एक आशिक का घर लौट आना किसे अच्छा नहीं लगता
27 साल की उम्र में अपनी माशूका से मिलने पकिस्तान पहुंच गए थे हामिद. छह साल की जेल के बाद आज घर लौट आए हैं.

नींद ना वेखे बिस्तरा, भुक्ख ना वेखे मांस मौत ना वेखे उमर नूं, इश्क ना वेखे जात - बुल्ले शाह
हाजी अली के शहर बंबई का एक लड़का था. उमर 27 साल थी. उसे एक लड़की से प्यार हो गया. लड़की बाबा फरीद के मुल्क की थी. वही मुल्क, जिसे हम दिल में दुश्मन मान बैठे हैं. और सरकारी दस्तावेजों में 'मोस्ट फेवर्ड नेशन' कहते हैं. मुल्क का नाम है पकिस्तान. लड़का और लड़की इंटरनेट पर मिले. अब तक एक दूसरे को फायबर ऑप्टिक्स के जादू के जरिए ही देख पाए थे. दोनों चाहते थे कम से कम एक बार रूबरू हों.
इंटेलिजेंस के किसी भी आदमी से आप इस बात की तस्दीक कर सकते हैं. अगर आपको पाकिस्तान से अवैध तौर पर भारत आना है तो आसान रास्ता नेपाल और बांग्लादेश होकर है. और अगर भारत से पाकिस्तान जाना है तो दुबई के रास्ते जा सकते हैं या अफगानिस्तान के. दोनों तरफ से इस तरह की जो आवाजाही होती है उसमें एक चीज कॉमन होती है, 'नफरत'. लेकिन इस लड़के के साथ ऐसा नहीं था. वो अपने साथ मोहब्बत लेकर जा रहा था.
नवंबर 2012. भारत में गुजरात के रास्ते घुसे दहशतगर्द अजमल कसाब को फांसी पर लटकाया गया. मुंबई में 26/11 हमले में मारे गए 174 लोगों को आखिरकार न्याय मिला. ठीक इसी समय लड़का अफगानिस्तान पहुंच चुका था. लड़का सॉफ्टवेयर इंजीनियर था. उसने अपनी मां से कहा कि उसे अफगानिस्तान में नौकरी मिल गई है. अफगानिस्तान पहुंचने के बाद उसने पकिस्तान के फर्जी दस्तावेज तैयार किए और खैबर पख्तूनख्वा के रास्ते पाकिस्तान में घुस गया.
खैबर-पख्तूनख्वा में पेशावर से सटा एक जिला है कोहट. यहां से आगे पंजाब शुरू हो जाता है. यहां आते-आते पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी को उसकी मौजूदगी की खबर लग गई. कोहट में उसे पकड़ लिया गया. पूछताछ हुई. लड़के ने बताया कि वो भारत के मुंबई से आया है. नाम है हामिद निहाल अंसारी. आने का कारण 'जासूसी' नहीं, माशूका से मिलना है. खुफिया एजेंसी के लोगों के दिमाग में उसकी बताई वजह जंची नहीं. उन्होंने हामिद को फौजी अदालत के सामने पेश कर दिया. फौजी अदालत ने सितंबर 2015 में हामिद को गलत तरीके से पाकिस्तान में घुसने और फर्जी दस्तावेज बनाने का दोषी पाया. उसे तीन साल की सजा सुनाई गई.

भारतीय पत्रकारों से बात करते हुए पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान
30 नवंबर 2018. भारत के कुछ पत्रकारों से इस्लामाबाद में बातचीत कर रहे थे. इस दौरान इंडिया टुडे टेलीविजन के सलाहकार संपादक राजदीप सरदेसाई ने उनसे हामिद के मामले में जिक्र करते हुए कहा, "पिछले एक महीने में मेरी हामिद की मां से दो बार मुलाकात हुई. दोनों दफा वो फूट-फूटकर रो पड़ी. मैं आपसे निवेदन करता हूं कि आप इस मामले को इंसानी नजरिए से देखें."
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने इसके जवाब में कहा कि उनको इस मामले की जानकारी है और वो इस मामले में अपने अख्तियार में उनके लिए जो कर सकते हैं करेंगे.
18 दिसंबर को आखिरकार हामिद 6 साल की लम्बी जेल के बाद भारत लौटने में कामयाब रहे. उनके परिवार के लोग उन्हें लेने वाघा अटारी बॉर्डर पर पहुंचे हुए थे. भारत में घुसते ही हामिद ने यहां की जमीन को सजदा किया. इसके बाद वो अपनी मां के गले लगे. उस दौर में जब सरहद पर लगातार गोलियां चल रही हैं. एक आशिक का घर लौटना किसे अच्छा नहीं लगेगा. खबर की शुरुआत बुल्लेशाह के कलाम से हुए थी. जाते-जाते कबीर का एक कलाम पढ़ लीजिए.
"हमन है इश्क मस्ताना, हमन को होशियारी क्या ? रहें आजाद या जग से, हमन दुनिया से यारी क्या ?
जो बिछुड़े हैं पियारे से, भटकते दर-ब-दर फिरते, हमारा यार है हम में हमन को इंतजारी क्या ?
खलक सब नाम अपने को, बहुत कर सिर पटकता है, हमन गुरनाम साँचा है, हमन दुनिया से यारी क्या ?
न पल बिछुड़े पिया हमसे न हम बिछड़े पियारे से, उन्हीं से नेह लागी है, हमन को बेकरारी क्या ?
कबीरा इश्क का माता, दुई को दूर कर दिल से, जो चलना राह नाज़ुक है, हमन सिर बोझ भारी क्या ?"

