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आसाराम बापू के चेलों, कुछ आस बाकी रहने दो

सुबह उठते ही ट्विटर पर बापू को न्याय दिलाने वाले किन्हीं और कामों में मन क्यों नहीं लगाते?

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26 जुलाई 2016 (अपडेटेड: 25 जुलाई 2016, 03:51 AM IST)
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सुबह 7 बजे ट्विटर खोलकर देखा तो एक हैशटैग चल रहा था #Bapunirdoshhain. पहली बार ये हैशटैग देखा था तो जानने की इच्छा हुई कि मामला क्या है. क्लिक करके देखा तो पता चला ये गांधी के नहीं आसाराम बापू के चेले हैं. उनको 'न्याय' दिलाने के लिए रोज सुबह ट्विटर पर आ लगते हैं. फिर 9-10 बजे तक #Bapukorihakaro, #Bapukonyaydo जैसे हैशटैग ट्रेंडिंग में रहते हैं. इस दौरान ट्रेंड कराने वालों के सगे बापू बड़बड़ाते रहते हैं कि कुछ और काम भी कर ले. ऐसा ही एक वीडियो कुछ दिन पहले वायरल हुआ था. आसाराम खुद वो वीडियो देखते तो जेल से बाहर आने को मना कर देते. https://youtu.be/4AdA_Wm9xbA पहले ये अजीब लगता था कि कितने लोग काम धंधा छोड़ सुबह होते ही आकर भिड़ जाते हैं. कोर्ट ट्रायल पर चल रहे एक आदमी को रिहा कराने के लिए. उन्हीं में से कुछ कहते हैं कि वो निर्दोष हैं. कुछ कहते हैं कि न्याय करो. भाई यार थोड़ा धीरज तो धरो. क्या पता उनको रिहा करना उनके साथ अन्याय हो. आखिर कोर्ट, कानून और सिस्टम अपना काम कर रहा है. वो प्रक्रिया पूरी होने में टाइम तो लगता ही है. देखो कुछ दिन पहले कोई आदमी जेल से छूटा है. जब वो जेल गया तो लड़का था. पूरे 23 साल जेल में रहा. वो कौन था क्या था इसका फैसला कोर्ट ने किया. उसे छुड़ाने के लिए कोई हैशटैग नहीं चले. उसका घर परिवार लगा रहा होगा उसे छुड़ाने में. बाकी तो किसी को पता भी नहीं था कि कोई ऐसा आदमी जेल में बंद भी है. आसाराम का करियर अध्यात्म से जुड़ा था. उसमें तो और भी धैर्य रखने की बात कही जाती है. वो जेल जाने से पहले वाली जिंदगी में लोगों को अध्यात्म में ठेलते रहे. जिसमें सबसे पहले ये आता है कि सब कुछ उस परमपिता पर छोड़ दो. वो जो करेगा अच्छा करेगा. क्या पता बापू के केस में भी वो सबसे बड़ा बापू अर्थात परमपिता अच्छा कर रहा हो.
गीता में लिखा है "जो मनुष्य सुख, दुख, क्रोध, क्षोभ में एक समान आचरण करता है. वही सिद्ध पुरुष है." तुलसी बाबा भी लिख गए हैं "हानि लाभ जीवन मरण जस अपजस बिधि हाथ." और तो साहब विधि का मतलब समझते हो? विधि माने विधाता, जो ऊपर से सब कंट्रोल कर रहा है. धरती पर विधि माने कानून. जिसके पंजे में फंसे हैं बापू. जब दोनों विधि आसाराम को न्याय दिलाने के लिए कटिबद्ध हैं तो काहे खामखां अपने नेट पैक का गला घोंट रहे हो.
सुबह उठकर जब पार्क की तरफ वर्जिश के लिए जाना चाहिए. दूध लेने जाना चाहिए. अच्छी किताब पढ़नी चाहिए. पौधों को पानी देना चाहिए. उतनी सुबह आप उठकर एक कानूनी रूप से मुजरिम को चूं चूं चिर्रो के माध्यम से न्याय दिलाने लगते हैं. जबकि अच्छे से पता है "होइहै सोइ जो राम रचि राखा." उतने वक्त में चाय बनाकर पी लो तो वह भी शरीर में लगेगी. आपको पता है आसाराम मामले में पांच गवाह टपकाए जा चुके हैं. अब ये कानून का मामला है. हो सकता है इससे उनका केस मजबूत होने की बजाय कमजोर हो जाए. क्या पता मरे हुए एक्स चेलों की आत्मा आकाश से गवाही देने आ जाए और ऐन वक्त पर रिहाई टल जाए. उस लड़की भी खोज खबर रखनी चाहिए आपको. जो नाबालिग थी. जिसने केस किया था आसाराम पर. उसको और उसकी फैमिली को कितना परेशान किया गया. लेकिन उसने अपना बयान नहीं बदला. केस वापस नहीं लिया. उसको न्याय दिलाने के लिए कोई हैशटैग नहीं चलता. उसने किसी गवाह की सुपारी भी नहीं दी. देखो कायदे से. लड़ाई हाथी चींटी की है. एक तरफ वो अकेला परिवार है. एक तरफ आसाराम का एंपायर और चेलों का हुजूम. लड़ाई बराबर की नहीं है दोस्त. अपना पक्ष सोच समझ कर चुनो. 'विधि' पर भरोसा रखो. ये पुराना है ट्विटर नया. नया नौ दिन पुराना सौ दिन वाली कहावत सुने हो न.

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