। और जैसी जिसकी श्रद्धा के हिसाब से लोग उसमें पैसे डाल दे रहे हैं। बदले में थैंक्यू पा रहे हैं। खेल बहुत मज़ेदार है,सारे बनारसी उनके उत्साह में उनका ख़ूब साथ देते हैं english juggler at banaras assi ghaat
"वाह! कमाल हौ गुरु" "मैंगो (ग्रुप लीडर का नाम मैंगो है) यू आर अमेंजिंग" "बस एक चिंगारी लगी कि स्टेला! देखा त तोहरे बलवा में आग ना पकड़ ले" "बाप रे! गज़ब खेला है गुरू "
करतब के हिसाब से ख़ूब तालियां। ख़ूब आवाज़ें आ रहीं हैं। जितना मज़ा देखने वालों को आ रहा है, उतना ही करतब दिखाने वालों को भी। लगभग एक घंटे के बाद खेल ख़त्म हो जाता है। सब अपने-अपने रास्ते चल देते हैं। अब मैंगो और उसके साथी खेल में मिले पैसे गिन रहे हैं। उनमें से एक लड़के गणेश से हम पूछते हैं कि ये कहां से आए हैं. वह बताता है, "मैंगो इंग्लैंड से है बाक़ी के सारे अमेरिका से। मैंगो ने ही सबको ट्रेन किया है" तभी मैंगो गणेश को आवाज़ देता है और वह हँसते हुए जुटे पैसों से पार्टी करने उनके बीच चला जाता है। मैं इन भारतीय बच्चों और उन विदेशियों के साथ में ढूँढने की कोशिश करती हूँ कि कौन किसको प्रभावित कर रहा है? दो दिन के बाद हमें विदेशियों का ये ग्रुप फिर किसी घाट पर जगलिंग करता नजर आया. assi ghaat art show उस दिन केदार घाट की सीढ़ियों पर बैठे बैठे मैंने गूगल पर सर्च किया. किसने लिखा था कि "भारत साधुओं, सपेरों और मदारियों का देश है।" सर्च में मुझे कहीं कोई प्रमाणिक स्त्रोत नहीं मिलता। फिर मैं मैंगो को देखती हूं। वह अभी भी मदारी का खेल (जगलिंग) दिखा रहा है।  

Advertisement

Advertisement

()