आतंकियों को घर में घुसकर मारेगा भारत, जानिए क्या है गृह मंत्रालय का नया सीक्रेट प्लान
'प्रहार' (PRAHAAR) भारत की पहली व्यापक काउंटर-टेररिज्म पॉलिसी है, जो आतंकवाद के खिलाफ 'प्रो-एक्टिव' और 'जीरो टॉलरेंस' की रणनीति पर आधारित है. यह नीति तकनीक (ड्रोन, स्मार्ट फेंसिंग), कूटनीति (इंटरपोल) और सीक्रेट ऑपरेशंस (ब्लैक सेल) के जरिए आतंकियों के नेटवर्क, उनकी फंडिंग और कट्टरपंथी सोच को जड़ से खत्म करने का रोडमैप तैयार करती है.

कल्पना कीजिए, सरहद पार एक कमरे में बैठा कोई शख्स लैपटॉप पर एक क्लिक करता है. इधर पंजाब के किसी खेत में ड्रोन से हथियारों की खेप गिरती है. या फिर कोई 'अदृश्य' हाथ डार्क वेब के जरिए किसी मासूम नौजवान के दिमाग में जहर घोल रहा है. दौर बदल चुका है, अब जंग सिर्फ बंदूकों से नहीं, बाइट्स और कोड्स से भी लड़ी जा रही है.
इसी 'बदलते खतरे' को भांपते हुए भारत ने अपनी ढाल और तलवार दोनों बदल ली हैं. गृह मंत्रालय (MHA) ने देश की पहली और सबसे आक्रामक काउंटर-टेररिज्म पॉलिसी 'प्रहार' (PRAHAAR) का ऐलान किया है. लल्लनखास की इस कड़ी में हम उन सीक्रेट्स को डिकोड करेंगे जो भारत को एक 'सुरक्षित किला' बनाने वाले हैं.
भूमिका: क्यों बदली भारत की रणनीति?भारत ने दशकों से आतंकवाद का दंश झेला है. 1993 के मुंबई धमाके हों या 26/11 का हमला या फिर पुलवामा का आतंकी अटैक. भारत अक्सर 'रिएक्टिव' (हमले के बाद कार्रवाई करने वाला) रहा है. यानी चोट लगने के बाद मरहम लगाने वाली सोच. लेकिन 2026 का भारत अब 'प्रो-एक्टिव' (हमले से पहले हमलावर को खत्म करने वाला) हो चुका है.
हाल ही में जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में सुरक्षा बलों ने हिजबुल्लाह के खूंखार कमांडर सैफुल्ला को ढेर किया. इस ऑपरेशन ने एक बात साफ कर दी कि आतंकी अब सिर्फ पहाड़ों में नहीं छिपे हैं, बल्कि वे एनक्रिप्टेड ऐप्स और सैटेलाइट फोन के जरिए विदेशों से गाइड हो रहे हैं. इसी 'हाइब्रिड टेररिज्म' को कुचलने के लिए गृह मंत्री ने 'प्रहार' (PRAHAAR) को पेश किया है. यह नीति भारत की "जीरो टॉलरेंस" नीति का लिखित प्रमाण है.
पुरानी सरकारों के समय समस्या यह थी कि आतंकवाद को सिर्फ एक 'लॉ एंड ऑर्डर' की समस्या माना जाता था. लेकिन 'प्रहार' इसे एक 'अस्तित्व की लड़ाई' मानता है. अब जवाब सिर्फ बंदूक से नहीं, बल्कि बैंक खातों को सीज करके, इंटरनेट के तारों को काटकर और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कूटनीतिक घेराबंदी करके दिया जा रहा है.
अक्सर सरकारी नाम भारी-भरकम होते हैं, लेकिन 'प्रहार' को एक मिशन की तरह डिजाइन किया गया है. इसके सात स्तंभ (P-R-A-H-A-A-R) भारत की नई सुरक्षा दीवार हैं. भारत सरकार के 'प्रहार' विजन डॉक्यूमेंट 2026 के मुताबिक हर अक्षर के अपने मायने हैं, जिन्हें एक-एक करके समझते हैं.
P - Prevention (रोकथाम): सबसे पहला काम है हमले को होने ही न देना. इसके लिए जमीन पर मौजूद मुखबिरों से लेकर अंतरिक्ष में घूम रहे सैटेलाइट्स तक, सबका डेटा एक जगह इकट्ठा होगा.
R - Responses (त्वरित प्रतिक्रिया): अगर कोई आतंकी घटना होती है, तो भारत का जवाब 'Swift and Proportionate' होगा. इसका मतलब है कि अब फाइलें नहीं घूमेंगी, कमांडरों के पास तुरंत फैसला लेने की ताकत होगी.
A - Aggregating Internal Capacities (एकीकरण): रॉ (RAW) की जानकारी सीधे एक छोटे शहर के पुलिस कप्तान तक सेकंडों में पहुंचेगी. 'Whole-of-Government' अप्रोच अब हकीकत है.
H - Human Rights (मानवाधिकार): भारत एक जिम्मेदार लोकतंत्र है. यह नीति साफ करती है कि आतंकियों से लड़ते हुए भी निर्दोषों के अधिकारों की रक्षा की जाएगी.
A - Attenuating Conditions (पनपने से रोकना): सिर्फ आतंकी को मारना काफी नहीं, उस सोच को मारना जरूरी है. इसमें 'डी-रेडिकलाइजेशन' प्रोग्राम्स को शामिल किया गया है.
A - Aligning International Efforts (अंतरराष्ट्रीय तालमेल): भारत अब इंटरपोल और एफएटीएफ (FATF) के साथ मिलकर आतंकियों की 'सेफ हेवन' को तबाह करेगा.
R - Recovery and Resilience (उबरना): अगर कोई हमला होता है, तो समाज को डराना नहीं, बल्कि उसे तुरंत सामान्य स्थिति में लाना सरकार की प्राथमिकता होगी.
'प्रहार' के मुख्य हथियार‘प्रहार’ नीति के तहत आतंक के हर रूप-हर खतरे का अलग समाधान है. इतना ही नहीं उस खतरे से निपटने की जिम्मेदारी भी अलग-अलग एजेंसियों पर डाली गई है.
खतरे और समाधान की इस व्यवस्था को आसान तरीके से समझते हैं.
| खतरा | समाधान | प्रमुख एजेंसी |
| ड्रोन | लेजर और जैमिंग | BSF / DRDO |
| टेरर फंडिंग | क्रिप्टो ट्रैकिंग | FIU-IND |
| घुसपैठ | स्मार्ट फेंसिंग | BSF |
| विदेशी आतंकी | 'ब्लैक सेल' / इंटरपोल | R&AW / CBI |
| साइबर फ्रॉड | 1930 हेल्पलाइन | Cyber Cell |
‘प्रहार’ का परिचय तो हो गया. उसकी जरूरत क्यों पड़ी, ये भी जान लिया. अब जरा एक नजर उन तौर-तरीकों पर भी डाल लेते हैं, जो ‘प्रहार’ को उसका उद्देश्य पूरा करने में मदद करेंगे.
शुरुआत ‘ब्लैक सेल’ से…
'ब्लैक सेल': भारत का 'गुप्त' वार रूमअब उस विषय पर आते हैं जो इस पॉलिसी का सबसे रहस्यमयी हिस्सा है - 'ब्लैक सेल' (Black Cell). यह एक ऐसी इकाई है जिसके बारे में सार्वजनिक रूप से बहुत कम चर्चा होती है.
ये 'ब्लैक सेल' क्या काम करता है?
यह गृह मंत्रालय और रॉ (R&AW) के साथ मिलकर काम करने वाला एक विशेष कार्य बल है. नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल (NSC) इनसाइडर ब्रीफिंग, 2026 के मुताबिक ‘ब्लैक सेल’ का मुख्य काम भारत की सीमा के बाहर उन खतरों को खत्म करना है जो देश की सुरक्षा के लिए सीधा खतरा हैं.
‘ब्लैक सेल’ की कार्यप्रणाली के तीन अहम हिस्से हैं.
- विदेशी धरती पर ऑपरेशन: अगर किसी दूसरे देश में बैठकर कोई आतंकी कमांडर भारत पर हमले की साजिश रच रहा है, तो 'ब्लैक सेल' उसे न्यूट्रलाइज करने की क्षमता रखता है.
- इनविजिबल एसेट्स: यह सेल विदेशों में अपने जासूसों का जाल बुनता है जो आतंकी संगठनों के भीतर घुसपैठ करते हैं.
- प्रिसिजन टारगेटिंग: जैसे इजरायल की मोसाद काम करती है, ठीक उसी तर्ज पर भारत ने अब अपनी क्षमता को 'ऑफेंसिव' मोड में डाल दिया है.
पुरानी कटीली तारें अब गुजरे जमाने की बात हो गई हैं. 'प्रहार' नीति के तहत भारत अपनी सीमाओं को 'स्मार्ट फेंसिंग' (Smart Fencing) से कवर कर रहा है.
लेजर दीवारें (Laser Walls): गृह मंत्रालय के 'स्मार्ट बॉर्डर प्रोजेक्ट' अपडेट 2026 के मुताबिक उन दुर्गम इलाकों में जहां नदी या दलदल के कारण तार नहीं लगाए जा सकते, वहां लेजर की दीवारें लगाई गई हैं. जैसे ही कोई घुसपैठिया लेजर बीम को पार करेगा, कंट्रोल रूम में अलार्म बज जाएगा.
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ये लेजर वॉल दो तरह के सेंसर्स पर काम करती है.
- थर्मल सेंसर: रात के अंधेरे या घने कोहरे में भी ये सेंसर इंसानी शरीर की गर्मी को पहचान लेते हैं.
- फाइबर ऑप्टिक सेंसर्स: जमीन के नीचे ऐसे तार बिछाए गए हैं जो किसी भी तरह की सुरंग बनाने की आहट को तुरंत पकड़ लेते हैं.
आतंकवाद का कोई देश नहीं होता, इसलिए उससे लड़ने के लिए ग्लोबल साथ जरूरी है. 'प्रहार' नीति ने इंटरपोल (Interpol) के साथ भारत के रिश्ते को एक नए लेवल पर पहुंचा दिया है. सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) की इंटरपोल-इंडिया डेस्क दिन-रात इसी काम में जुटी रहती है.
- रेड कॉर्नर नोटिस में तेजी: भारत ने इंटरपोल के साथ एक 'फास्ट-ट्रैक' चैनल बनाया है ताकि भारत विरोधी आतंकियों के खिलाफ नोटिस कुछ घंटों के भीतर जारी हो सके.
- I-24/7 ग्लोबल नेटवर्क: विदेशों में छिपे आतंकियों के फिंगरप्रिंट्स, डीएनए (DNA) और पासपोर्ट डेटा का मिलान अब सेकंडों में हो जाता है.
- ऑपरेशन चक्र: हाल ही में इंटरपोल और सीबीआई (CBI) ने मिलकर उन कॉल सेंटर्स को ध्वस्त किया जो आतंकियों के लिए फंड इकट्ठा कर रहे थे.
बॉर्डर पर अब घुसपैठियों से ज्यादा ड्रोन्स का खतरा है. 'प्रहार' का काउंटर-प्लान इसे तकनीक से कुचलता है. बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) की 'ऑपरेशन सतर्क' रिपोर्ट के मुताबिक ये निगरानी तीन तरह से होती है.
- एंटी-ड्रोन लेजर सिस्टम: ये गन ड्रोन के इलेक्ट्रॉनिक्स को हवा में ही जला देती हैं.
- रेडियो फ्रीक्वेंसी जैमिंग: ड्रोन जिस सिग्नल से उड़ता है, उसे जैम कर देना ताकि वह क्रैश हो जाए.
- सिविलियन सर्विलांस: सीमावर्ती गांवों के लोगों को 'ड्रोन मित्र' बनाया गया है.
इंटरनेट की वो काली दुनिया जहां हथियारों की मंडी लगती है, अब भारत के रडार पर है. भारत सरकार के गृह मंत्रालय का इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) दो तरीके से क्रिप्टो और डार्क वेब की काली दुनिया पर अटैक करेगा.
साइबर हंटिंग: 'प्रहार' के तहत साइबर एक्सपर्ट्स डार्क वेब पर 'हनीपॉट' (नकली आईडी) बनाकर आतंकियों को जाल में फंसाते हैं.
क्रिप्टो ट्रैकिंग: आतंकी 'बिटकॉइन' में पैसा मांगते हैं, लेकिन भारत अब ऐसी एआई (AI) तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है जो इन गुप्त ट्रांजैक्शन को भी डिकोड कर सकती है.
साइबर हमला और आपके बैंक अकाउंट की सुरक्षाआतंकवाद का एक बड़ा हिस्सा अब 'इकोनॉमिक टेररिज्म' है. आतंकी संगठनों का मकसद भारत की बैंकिंग व्यवस्था को ठप करना भी है.
'प्रहार' में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की डिजिटल सुरक्षा गाइडलाइंस, 2026 को आधार बनाया गया है. इसके तहत तीन स्तर पर इस दिशा में रोकथाम के कदम उठाए जा रहे हैं.
- रियल-टाइम ट्रांजैक्शन मॉनिटरिंग: अगर आपके खाते से कोई संदिग्ध ट्रांजैक्शन किसी 'हाई-रिस्क' देश के लिए होता है, तो AI उसे तुरंत ब्लॉक कर देगा.
- 1930 हेल्पलाइन: साइबर धोखाधड़ी की रिपोर्टिंग के लिए इस नंबर को और मजबूत किया गया है.
- जीरो लायबिलिटी पॉलिसी: यदि किसी साइबर आतंकी हमले में बैंक का डेटा ब्रीच होता है, तो ग्राहकों के नुकसान की भरपाई सरकार सुनिश्चित करेगी.
आतंकवाद का सबसे डरावना चेहरा वह है जिसमें धमाके की आवाज नहीं होती. बल्कि हवा में जहर (Chemical), पानी में वायरस (Biological) या रेडिएशन (Radiological/Nuclear) फैलाकर लाखों लोगों को निशाना बनाया जाता है. इसे CBRNE (Chemical, Biological, Radiological, Nuclear and Explosives) खतरा कहते हैं.
'प्रहार' नीति के तहत भारत ने पहली बार इन 'अदृश्य' हमलों के लिए एक 'स्पेशल एनवायरमेंटल शील्ड' तैयार की है. इसके तहत देश के प्रमुख मेट्रो शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों में 'अर्ली वार्निंग सेंसर नेटवर्क' लगाए जा रहे हैं. जो हवा या पानी में किसी भी संदिग्ध बदलाव को सेकंडों में भांप लेंगे.
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और गृह मंत्रालय की संयुक्त CBRNE गाइडलाइंस 2026 के तहत अगर कोई आतंकी समूह 'डर्टी बम' (रेडियोधर्मी विस्फोटक) बनाने की कोशिश करता है. तो 'प्रहार' के तहत भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) और NDRF की एक जॉइंट टीम, जिसे 'क्विक रिएक्शन मेडिकल टीम' (QRMT) कहा जाता है, तुरंत एक्टिव हो जाएगी.
यही नहीं, ऐसी किसी भी स्थिति से निपटने के लिए अस्पतालों में विशेष 'डिटॉक्सिफिकेशन वार्ड्स' और अत्याधुनिक 'CBRNE मोबाइल लैब्स' को तैनात किया गया है. ताकि किसी भी हमले की स्थिति में 'मिनटों' के भीतर असर को बेअसर किया जा सके.
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सोशल मीडिया और कट्टरपंथ (Radicalization)आतंकवाद की सबसे बड़ी फैक्ट्री अब वॉट्सऐप और टेलीग्राम पर चल रही है. 'प्रहार' के तहत आतंकवाद के इन रास्ते को भी पूरी तरह बर्बाद करने का बंदोबस्त किया गया है.
राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) की रिपोर्ट के मुताबिक इसके तहत दो स्तरों पर काम किया जा रहा है.
- काउंटर-नैरेटिव: सरकार स्थानीय हस्तियों की मदद से ऐसे वीडियो जारी करती है जो आतंकियों के झूठ का पर्दाफाश करते हैं.
- AI मॉनिटरिंग: गृह मंत्रालय का सॉफ्टवेयर हर मिनट लाखों सोशल मीडिया पोस्ट्स को स्कैन करता है ताकि 'जिहाद' या 'हथियार' जैसे शब्दों वाली संदिग्ध गतिविधियों को पकड़ा जा सके.
'प्रहार' नीति कहती है कि 140 करोड़ भारतीय इस जंग के सिपाही हैं. गृह मंत्रालय के ‘प्रहार’ विजन डॉक्यूमेंट के मुताबिक केंद्र और राज्य सरकारों के गृह मंत्रालयों और पुलिस बलों द्वारा समय-समय पर जन संदेश जारी किए जाते हैं.
इस संदेशों में जनता से तीन तरह की अपील की जाती है.
- रिपोर्ट करें: अगर आपको किसी ग्रुप में देशविरोधी बातें दिखें, तो भारत सरकार के पोर्टल पर गुमनाम रहकर रिपोर्ट करें.
- संदिग्ध ऐप से बचें: अज्ञात स्रोतों से ऐप्स डाउनलोड न करें.
- अफवाह न फैलाएं: बिना पुख्ता जानकारी के मैसेज फॉरवर्ड न करें.
आतंकवाद के खिलाफ जंग में अक्सर यह आरोप लगते हैं कि सुरक्षा एजेंसियां जोश-जोश में निर्दोषों को भी लपेटे में ले लेती हैं. लेकिन 'प्रहार' (PRAHAAR) नीति में इस 'कोलेटरल डैमेज' को रोकने के लिए एक सख्त 'सेफगार्ड मैकेनिज्म' बनाया गया है.
गृह मंत्रालय ने साफ किया है कि भारत एक कानून से चलने वाला लोकतंत्र है, न कि कोई 'पुलिस स्टेट'. इसके तहत, किसी भी संदिग्ध को हिरासत में लेने से पहले 'मल्टी-लेवल वेरिफिकेशन' अनिवार्य है. यानी अब केवल एक खुफिया रिपोर्ट के आधार पर गिरफ्तारी नहीं होगी, बल्कि कम से कम तीन अलग-अलग एजेंसियों (जैसे NIA, स्थानीय पुलिस और इंटेलिजेंस ब्यूरो) को उस व्यक्ति के खिलाफ ठोस डिजिटल या फिजिकल सबूत पेश करने होंगे.
केंद्रीय गृह मंत्रालय के मानवाधिकार प्रकोष्ठ और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की संयुक्त रिपोर्ट 2026 के मुताबिक पूछताछ की प्रक्रिया को पूरी तरह से CCTV मॉनिटरिंग और डिजिटल लॉगिंग के अधीन किया गया है. मकसद साफ है कि किसी तरह से मानवाधिकारों का उल्लंघन न हो सके.
'प्रहार' के तहत एक 'इंडिपेंडेंट ओवरसाइट कमेटी' का भी गठन किया गया है, जो यह सुनिश्चित करती है कि किसी निर्दोष का नाम गलती से भी चार्जशीट में न आए.
अगर जांच के दौरान कोई व्यक्ति निर्दोष पाया जाता है, तो उसकी सामाजिक गरिमा को बहाल करने के लिए 'क्विक क्लोजर रिपोर्ट' और मुआवजे का प्रावधान भी इस नीति का हिस्सा है.
प्रहार का भविष्यभारत की यह पहली कॉम्प्रिहेंसिव काउंटर-टेररिज्म पॉलिसी 'प्रहार' एक मील का पत्थर है. यह बताती है कि भारत अब रक्षात्मक नहीं है. हम ड्रोन का जवाब ड्रोन से, कोड का जवाब कोड से और स्मार्ट फेंसिंग से सरहद को अभेद्य बनाने के लिए तैयार हैं.
यह नीति आतंकियों के फाइनेंसर्स और उनके वैचारिक आकाओं को ये संदेश देती है कि - "अब बच निकलने का कोई रास्ता नहीं है."
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