WFI ने दिया दो बार के ओलंपिक मेडलिस्ट सुशील कुमार को करारा झटका
ट्रयल्स की डेट बदलने से किया इन्कार.
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एक मैच के दौरान अपने सपोर्ट स्टाफ के साथ Sushil Kumar, फाइल फोटो
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सुशील कुमार. पहलवान हैं. दो बार ओलंपिक मेडल जीत चुके हैं. रियो 2016 ओलंपिक से पहले काफी विवाद में रहे थे. ओलंपिक में जाने को लेकर नरसिंह यादव के साथ हुई इनकी लड़ाई ने काफी सुर्खियां बटोरी थीं. अब एक बार फिर से ओलंपिक करीब आ गए हैं. और सुशील एक बार फिर से चर्चा में हैं. रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (WFI) ने सुशील की एक अपील मानने से इनकार कर दिया है.
सुशील ने शुक्रवार, तीन जनवरी को होने वाले एशियन चैंपियनशिप के ट्रायल से पीछे हटने का फैसला किया था. एशियन चैंपियनशिप फरवरी में खेली जाएगी. इन ट्रायल्स के जरिए मार्च में होने वाले महाद्वीपीय ओलंपिक क्वॉलिफाइंग इवेंट की टीम भी घोषित होनी थी. सुशील चाहते थे कि फेडरेशन ट्रायल्स की डेट आगे बढ़ा दे.
सुशील ने कहा था कि वह अभी तक अपने कंधे की चोट से नहीं उबर पाए हैं. बुधवार, एक जनवरी को उन्होंने रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (WFI) को अपना मेडिकल सर्टिफिकेट भी सौंपा था. साल 2008 ओलंपिक के ब्रॉन्ज़ और 2012 ओलंपिक के सिल्वर मेडलिस्ट 36 साल के सुशील ने ट्रायल को आगे खिसकाने की मांग की थी. फेडरेशन ने उनकी इस मांग को सिरे से नकार दिया है.
वर्ल्ड चैंपियनशिप के बाद से ही सुशील के भविष्य पर सवाल उठ रहे हैं. उन्होंने इसके बाद किसी भी इवेंट में भाग नहीं लिया है. यहां तक कि वे नेशनल चैंपियनशिप में भी नहीं उतरे थे. उनकी गैर-मौजूदगी में 18 साल के गौरव बालियान 74 Kg में देश के बेस्ट पहलवान बनकर उभरे हैं. ट्रायल्स में इन दोनों के बीच के मुकाबले पर काफी चर्चा थी. अब ऐसा लग रहा है कि इस मुकाबले को देखने के लिए हमें इंतजार करना होगा. सुशील ने इस बारे में कहा,
हाल के दिनों में बहुत अच्छा नहीं रहा है Sushil Kumar (लाल ड्रेस) का प्रदर्शन
भारत के लिए अभी तक कुल चार पहलवानों ने कोटा जीते हैं. बजरंग पुनिया (65 kg), रवि दहिया (57 kg), दीपक पुनिया (86 kg), विनेश फोगाट (53 kg) ने अपनी-अपनी कैटेगरी में ओलंपिक कोटा हासिल किए हैं. इनमें से बजरंग को छोड़कर बाकी सबको ट्रायल्स से गुजरना होगा. WFI के मुताबिक, उनकी कैटेगरी के ट्रायल्स बस रोम रैंकिंग सीरीज और एशियन चैंपियनशिप के लिए होंगे.
भारतीय पुरुष पहलवान अभी भी 74 Kg, 97 kg, और 125 kg फ्रीस्टाइल कैटेगरी में क्वॉलिफाई कर सकते हैं. इधर महिलाओं में विनेश को छोड़कर अभी तक कोई भी महिला पहलवान ओलंपिक कोटे नहीं जीत पाई है. ग्रीको-रोमन में अभी तक कोई भी भारतीय टोक्यो ओलंपिक का कोटा नहीं जीत पाया है.
इसके साथ ही नरसिंह का रियो 2016 ओलंपिक में जाना पक्का हो गया था. लेकिन तभी नरसिंह दो बार डोप टेस्ट में फेल हो गए.

Narsingh Yadav, फाइल फोटो
उन्होंने दलील दी थी कि किसी ने साजिश के तहत उनके खाने में कुछ मिला दिया गया था. नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी (NADA) ने उनकी दलील मान ली. नरसिंह को NADA से क्लीन चिट मिल गई, लेकिन वर्ल्ड एंटी डोपिंग एजेंसी (WADA) ने इस फैसले के खिलाफ अपील कर दी. इसके बाद खेल मामलों की पंचाट (CAS) ने नरसिंह यादव को चार साल के लिए बैन कर दिया. यह बैन रियो ओलंपिक में उनके पहले मैच से ठीक पहले लगा था.
बर्मिंघम 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में अपने एथलीट्स को भेजने पर राजी हुआ इंडियन ओलम्पिक एसोसिएशन
सुशील ने शुक्रवार, तीन जनवरी को होने वाले एशियन चैंपियनशिप के ट्रायल से पीछे हटने का फैसला किया था. एशियन चैंपियनशिप फरवरी में खेली जाएगी. इन ट्रायल्स के जरिए मार्च में होने वाले महाद्वीपीय ओलंपिक क्वॉलिफाइंग इवेंट की टीम भी घोषित होनी थी. सुशील चाहते थे कि फेडरेशन ट्रायल्स की डेट आगे बढ़ा दे.
सुशील ने कहा था कि वह अभी तक अपने कंधे की चोट से नहीं उबर पाए हैं. बुधवार, एक जनवरी को उन्होंने रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (WFI) को अपना मेडिकल सर्टिफिकेट भी सौंपा था. साल 2008 ओलंपिक के ब्रॉन्ज़ और 2012 ओलंपिक के सिल्वर मेडलिस्ट 36 साल के सुशील ने ट्रायल को आगे खिसकाने की मांग की थी. फेडरेशन ने उनकी इस मांग को सिरे से नकार दिया है.
# सुशील को नहीं मिलेगा फायदा
सुशील की इस मांग पर फेडरेशन ने दो जनवरी, गुरुवार को फैसला लेने की बात कही थी. अब WFI के प्रेसिडेंट ब्रजभूषण शरण सिंह ने PTI से बात करते हुए कहा कि ट्रायल्स सभी कैटेगरी में होंगे. सिंह ने कहा,'जाहिर है कि ट्रायल्स आगे नहीं खिसकाए जाएंगे. 74 Kg में भी रेसलर्स ट्रायल देंगे. अगर सुशील को चोट लगी है, तो हम क्या कर सकते हैं. हम रैंकिंग सीरीज में 74 kg ट्रायल्स में जीतने वाले पहलवान का प्रदर्शन देखेंगे. उसके बाद हम देखेंगे कि आगे क्या करना है.'इस मामले पर WFI के असिस्टेंट सेक्रेटरी विनोद तोमर ने कहा,
'अगर WFI को लगता है कि टोक्यो ओलंपिक के लिए एशियन क्वॉलिफायर्स में हमारे पास मजबूत कैंडिडेट नहीं है, तो शायद फेडरेशन सुशील को ट्रायल्स में बुला ले.'
# सुशील की अपील
जानने लायक है कि रियो ओलंपिक से पहले हुए विवाद के चलते भारत कोटा मिलने के बाद भी 74 Kg में अपना पहलवान नहीं भेज पाया था. इसके बाद सुशील ने साल 2018 में दोबारा से बड़े इवेंट्स में वापसी की. उन्होंने साल 2018 में ही हुए गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीता था. लेकिन इसके बाद इसी साल हुए एशियन गेम्स में वह शुरुआत में ही बाहर हो गए थे. साथ ही सुशील 2019 में हुई वर्ल्ड चैंपियनशिप में भी काफी जल्दी हार गए थे. यह पहला ओलंपिक क्वॉलिफाइंग इवेंट था.वर्ल्ड चैंपियनशिप के बाद से ही सुशील के भविष्य पर सवाल उठ रहे हैं. उन्होंने इसके बाद किसी भी इवेंट में भाग नहीं लिया है. यहां तक कि वे नेशनल चैंपियनशिप में भी नहीं उतरे थे. उनकी गैर-मौजूदगी में 18 साल के गौरव बालियान 74 Kg में देश के बेस्ट पहलवान बनकर उभरे हैं. ट्रायल्स में इन दोनों के बीच के मुकाबले पर काफी चर्चा थी. अब ऐसा लग रहा है कि इस मुकाबले को देखने के लिए हमें इंतजार करना होगा. सुशील ने इस बारे में कहा,
'मैंने फेडरेशन से ट्रायल्स को खिसकाने की अपील की है. मैं अपने दाएं कंधे में लगी चोट से उबर रहा हूं और शुक्रवार के ट्रायल्स के लिए तैयार नहीं हो पाऊंगा. मैं लंबे वक्त से इसकी तैयारी कर रहा हूं, इसलिए मुझे उम्मीद है कि फेडरेशन इसका संज्ञान लेगी और ट्रायल्स को बाद के लिए शेड्यूल करेगी.'

हाल के दिनों में बहुत अच्छा नहीं रहा है Sushil Kumar (लाल ड्रेस) का प्रदर्शन
# बेहद जरूरी हैं यह ट्रायल्स
शुक्रवार को होने वाले ट्रायल्स टोक्यो ओलंपिक के लिए काफी महत्वपूर्ण हैं. WFI ने घोषणा की थी कि यहां जीतने वाला तीन बड़े टूर्नामेंट की टीम में जगह बना सकता है. ये तीन टूर्नामेंट हैं- 25-28 जनवरी तक रोम में होने वाली पहली रैंकिंग सीरीज. 18 से 25 फरवरी तक दिल्ली में होने वाली एशियन चैंपियनशिप. मार्च में चीन में होने वाला ओलंपिक क्वॉलिफाइंग टूर्नामेंट.भारत के लिए अभी तक कुल चार पहलवानों ने कोटा जीते हैं. बजरंग पुनिया (65 kg), रवि दहिया (57 kg), दीपक पुनिया (86 kg), विनेश फोगाट (53 kg) ने अपनी-अपनी कैटेगरी में ओलंपिक कोटा हासिल किए हैं. इनमें से बजरंग को छोड़कर बाकी सबको ट्रायल्स से गुजरना होगा. WFI के मुताबिक, उनकी कैटेगरी के ट्रायल्स बस रोम रैंकिंग सीरीज और एशियन चैंपियनशिप के लिए होंगे.
भारतीय पुरुष पहलवान अभी भी 74 Kg, 97 kg, और 125 kg फ्रीस्टाइल कैटेगरी में क्वॉलिफाई कर सकते हैं. इधर महिलाओं में विनेश को छोड़कर अभी तक कोई भी महिला पहलवान ओलंपिक कोटे नहीं जीत पाई है. ग्रीको-रोमन में अभी तक कोई भी भारतीय टोक्यो ओलंपिक का कोटा नहीं जीत पाया है.
# पिछली बार का विवाद
नरसिंह यादव ने साल 2015 की वर्ल्ड चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज़ मेडल जीता था. इसके चलते वह ओलंपिक के लिए क्वॉलिफाई कर गए थे. लेकिन चोट के चलते 2016 ओलंपिक के क्वॉलिफिकेशन में नहीं खेले सुशील ने उनके साथ ट्रायल्स की मांग कर दी. बाद में अपनी मांग को लेकर सुशील दिल्ली हाई कोर्ट चले गए. हालांकि वह अपना केस हार गए. कोर्ट ने उनकी अपील रिजेक्ट कर दी.इसके साथ ही नरसिंह का रियो 2016 ओलंपिक में जाना पक्का हो गया था. लेकिन तभी नरसिंह दो बार डोप टेस्ट में फेल हो गए.

Narsingh Yadav, फाइल फोटो
उन्होंने दलील दी थी कि किसी ने साजिश के तहत उनके खाने में कुछ मिला दिया गया था. नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी (NADA) ने उनकी दलील मान ली. नरसिंह को NADA से क्लीन चिट मिल गई, लेकिन वर्ल्ड एंटी डोपिंग एजेंसी (WADA) ने इस फैसले के खिलाफ अपील कर दी. इसके बाद खेल मामलों की पंचाट (CAS) ने नरसिंह यादव को चार साल के लिए बैन कर दिया. यह बैन रियो ओलंपिक में उनके पहले मैच से ठीक पहले लगा था.
बर्मिंघम 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में अपने एथलीट्स को भेजने पर राजी हुआ इंडियन ओलम्पिक एसोसिएशन

